अन्ना समर्थकों ने दिखाए पीएम को काले झंडे

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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को नववर्ष के पहले ही दिन लोगों के गुस्से का सामना करना पडा.

मनमोहन सिंह रविवार सुबह मत्था टेकने के लिए अमृतसर के स्वर्णमंदिर गए थे.

वहाँ पर प्रधानमंत्री से नाराज़ अन्ना समर्थकों ने उन्हें काले झंडे दिखाए और अन्ना हजारे जिंदाबाद के नारे लगाए.

प्रदर्शनकारी लोकपाल के मामले पर सरकार के रवैये से नाराज थे.

गौरतलब है कि लोकपाल बिल लोक सभा में पारित होने के बाद राज्यसभा में पारित नहीं हो पाया था.

अमृतसर के पुलिस आयुक्त आरपी मित्तल ने बीबीसी से कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और प्रदर्शनकारी अन्ना के समर्थन में नारे लगा रहे थे.

उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के किसी तरह की बाधा नहीं पड़ी. प्रधानमंत्री एक तरफ थे और वो लोग दूसरी ओर नारेबाज़ी कर रहे थे.''

पंजाब में 30 जनवरी को विधानसभा चुनाव होने हैं और टीम अन्ना पहले ही साफ कर चुकी है कि वह पाँच राज्यों में होने वाले चुनावों में लोकपाल का मुद्दा उठाएगी और प्रचार करेगी.

उधर भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ मुहिम चला रहे अन्ना हज़ारे को पुणे के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया है.

उनके सहयोगी मनीष सिसोदिया ने बीबीसी को बताया कि उनकी छाती में जकड़न है और उन्हें कुछ दिन अस्पताल में रहना पड़ सकता है.

उन्होंने कहा, ''अन्ना की तबीयत खराब होने की वजह से दो जनवरी को रालेगण सिधी में होने वाली बैठक को भी स्थगित कर दिया गया है.''

उन्होंने कहा कि इस बैठक में टीम अन्ना की इस महीने के अंत में शुरू होने वाले पाँच राज्यों में होने वाले विधान सभा चुनावों को लेकर आगे की रणनीति तय की जानी थी.

अन्ना को पिछले कुछ दिनों से बहुत अधिक सर्दी और सीने में जकड़न की शिकायत थी और चिकित्सकों ने उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी थी.

'कुछ दिन और अस्पताल में'

शनिवार की रात उन्हें रालेगण सिद्धि से पुणे लाया गया जहां वो संचेती अस्पताल में भर्ती हैं.

डॉ केएच संकेती ने बताया कि उन्हें दो या तीन दिन अस्पताल में बिताने पड़ सकते हैं.

उन्होंने कहा, ''उनकी खांसी काबू में नहीं आ रही थी. उनकी खांसी में काफी जकड़न थी. इसलिए उन्हें भर्ती किया गया है. उनका इसीजी और खून का टेस्ट कर लिए गए हैं.''

पिछले सप्ताह तबीयत खराब होने की वजह से मजबूत लोकपाल की मांग करने वाले समाजसेवी अन्ना मुंबई में तीन दिन का अनशन पूरा नहीं कर पाए थे और उन्होंने बीच में ही अनशन तोड़ दिया था.

हालांकि ऐसे भी सवाल उठे थे कि क्या ये फ़ैसला दिल्ली और मुंबई में कम भीड़ जुटने के कारण लिया गया था.

लेकिन अन्ना हज़ारे के सहयोगी अरिवंद केजरीवाल ने आंदोलन की सफलता पर उठ रहे सवालों को ख़ारिज कर दिया था.

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