जगन रेड्डी के क़रीबी विजयसाई रेड्डी गिरफ़्तार

जगनमोहन रेड्डी(फ़ाइल फ़ोट) इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption विजयसाई रेड्डी की गिरफ़्तारी से जगनमोहन रेड्डी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

आय से अधिक संपति रखने का आरोप झेल रहे वाईएसआर कांग्रेस के प्रमुख और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएसआर रेड्डी के पुत्र जगनमोहन रेड्डी के बेहद क़रीबी साथी विजयसाई रेड्डी को सीबीआई ने गिरफ़्तार कर लिया है.

सीबीआई ने सोमवार शाम को उन्हें गिरफ़्तार किया. वैसे सीबीआई विजयसाई रेड्डी से सोमवार सुबह से ही पूछताछ कर रही थी लेकिन देर शाम में सीबीआई ने उन्हें आधिकारिक तौर पर गिरफ़्तार करने का फ़ैसला किया.

सीबीआई ने उनके घर और तेलुगु अख़बार साक्षी के दफ़्तर की भी तलाशी ली और उनकी छानबीन अभी भी जारी है.

विजयसाई रेड्डी को मंगलवार को अदालत में पेश किया जाएगा.

विजयसाई रेड्डी पिछले 30 वर्षों से वाईएसआर रेड्डी परिवार से जुड़े हुए हैं और उस परिवार के सभी कारोबार की वो देख-रेख करते हैं.

फ़िलहाल वो जगनमोहन रेड्डी की मीडिया कंपनी 'जगती पब्लिकेशन' के वाइस चेयरमैन हैं. तेलुगु अख़बार साक्षी इसी कंपनी के तहत छपता है.

याचिका

लगभग छह महीने पहले एक कांग्रेसी नेता पी शंकर राव और तेलुगु देशम पार्टी के तीन नेताओं ने हाई कोर्ट में पीआईएल दायर की थी और अदालत से गुहार लगाई थी कि जगनमोहन रेड्डी परिवार की संपत्ति की जांच के आदेश दिए जाए.

अदालत के आदेश के बाद सीबीआई ने इसकी जांच शुरू की थी.

सीबीआई ने अपनी शुरूआती जांच में अदालत को बताया कि प्रथम दृ्ष्टि में जगनमोहन रेड्डी के ख़िलाफ़ मामला बनता है फिर अदालत ने सीबीआई को मामला दर्ज करने के आदेश दिए थे.

सीबीआई ने इस मामले में कुल 72 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है. उनमें जगनमोहन रेड्डी पहले नंबर पर हैं जबकि विजयसाई रेड्डी दूसरे नंबर के अभियुक्त हैं.

जगनमोहन रेड्डी पर आरोप हैं कि उनकी कंपनी की संपति में पिछले कुछ वर्षों में जो बढ़ोत्तरी हुई है वो ग़लत तरीके़ से हुई है.

फ़िलहाल जगनमोहन रेड्डी की कंपनी का मूल्य लगभग 450 करोड़ रूपए हैं.

उन पर आरोप है कि उनकी कंपनी में जिन कंपनियों ने निवेश किया था वो एक तरह से रिश्वत थी क्योंकि जगनमोहन रेड्डी के पिता और उस समय आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएसआर रेड्डी ने ऐसी नीतियां बनाई थीं जिनसे उन कंपनियों को फ़ायदा पहुंचा था.

विजयरेड्डी ने कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट का भी ये कहते हुए दरवाज़ा खटखटाया था कि सीबीआई उनके ख़िलाफ़ पक्षपात कर रही है. सुप्रीम कोर्ट ने फ़िलहाल इस पर कोई आदेश नहीं दिया है.

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