टीम अन्ना को सरकार की नीयत पर शक़

शांति भूषण
Image caption पूर्व क़ानून मंत्री शांति भूषण ने राज्य सभा की कार्यवाही को द्रौपदी के चीरहरण के समान बताया है.

लोकपाल का मसौदा तैयार करने वाली संयुक्त समिति के सदस्य और पूर्व केंद्रीय क़ानून मंत्री शांति भूषण ने सरकार के इस तर्क को निराधार बताया है कि राज्य सभा का सत्र गुरूवार आधी रात के बाद जारी नहीं रखा जा सकता था और इसलिए लोकपाल विधेयक पर मतदान नहीं कराया जा सका.

शांति भूषण भ्रष्टाचार के विरूद्ध मुहिम चला रहे अन्ना हज़ारे की टीम के अहम सदस्य हैं.

शांति भूषण का कहना था कि राष्ट्रपति के सदन के सत्र बुलाए जाने के बाद केंद्रीय मंत्रीमंडल उसे समाप्त करने के लिए उनके पास सिफ़ारिश भेजता है.

पूर्व क़ानून मंत्री ने कहा कि उस सिफ़ारिश को भेजने के लिए शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक हो रही है, जिसके बाद इसे राष्ट्रपति की मंज़ूरी के लिए भेजा जाएगा.

उन्होंने कहा कि सरकार को विपक्षी दलों की मांग को मानकर सदन का सत्र जारी रखना चाहिए था ताकि लोकपाल विधेयक पास हो जाता और कम से कम एक मज़बूत लोकपाल क़ानून देश में बन जाता.

चीरहरण

उन्होंने कहा कि विपक्ष के बीच दो संशोधनों- केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को सरकार के चंगुल से निकालने और लोकपाल की चयन समिति में सुधार, को लेकर सहमति थी, इसलिए इसे मानकर लोकायुक्त का मामला फ़िलहाल छोड़कर विधेयक को पास करवा लिया जाना चाहिए था.

राज्य सभा में गुरूवार को पैदा हुई स्थिति पर कटाक्ष करते हुए शांति भूषण ने कहा कि ऐसा लग रहा था कि द्रौपदी का चीरहरण हो रहा था और धृतराष्ट्र और कौरव वहां बैठकर तमाशा देख रहे थे.

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री वहां बैठे थे.

उनके पुत्र और संयुक्त समिति के दूसरे सदस्य प्रशांत भूषण ने कहा कि पूरे मामले पर नज़र रखने वालों को ये बात समझ में आ गई है कि सरकार के मन में न सिर्फ आम जनता बल्कि संसद को लेकर भी तिरस्कार है.

तिरस्कार

प्रशांत भूषण ने पहले कहा था कि सरकार बार-बार ये बात दोहराती रही है कि क़ानून बनाने का अधिकार सिर्फ़ संसद को है और सड़क पर बैठे लोग उसके लिए दबाव नहीं बना सकते हैं.

उन्होंने कहा कि ये आंदोलन अब सिर्फ़ भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए नहीं बल्कि देश को बचाने को लेकर आगे बढ़ेगा.

शांति भूषण और प्रशांत भूषण ने ये बयान दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेस के दौरान कही.

इस प्रेस कांफ्रेंस की शुरूआत अरविदं केजरीवाल के बयान से हुई थी जिसमें उन्होंने कहा कि राज्य सभा में जो पूरी कार्यवाही हुई उसकी स्क्रिप्ट कहीं और तैयार हुई थी.

टीम अन्ना की एक अन्य सदस्य किरण बेदी का कहना था कि ये कहना ग़लत होगा कि उनका आंदोलन किसी भी विशेष राजनीतिक दल के साथ है.

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