भारत के लिए शर्मनाक है कुपोषण: मनमोहन

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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कुपोषण की समस्या को देश के लिए शर्मनाक क़रार देते हुए कहा है इससे निपटने के लिए सरकार केवल बाल विकास योजनाओं के भरोसे नहीं रह सकती.

राजधानी में भूख और कुपोषण संबंधी एक रिपोर्ट जारी करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ''कुपोषण की समस्या पूरे देश के लिए शर्म की बात है. सकल घरेलू उत्पाद में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी के बावजूद देश में कुपोषण का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है.''

कुपोषण की समस्या को ख़त्म करने में सरकारों की नाकामी की ओर इशारा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भले ही समेकित बाल विकास योजना (आईसीडीएस) कुपोषण से लड़ने के लिए सरकार के पास मौजूद सबसे कारगर हथियार है लेकिन अब केवल इस योजना के सहारे नहीं रहा जा सकता.

मनमोहन सिंह ने कहा कि हमें उन राज्यों पर खासतौर से ध्यान केंद्रित करना होगा जहां कुपोषण सबसे ज़्यादा है और इस समस्या को बढ़ावा देने वाली परिस्थितियां मौजूद हैं.

उन्होंने कहा कि नीति निर्माताओं और योजनाओं को लागू करने वालों को स्पष्ट रुप से यह समझना होगा कि इस समस्या का सीधा संबंध शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पीने के पानी की समस्या और पोषण से है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि नई नीतियां इसी आधार पर बनानी होंगी.

'देशव्यापी जागरुकता'

भूख और कुपोषण को लेकर नंदी फ़ाउंडेशन और 'सिटिज़ंज़ अलाएंज़ अगेंस्ट मैलन्यूट्रिशन' नामक संगठन की ओर से जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक़ कुपोषण की वजह से भारत में आज भी 42 फ़ीसदी से ज़्यादा बच्चे सामान्य से कम वज़न के हैं.

मनमोहन सिंह ने कहा कि इस रिपोर्ट में यह सामने आया है कि कुपोषण बढ़ा है लेकिन पिछले सात साल में 100 ज़िलों के सर्वे में यह भी स्पष्ट हुआ है कि हर पांच में से एक बच्चा ही अपनी उम्र के लिहाज़ से स्वस्थ और ज़रूरी वज़न की सीमा पार कर पाया है.

सिटिज़ंज़ अलाएंज़ अगेंस्ट मैलन्यूट्रिशन के सदस्य और उड़ीसा से सांसद जय पांडा के मुताबिक भारत में यह समस्या कितनी गंभीर है यह इस बात से साबित होता है कि भारत के आठ राज्यों में जितना कुपोषण है उतना अफ्रीका और सहारा उपमहाद्वीप के ग़रीब से ग़रीब देशों में भी नहीं.

प्रधानमंत्री ने कहा कि ये ज़रूरी है कि स्कूली शिक्षकों को भी पोषण संबंधी जानकारियां हों और इस समस्या को लेकर खासतौर पर बढ़ती उम्र की बालिकाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाए.

उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी सेविकाओं को भी बच्चों के विकास के ज़रिए देश के विकास में अपनी भूमिका को समझना होगा.

प्रधानमंत्री का कहना है कि उनकी सरकार आईसीडीएस को नए ढांचे के तहत, नई ताकत के साथ कुपोषण के शिकार देश के 200 ज़िलों पर केंद्रित करेगी. सरकार का मक़सद कुपोषण के खिलाफ़ देशव्यापी जागरुकता छेड़ना है.

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