मूर्तियों को ढँकने का काम पूरा:चुनाव आयोग

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Image caption चुनाव आयोग का तर्क है कि सभी पार्टियों को चुनाव के लिए समान ज़मीन तैयार करके दिए जाने के लिए ये क़दम ज़रूरी था

उत्तर प्रदेश के चुनाव आयोग के मुताबिक़ राज्य में मुख्यमंत्री मायावती और बहुजन समाज पार्टी के चुनाव चिन्ह हाथी को ढँकने का काम पूरा किया जा चुका है.

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी उमेश सिन्हा ने बीबीसी को बताया कि बुधवार शाम पांच बजे की समय सीमा से पहले ही ये कार्य पूरा कर लिया गया है और इस बारे में लिखित सूचना भी जारी की जाएगी.

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री मायावती और उनके चुनाव चिह्न हाथी की प्रतिमाओं को ढँकने के चुनाव आयोग के आदेश पर कई राजनीतिक पार्टियों ने ये कहते हुए आपत्ति जताई थी कि इससे मुश्क़िलें पैदा होंगी और यह फ़ैसला व्यावहारिक नहीं है.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी यानी सीपीआई के राष्ट्रीय सचिव डी राजा ने कहा, ''इस फ़ैसले से कई समस्याएं खड़ी हो जाएंगी. लागू करने की दृष्टि से यह अव्यावहारिक है.''

वहीं जनता दल यूनाइटेड के प्रमुख शरद यादव ने कहा था, ''मूर्तियों को ढँकने में कोई तुक नहीं है. ये मूर्तियां इस बात का ठोस सबूत हैं कि सार्वजनिक धन बर्बाद किया गया.''

हालांकि डी राजा की ही पार्टी के अतुल कुमार अनजान कहा था कि आयोग ने बिल्कुल सही फ़ैसला किया है.

एक तरफ जहां चुनाव आयोग का तर्क है कि सभी पार्टियों को चुनाव के लिए समान ज़मीन तैयार करके दिए जाने के लिए ये क़दम ज़रूरी था, वहीं बीएसपी यानी की बहुजन समाज पार्टी को मूर्तियों को चुनाव के दौरान खुला रखे जाने में कोई गलती नज़र नही आती.

याचिका ख़ारिज

मूर्तिया ढकें जाने के विरोध में इलाहाबाद हाई कोर्ट में दाखिल की गई एक जनहित याचिका को अदालत ने तकनिकी खामियों के चलते खारिज कर दिया.

अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा की वो चाहे तो याचिका दुबारा नये सिरे से फाइल कर अपनी बात कोर्ट के सामने रख सकते है.

याचिकाकर्ता धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने कोर्ट से अपील की थी चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के चुनाव चिन्ह हाथी को ढंकने का जो आदेश दिया था वो बेतुका है और हाथी हिन्दुओं के आराध्य गणेश का रूप होने के चलते आस्था से जुड़ा है.

उनका कहना है कि संविधान की धारा 25 के तहत मिली धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन होता है लिहाजा आयोग के आदेश पर रोक लगायी जाए.

इस मामले में सुनवाई के दौरान बसपा की तरफ से भी अर्जी दाखिल की गई जिसमे कहा गया कि याचिका का बसपा से कोई ताल्लुक नही है.

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