मायावती सरकार के दो मंत्री भाजपा में

  • 3 जनवरी 2012
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Image caption मायावती ने पिछले कुछ दिनों में कई मंत्रियों को भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद बर्ख़ास्त किया है

उत्तर प्रदेश में चुनावी दौर की सबसे चौंकाने वाली ख़बर के तहत भारतीय जनता पार्टी ने मायावती सरकार से भ्रष्टाचार के आरोप में निकाले गए दो पूर्व मंत्रियों बाबू सिंह कुशवाहा और बादशाह सिंह को दल में शामिल कर लिया है. चर्चा है कि बसपा से निकाले गए कई और पूर्व मंत्री तथा विधायक बीजेपी में शामिल हो सकते हैं.

कुशवाहा राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में घोटालों और बहुचर्चित सीएमओ हत्याकांड के चलते परिवार कल्याण मंत्री पद से हटाए गए थे. सीबीआई दिल्ली में उनसे लगातार पूछताछ कर रही है.

बादशाह सिंह को लोकायुक्त की सिफ़ारिश पर श्रम मंत्री के पद से हटाया गया था. उन पर भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के आरोप सिद्ध पाए गए थे.

उत्तर प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही ने दिल्ली में एक छोटे समारोह में बाबू सिंह कुशवाहा और बादशाह सिंह को पार्टी की सदस्यता दिलाई.

बीजेपी के वरिष्ठ नेता विनय कटियार ने कहा कि बाबू सिंह कुशवाहा पर कोई मुक़दमा नही है. उनका दोष नहीं है. उन्हें बेवजह बसपा से निकाला गया और अब हमने उन्हें पार्टी में शामिल किया है.

'प्रभावी नेता'

कटियार ने कहा कि बादशाह सिंह भी एक प्रभावी नेता हैं. इन नेताओं की मदद से पार्टी को यूपी चुनाव जीतने में मदद मिलेगी.

कुशवाहा बांदा ज़िले के रहने वाले हैं. एक स्थानीय पत्रकार का कहना है कि कुशवाहा माया सरकार में एक प्रभावशाली मंत्री थे और उन्होंने इसका फ़ायदा उठाकर पूरे प्रदेश में अपनी कुशवाहा बिरादरी के लोगों को सरकारी नौकरियों में रखवाया था. इसलिए उनके पाला बदल से कुशवाहा समाज के बहुत से लोग बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हो सकते हैं.

इससे पहले बीजेपी ने माया मंत्रिमंडल से निकाले गए अवधेश कुमार वर्मा और दद्दन मिश्र को पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया. चर्चा है कि बीएसपी से निकाले गए कई और नेता भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं.

अभी चंद रोज़ पहले तक बीजेपी नेता लगातार कुशवाहा के ख़िलाफ़ बयान देते थे. राष्ट्रीय सचिव किरीट सोमैया ने आरोप लगाया था कि कुशवाहा ने मायावती के साथ मिलकर ढेर सारी कंपनियाँ बनाईं, जिनके ज़रिए रिश्वत का का काला धन सफ़ेद किया गया.

बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुख़्तार अब्बास नक़वी ने लखनऊ में पत्रकारों के सवाल के जवाब में कहा कि बीजेपी गंगा नदी जैसी है जिसमें तमाम नाले आकर गिरते हैं, मगर उससे गंगा पर कोई फ़र्क नही पड़ता.

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता वीरेंद्र मदान ने एक बयान में कहा है कि बसपा से भ्रष्टाचार के आरोप में निकाले गए लोगों को पार्टी में शामिल करने से भ्रष्टाचार के विरुद्ध कोरी आवाज़ उठाने वाली भारतीय जनता पार्टी का दोमुँहा चरित्र उजागर हुआ है.

मदान ने कहा कि जिन-जिन लोगों को बसपा नकारती है उसे भाजपा हाथों-हाथ ले रही है, इससे तो यही लगता है कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर मिलकर सरकार बनाने का तानाबाना बुन रही है.

सपा का डी पी यादव को इनकार

उधर समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित बाहुबलि विधायक डीपी यादव को दल में शामिल करने से मना कर दिया.

डीपी यादव तीन दिन पहले रामपुर में सपा के प्रभावशाली नेता आज़म ख़ान द्वारा आयोजित कार्यकर्ता बैठक में शामिल हुए और वहाँ उन्होंने अपने भाषण में सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह की तारीफ़ की थी.

चर्चा है कि डीपी यादव चुनाव में सपा से टिकट भी चाहते थे.

यादव ने कहा था कि वह जल्दी ही समाजवादी पार्टी में शामिल होंगे. मगर जब यह ख़बरें अखबारों में छपीं तो समाजवादी पार्टी के अंदर विरोध हुआ. पार्टी नेताओं ने महसूस किया कि डीपी यादव के सपा में आने से पार्टी की बदनामी होगी और पूरे चुनाव में सफ़ाई देनी पड़ेगी.

प्रदेश सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को दो टूक कह दिया कि डीपी यादव को दल में शामिल नहीं किया जाएगा.

लेकिन सपा ने पूर्व विधान सभाध्यक्ष और उनके विधायक बेटे महेश वर्मा को दल में वापस ले लिया. ये दोनों पिछले विधान सभा में बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए थे. धनी राम वर्मा इटावा, औरैया और फ़र्रुखाबाद इलाक़े में लोधी बिरादरी के एक प्रभावशाली नेता हैं और उनके जाने से सपा का काफ़ी नुक़सान और बसपा का फ़ायदा हुआ था.

चर्चाएं हैं कि नामांकन से पहले अभी कई और नेता पाला बदल कर सकते हैं.

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