भाजपा विरोध का कारण चुनाव: सिंघवी

  • 29 दिसंबर 2011
अभिषेक मनु सिंघवी इमेज कॉपीरइट PIB
Image caption कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी का कहना है कि भाजपा नहीं चाहती कि विधेयक पारित हो, इसलिए बहानेबाज़ी कर रही है

राज्यसभा में लोकपाल विधेयक पर सरकार का पक्ष रखते हुए कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने भाजपा के विरोध का कारण आने वाला चुनाव बताया है.

सिंघवी ने कहा कि विधेयक में आरक्षण का कोई ज़िक्र नहीं है, लेकिन इसमें देश में रहने वाले अलग-अलग तरह के लोगों को जगह देने की कोशिश की गई है.

राज्यसभा में भाषण के दौरान सिंघवी और अरुण जेटली के बीच कई बार बहस हुई.

कांग्रेस नेता जेटली के लगाए गए आरोपों का जवाब दे रहे थे.

सिंघवी ने जेटली को याद दिलाया कि लोकसभा में सुषमा स्वराज ने कहा था कि विधेयक को स्टैंडिंग कमेटी के पास भेज दिया जाए.

उन्होंने कहा कि भाजपा नहीं चाहती कि विधेयक पारित हो, इसलिए बहानेबाज़ी कर रही है.

पढ़ें: लोकपाल पर संसद में बहस लाइव

आरक्षण पर भाजपा की आलोचना पर सिंघवी ने कहा, “इस विधेयक में आरक्षण है ही नहीं. आप अपने शब्दों को हमारे मुँह में रख रहे हैं और फिर जीत की घोषणा कर रहे हैं. विधेयक में राष्ट्र की विविधता को देखते हुए लोगों को स्थान देने की बात की गई है.”

सिंघवी ने लोकपाल को बहुत ज़्यादा अधिकार दिए जाने का विरोध किया और कहा कि अगर ऐसा होता है तो ये इतना विशालकाय जानवर हो जाएगा कि उसके सामने प्रधानमंत्री का दफ़्तर भी छोटा लगेगा.

उन्होंने कहा, “आप कुछ चुनावों के कारण लोकतंत्र का नक्शा बदलना चाहते हैं. इन व्यवस्थाओं को सोच-समझकर बनाया गया है.”

संस्थाओं के साथ छेड़छाड़ नहीं

सिंघवी ने भाजपा से सवाल पूछा कि क्या लोकपाल को जन्म देने का मतलब है कि सीबीआई, सीवीसी जैसी दूसरी संस्थाओं को ख़त्म कर दिया जाए.

कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “हमें ऐसा लोकपाल चाहिए जो सीबीआई, सीवीसी से साथ मिलकर काम कर सके.”

अरुण जेटली के इस आरोप पर कि लोकपाल विधेयक देश के संघीय ढाँचे पर हमला है, सिंघवी ने कहा कि जेटली कांग्रेस के सहयोगी दलों के सांसदों को भड़काने के लिए नारद मुनि बनने की कोशिश कर रहे हैं.

उन्होंने संघीय ढाँचे पर किसी हमले से इनकार किया और राष्ट्रीय हित का हवाला दिया.

लोकपाल के चयन पैनल में ज़्यादा सरकारी सदस्यों के शामिल होने पर मनु सिंघवी ने पूछा कि कौन से ऐसे सरकारी संस्थान हैं जहाँ पर सरकारी नामांकित सदस्यों की संख्या ज़्यादा नहीं होती.

उन्होंने कहा कि देश में चुनाव आयोग, सीएजी जैसी संस्थाएँ पूरी स्वतंत्रता से काम करती हैं.

कांग्रेस नेता ने माना कि पूर्व में ऐसे मामले हुए हैं जहाँ सीबीआई की स्वतंत्रता के साथ छेड़छाड़ हुई है, लेकिन उन्होंने सवाल रखा कि क्या भाजपा संस्थाओं को अपनी मनगढ़ंत सोच के आधार पर बर्बाद करना चाहती है.

उन्होंने इस आरोप से इनकार किया कि विधेयक के अंतर्गत निजी ट्रस्ट लोकपाल के दायरे में आएँगे और भ्रष्टाचारियों को मुफ़्त कानूनी सहायता मिलेगी.

सिंघवी ने कहा, “स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक़ कानूनी सहायता का मतलब है वकील उस व्यक्ति की कानूनी मदद कर सकता है. इसका मतलब मुफ़्त कानूनी सहायता नहीं है.”

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