ऐंबुलेंस से जेल भेजे गए पूर्व संचार मंत्री सुखराम

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Image caption सुख राम अस्पताल की एक ऐबुलेंस में पटियाला हाउस कोर्ट में पेश हुए. (फ़ाईल फ़ोटो)

दिल्ली की एक अदालत ने पूर्व केंद्रीय संचार मंत्री सुखराम को पहले दी गई तीन साल की सज़ा काटने के लिए एंबुलेंस में जेल भेजे जाने का आदेश दिया है. सुखराम के वक़ील ने शुक्रवार को कहा था कि पूर्व संचार मंत्री सुख राम कोमा में है.

अदालत ने शनिवार सुबह कहा कि साल 1996 के टेलिकॉम घोटाले में दोषी पाए गए पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुख राम अगर आज आत्मसमर्पण नहीं करते है तो फ़िर उनके खिलाफ़ ग़ैरज़मानती वारंट जारी किया जाएगा. सुखराम स्वास्थ्य कारणों के चलते ज़मानत पर थे.

अदालत के इसी आदेश का अनुसरण करते हुए सुखराम अस्पताल की एक ऐबुलेंस में पटियाला हाउस कोर्ट में पेश हुए थे.

विशेष सीबीआई अदालत के जज संजीव जैन ने कहा, “मुझे सुख राम के खिलाफ़ ग़ैर ज़मानती वारंट जारी करना पड़ेगा. मै हाई कोर्ट के आदेश से बाध्य हूँ और मुझे उसका पालन करना होगा.”

'उपकरणों की खरीद में धांधली'

अपनी पिछली दलील पलटते हुए 86 वर्षीय सुखराम के वक़ील अनिल नाग ने कहा कि पूर्व मंत्री कोमा में नहीं है और अदालत में शनिवार को आत्मसमर्पण करेंगे.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार नाग ने अदालत से कहा कि सुखराम कोमा में नहीं है लेकिन उनींदापन में है.

सुख राम के वक़ील ने अदालत में पहले कहा था कि मेडिकल जांच के बाद पूर्व मंत्री को अस्पताल में भर्ती किया गया है. बाद में कहा गया कि वो कोमा में है और अस्पताल से नही निकल सकते.

दूरसंचार उपकरणों की ख़रीद में धांधली के मामले में पिछले साल 21 दिसंबर को हाई कोर्ट ने निचली अदालत के साल 2002 के फ़ैसले को सही ठहराया था.

इस मामले में सुखराम, एक पूर्व नौकरशाह और हैदराबाद के एक व्यापारी पी रामा राव को दोषी क़रार दिया था.

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