पिछले साल पोलियो-फ्री रहा भारत

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Image caption स्वास्थय मंत्रालय के मुताबिक़ पोलियो उन्मूलन मुहिम पर भारत अब तक 12,000 करोड़ रुपए खर्च कर चुका है.

भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक पिछले एक साल में भारत में पोलियो का कोई भी नया मामला दर्ज नहीं किया गया है, हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि भारत को अभी पोलियो-ग्रस्त देशों की सूची से नहीं हटाया जा सकता.

पिछले साल 13 जनवरी, 2011 के दिन पश्चिम बंगाल में एक दो साल की बच्ची को पोलियो से ग्रस्त पाया गया था.

स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आज़ाद ने कहा, “हम बेहद उत्साहित और आशान्वित हैं, लेकिन इसके साथ ही हमें सतर्क भी रहना होगा.”

उनका कहना था कि पोलियो उन्मूलन की मुहिम की ये एक अहम कड़ी है क्योंकि 2009 में भारत में पोलियो के 741 मामले दर्ज थे, जो कि वैश्विक मामलों का लगभग 50 प्रतिशत था.

उन्होंने कहा, “ये पिछले दो सालों में पोलियो पर लगाम कसने के भारत की लगातार कोशिशों का नतीजा है. भारत ने विश्व के सामने राजनीतिक प्रतिबद्धता का एक उदाहरण रखा है जो कि हमारी लगातार कोशिशों में झलकता है. विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के सहयोग से हमने भारत के हर कोने में हर बच्चे तक पहुंचने और उसे पोलियो से सुरक्षित करने की लगातार कोशिशें जारी रखी हैं.”

हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि भारत को पोलियो-ग्रस्त देशों की सूची से हटाने के लिए पिछले साल लिए गए सभी सैंपलों का नेगेटिव टेस्ट होना ज़रूरी है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के राष्ट्रीय पोलियो निगरानी परियोजना के मैनेजर हमिद जाफ़री ने कहा, “पिछले साढ़े ग्यारह महीनों में पोलियो का कोई भी मामला नहीं देखा गया है. बाकी 15 दिनों के सैंपल की जांच अभी जारी है. अगर सभी सैंपल नेगेटिव पाए जाते हैं, तो विश्व स्वास्थ्य संगठन भारत को उस सूची से हटा देगा, जिसमें विश्व के सबसे ज़्यादा पोलियो ग्रसित देशों को रखा गया है. मैं ये नहीं कहूंगा कि इस बात पर अभी जश्न मनाया जा सकता है, लेकिन हां, ये अपने आप में ही एक बड़ी उपलब्धि है.”

सरकार की सराहना

ग्रसित लोगों को पूरी तरह से अपाहिज कर देने वाले इस रोग से निपटने के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों और गैर सरकारी संगठनों ने पिछले कई दशकों से बड़े पैमाने पर टीकाकरण कार्यक्रम चला रखा है.

पोलियो उन्मूलन मुहिम में विश्व स्वास्थ्य संगठन की राष्ट्रीय पोलियो निगरानी परियोजना (एनपीएसपी), रोटरी इंटरनेशनल, यूनीसेफ, बिल ऐंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और 'यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ऐंड प्रिवेंशन' ने सरकार का साथ दिया.

माइक्रोसोफ़्ट के संस्थापक बिल गेट्स ने भारत को बधाई देते हुए कहा है कि ये एक महत्तवपूर्ण पड़ाव है और दूसरे देशों को भारत से प्रेरणा लेनी चाहिए.

एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उन्होंने कहा, “पोलियो से लड़ने के लिए भारत ने वास्तविक क़दम उठाए. भारत सरकार ने जहां वित्तीय सहयोग दिया, वहीं पिछले दो सालों में 20 लाख कर्मचारियों ने स्कूलों, अस्पतालों और सामुदायिक केंद्रों में आठ लाख टीकाकरण सेंटर लगाए. चीन और रूस जैसे देशों में भी पोलियो से लड़ने के लिए लगातार वित्तीय मदद की ज़रुरत है.”

ख़तरा बरकरार

राष्ट्रीय पोलियो टीकाकरण की हर मुहिम में करीब 24 लाख टीकाकारों और 1.5 लाख पर्यवेक्षकों ने 20 करोड़ घरों में जा कर करीब 1 करोड़ 72 लाख पांच साल तक के बच्चों को पोलियो की बूंदें पिलाईं.

इसके अलावा बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और बाज़ारों में भी बच्चों को पोलियो का टीका देने के लिए सैंकड़ों कर्मचारियों को तैनात किया गया.

भारत दुनिया के उन चार देशों में से एक है जहां अभी भी पोलियो के मामले पाए जाते हैं. ये वायरस अफग़ानिस्तान, पाकिस्तान और नाइजीरिया में भी पाया जाता है.

स्वास्थय मंत्रालय के मुताबिक़ पोलियो उन्मूलन मुहिम पर भारत अब तक 12,000 करोड़ रुपए खर्च कर चुका है.

भारत ने 2010 में ‘बाइवेलेंट पोलियो वैक्सीन’ का निर्माण करने में आगे कदम रखा था. इस टीके की ख़ासियत ये थी कि इससे पोलियो का ‘टाइप 1’ और ‘टाइप 3’ वाइरस से लड़ने में बड़ी सफ़लता हासिल हुई थी.

स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि हालांकि भारत ने पोलियो उन्मूलन में बड़ी सफ़लता तो हासिल की है, लेकिन पोलियो का ख़तरा अब भी बना हुआ है.

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