ये क़ानून है या जलेबी: अरूण जेटली

  • 29 दिसंबर 2011
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Image caption भाजपा ने राज्य सभा में लोकपाल विधेयक में संशोधनों की मांग की है.

राज्य सभा में लोकपाल पर जारी बहस के दौरान मुख्य विपक्षी दल भाजपा के नेता अरुण जेटली ने कहा है कि मौजूदा लोकपाल विधेयक में बहुत सी खामियां हैं और भाजपा इसका समर्थन नहीं कर सकती.

राज्य सभा में भाजपा ने लोकपाल विधेयक में कई संशोधनों को सामने रखा है और सरकार से अपील की है कि अगर वो उसके सुझाए संशोधन पर सहमत हो जाए, तो ही वो विधेयक को समर्थन देने को राज़ी होगी.

इससे पहले सोमवार को लोकपाल विधेयक लोकसभा में कुछ संशोधनों के साथ पारित किया जा चुका है और अब सबकी निगाहें राज्य सभा पर टिकी हैं जहां यूपीए सरकार अल्पमत में है.

हालांकि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उम्मीद जताई है कि सरकार राज्यसभा में लोकपाल बिल को पास कराने में सफल होगी.

उधर टीम अन्ना सदस्य किरण बेदी ने अपने ट्वीट में कहा है कि इस स्वरूप में लोकपाल विधेयक के पास नहीं होने से सीबीआई की शक्तियों को कम करने से बचाया जा सकेगा.

किरण बेदी ने कहा, "मैने सीबीआई-बचाओ मुहिम की अपील की थी. लोकपाल विधेयक के पास नहीं होने से कम से कम सीबीआई की शक्तियों को घटने से बचाया जा सकेगा."

राज्यसभा में बहस के दौरान विपक्षी नेता अरुण जेटली ने कहा, “ये क़ानून बेहद कमज़ोर है. हमें राष्ट्र की भावनाओं के बारे में भी सोचना चाहिए. आप ऐसा क़ानून कैसे बना सकते हैं, जिसमें लोकपाल की नियुक्ति और बर्खास्तगी का अधिकार सरकार के ही हाथों में हो? इस क़ानून में जांच की प्रक्रिया इतनी टेढ़ी-मेढ़ी है कि कभी-कभी लगता है कि ये क़ानून है या जलेबी? सीबीआई को निष्पक्ष बनाए जाने की ज़रूरत है, न कि मौजूद क़ानूनों को लांघ कर एक नया क़ानून बनाने की.”

राज्यों में लोकपाल की नियुक्ति के मुद्दे पर अरुण जेटली का कहना था कि सरकार ऐसा क़ानून न बनाए जिसके तहत वो राज्य की संप्रभुता का उल्लंघन करे.

आंकड़े

245 सदस्यों वाली राज्य सभा में यूपीए सरकार के 100 से भी कम सांसद हैं जिस कारण लोकपाल बिल के पारित होने को लेकर संदेह बना हुआ है.

कांग्रेस, एनसीपी, डीएमके, तृणामूल कांग्रेस, एलजेपी और आरएलडी के कुल मिलाकर 93 सदस्य हैं. यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन देने वाले दलों के पास भी कुल 27 ही सदस्य हैं. इनमें बीएसपी के 18, समाजवादी पार्टी के पांच और आरजेडी के चार सदस्य हैं.

कांग्रेस को सहयोगी पार्टियों का पूर्ण समर्थन भी हासिल नहीं है. बुधवार को वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व से मुलाक़ात की थी. तृणमूल बिल में राज्यों में लोकायुक्त बनाने के प्रावधान से नाख़ुश है.

समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के रुख़ पर भी काफ़ी कुछ निर्भर करेगा.

अगर राज्यसभा ऐसे किसी संशोधन को मंज़ूर कर लेती है जिसे लोकसभा ने मंज़ूर नहीं किया है तो बिल को फिर से लोकसभा के पास भेजना होगा. अगर लोकसभा ये संशोधन नामंज़ूर कर देती है तो केवल संयुक्त सत्र में ही बिल पारित हो सकता है. अन्यथा ये एक बार फिर ठंडे बस्ते में जा सकता है.

लोकसभा में पारित

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Image caption कांग्रेस के पास राज्य सभा में पर्याप्त आंकड़े नहीं हैं.

मंगलवार को 10-12 घंटों तक चली बहस के बाद लोकपाल बिल कुछ संशोधनों के साथ लोकसभा में पारित हो गया था हालांकि इसे संवैधानिक दर्जा नहीं मिल पाया है.

उधर अन्ना हज़ारे ने अपना तीन दिन का अनशन दूसरे दिन ही बुधवार को मुंबई में ख़त्म कर दिया. साथ ही उन्होंने जेल भरो आंदोलन भी फ़िलहाल रोक दिया है.

अन्ना के सहयोगी अरविंद केजरीवाल के मुताबिक़ इसका कारण अन्ना हज़ारे की बिगड़ती तबियत और लोकसभा का “कमज़ोर” लोकपाल विधेयक पास करना है.

विपक्ष ने मंगलवार को लोकपाल बिल में कई संशोधनों के प्रस्ताव रखे थे जैसे कॉरपोरेट, मीडिया और एनजीओ को भी इसके दायरे में लाना लेकिन ये माने नहीं गए. वहीं समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने वॉकआउट किया था.

लोकपाल बिल पर चर्चा करने के लिए संसद के शीतकालीन सत्र को ख़ासतौर पर तीन दिनों के लिए बढ़ाया गया है.

सबसे पहली बार वर्ष 1968 में लोकपाल बिल पेश किया गया था लेकिन वो पास नहीं हो सका. उसके बाद भी कई बार ये बिल पेश किया गया था लेकिन पास नहीं हो पाया था.

'सीबीआई का दुरुपयोग'

बहस में हिस्सा लेते हुए बहुजन समाज पार्टी के सतीश चंद्र मिश्रा ने सीबीआई के दुरुपयोग के आरोप लगाए.

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती की ताज कॉरीडॉर मामले में कोई भूमिका नहीं थी, लेकिन उसके बावजूद भी उन पर केस चलाया गया.

मिश्रा ने कहा, "सीबीआई को स्वतंत्र करने की ज़रूरत है."

कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी के ये कहने पर कि लोकपाल विधेयक में आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है, मिश्रा ने इसे चौंका देने वाली बात बताया.

उन्होंने कहा, "ये कौन सा आरक्षण है ये आपकी मानसिकता को उजागर करता है. आपका कहना कि ये ज़रूरी नहीं है कि सभी तरह के लोगों को लोकपाल में लाया जाएगा, इसका मतलब है कि सारी शक्ति आपके पास रहेगी. उत्तर प्रदेश में 80 न्यायाधीशों में से एक भी अनुसूचित जाति का नहीं है."

मिश्रा ने आरोप लगाया कि बिल का मक़सद संविधान के संघीय ढाँचे को बरबाद करना है.

सीपीआईएम के सीताराम येचुरी ने कहा कि लोकपाल में नियुक्ति की ज़िम्मेदारी सरकार के हाथ में नहीं होनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि चुनाव के अंदर धन के महत्व को कम किए बिना भ्रष्टाचार कम नहीं होगा.

येचुरी ने कहा, "बिना कार्पोरेट्स को बिल में शामिल किए बिना भ्रष्टाचार कम नहीं होगा. राजनीति में कंपनियों की फंडिंग पर रोक लगनी चाहिए. कंपनियों और विदेशी धन पाने वाली ग़ैर-सरकारी संस्थाओं को लोकपाल में शामिल किया जाना चाहिए."

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