'दिल्ली में 70 प्रतिशत दूध मिलावटी'

दूथ की बोतल इमेज कॉपीरइट press association
Image caption मिलावटी दूध बच्चों के लिए बहुत ही हानिकारक है.

भारत के स्वास्थ्य एंव परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली एक संस्था के ज़रिए किए गए सर्वे के मुताबिक़ दिल्ली में मिल रहे दूध में 70 फ़ीसदी मिलावटी हैं.

भारतीय खाद्य संरक्षक एंव मानक प्राधिकरण ने दिल्ली से दूध के कुल 71 नमूने इकट्ठा किए थे और उनकी जांच के बाद पता चला कि उनमें से 50 नमूनों में ग्लुकोज़ और स्किम्ड मिल्क पाउडर मानकों के अनुरुप नहीं थे.

इसी तरह इस संस्था ने देश के 28 राज्यों और पांच केंद्र प्रशासित प्रदेशों में मिल रहे खुले हुए और पैकेट वाले दूध के नमूनों को इकट्ठा कर उनकी जांच की.

टेस्ट के लिए हालाकि पैकेट वाले दूध के नमूने भी लिए गए थे लेकिन ये साफ़ नहीं है कि इन सैपलों में मदर डेयरी या अमूल जैसे लोकप्रिय ब्रांड के दूध भी शामिल थे या नहीं.

जांच के बाद काफ़ी चौंकाने वाले नतीजे सामने आए. देश भर से जमा किए गए कुल 1791 नमूनों में से 1226 मिलावटी पाए गए.

यानी कहा जा सकता है कि इस समय पूरे देश भर में इस्तेमाल किए जा रहे दूध में से 68.4 प्रतिशत मिलावटी हैं.

सेंटर फॉर साइंस एंड इन्वारमेंट (सीएसई) के उपनिदेशक चंद्रभूषण कहते हैं कि दूध में मिलावट के मामले में ये भारत का अब तक का सबसे बड़ा सर्वे है.

मिलावट के बारे में पहले भी कई रिपोर्टें आते रही हैं लेकिन चंद्रभूषण का मानना है कि इस रिपोर्ट की सबसे ख़ास बात ये है कि इसे एक सरकारी संस्था ने किया है.

चंद्रभूषण कहते हैं, ''सामान्य तौर पर मिलावट या प्रदूषण को लेकर जो भी अध्ययन होते थे वे ग़ैर सरकारी संस्था करते थे. पहली बार भारतीय खाद्य संरक्षक एंव मानक प्राधिकरण नामक एक सरकारी संस्था ने ये टेस्ट किया है. यानी सरकार पहली बार ये मान रही है कि हम लोगों को जो दूध मिल रहा है वह मिलावटी है.''

रिपोर्ट के मुताबिक़ दूध में ग्लुकोज़ और स्किम्ड मिल्क पाउडर के अलावा चर्बी, यूरिया, हाइड्रोजन पेरोक्साइड, स्टार्च और साबुन तक पाए गए हैं.

इन नमूनों में सर्वाधिक चर्बी और एक ऐसा पदार्थ जो खाने योग्य नहीं हैं और जिसे तकनीकी भाषा में सॉलिड नॉट फुड(एसएनएफ़) कहते हैं के मिलावट पाए गए.

राज्यों की स्थिति

केवल गोवा और पुड्डुचेरी में दूध में कोई मिलावट नहीं पाया गया.

लेकिन इसके ठीक विपरीत पश्चिम बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा और मिज़ोराम में एक भी नमूने पूरी तरह सही नहीं नहीं पाए गए.

दूसरे राज्यों से जमा किए गए नमूने कुछ बेहतर थे लेकिन उनमें भी मिलावट की मात्रा बहुत है.

मिसाल के तौर पर गुजरात में 89 प्रतिशत, जम्मू-कश्मीर में 83 प्रतिशत, पंजाब में 81 प्रतिशत, राजस्थान में 76 प्रतिशत, दिल्ली में 70 प्रतिशत, हरियाणा में 70 प्रतिशत और महाराष्ट में 65 प्रतिशत नमूनों में मिलावट पाए गए.

सबसे कम मिलावट पाए जाने वालों में केरल (28 प्रतिशत), कर्नाटक(22), तमिलनाडु(12) और आंध्र प्रदेश(6.7) शामिल हैं.

शहरी और ग्रामीण इलाक़ों से जमा किए नमूनों में भी अलग-अलग स्तर पर मिलावट पाए गए.

ग्रामीण क्षेत्रों से इकट्ठा किए गए नमूनों में 31 प्रतिशत मिलावटी पाए गए तो शहरी इलाक़ों से जमा किए नमूनों में 68.9 प्रतिशत नमूनों में मिलावट पाए गए.

ज़हरीले रसायन

इस सर्वे ने एक बार फिर ये साबित कर दिया है कि भारत में मिल रहे खाद्ध पदार्थों में मिलावट बहुत ही साधारण सी बात हो गई है.

दूध जिसका सेवन ज्यादातर बच्चे करते हैं उनमें भी मिलावट की ख़बरें चौंकाने वाली हैं.

लेकिन इस रिपोर्ट के अनुसार उससे भी ज़्यादा चिंता का विषय है दूध में मिलावट के नाम पर इस्तेमाल की जाने वाली चिज़े जिनमें ज़हरीले रसायन तक मिलाए जा रहें हैं.

चंद्रभूषण के अनुसार यूरिया का इस्तेमाल जानवरों में मोटापा बढ़ाने के लिए किया जाता है जबकि साबुन में ना जाने कितनी तरह के रसायन होतें हैं.

चंद्रभूषण का कहना है, "सरकार ने तो अभी सिर्फ़ दूध का टेस्ट करवाया है उसे और भी दूसरे खाद्य पदार्थों की जांच करवानी चाहिए तब असल में पता चलेगा कि भारत में लोग कितनी मिलावटी चीज़ें खा रहें हैं."

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि इससे निपटने के लिए सरकार जल्दी ही कड़े क़दम उठाएं.

मिलावट के जुर्म में मिलने वाली सज़ा में इज़ाफ़ा के अलावा इस रिपोर्ट ने मिलावट को हत्या के प्रयास के बराबर अपराध क़रार देने का सुझाव दिया है.

संबंधित समाचार