मायावती ने जन्मदिन पर जारी की उम्मीदवारों की सूची

मायावती (फ़ाईल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट PTI
Image caption भ्रष्टाचार के आरोप से घिरी मायावती सरकार ने चुनाव से ठीक पहले कई मंत्रियों के ना केवल टिकट काटे बल्कि उन्हें पार्टी से भी निकाल दिया.

लखनऊ में अपने जन्मदिन के मौक़े पर उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने समर्थकों से उत्तर प्रदेश चुनाव में जीत का तोहफ़ा मांगा है.

रविवार को अपने 56वें जन्मदिन के मौक़े पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपनी आत्मकथा का विमोचन भी किया.

इसके अलावा संवाददाता सम्मेलन में मायावती ने पार्टी के 403 प्रत्याशियों की सूची भी जारी की.

सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी ने इस बार के विधान सभा चुनाव में लगभग सौ यानि एक चौथाई उम्मीदवार बदल दिए हैं, जिसके लिए बड़ी तादाद में मंत्रियों और विधायकों के टिकट काटे गए.

पत्रकारों को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा कि इस चुनाव में उनकी पार्टी ने सिर्फ़ साफ़ छवि वाले प्रत्याशियों को ही टिकट दिया है.

लेकिन इस फेरबदल में सरकार के वरिष्ठ मंत्री एवं बी एस पी के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य लाभान्वित हुए हैं. मुख्यमंत्री एवं बी एस पी अध्यक्ष मायावती ने स्वामी प्रसाद मौर्या के साथ साथ उनके बेटे उत्कृष्ट मौर्या एवं बेटी संघमित्रा मौर्या को भी उम्मीदवार बनाया है.

नए चेहरों में लोक निर्माण विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता टी राम शामिल हैं, जिन्हें मायावती के बहुचर्चित प्रिय स्मारकों के निर्माण के लिए जाना जाता है.

'ग़लत लोगों के टिकट काटे गए'

अपने जन्मदिन पर प्रेस कांफ्रेंस में टिकटों के फेरबदल की जानकारी देते हुए मायावती ने कहा, “पिछले विधान सभा आम चुनाव में हमारी पार्टी के भोले भाले लोगों को झांसे में रखकर काफ़ी ग़लत लोग दूसरी पार्टियों को छोड़कर हमारी पार्टी से टिकट लेने में कामयाब हो गए थे.”

मायावती ने माना कि इन लोगों ने चुनाव जीतने के बाद, “अपने क्षेत्र के विकास व जनता के हितों की तरफ़ ध्यान न देकर बल्कि इसके स्थान पर इन्होंने अपने व्यक्तिगत स्वार्थ में ग़लत कार्यों में लिप्त होकर हमारी पार्टी व सरकार की छवि को धूमिल करने का हर संभव प्रयास किया है.”

इतने बड़े पैमाने पर टिकट काटने का औचित्य बताते हुए मायावती ने आगे कहा, “इस क़िस्म के ग़लत लोगों ने हमारी पार्टी के पुराने कैडर को भी अपनी ग़लत संगत में लेकर उन्हें भी काफ़ी हद तक अपने जैसा ही बना दिया है, जिसके कारण हमारी पार्टी व सरकार को इस क़िस्म के सभी विधायकों एवं मंत्रियों के ख़िलाफ़ काफ़ी सख़्त कार्यवाई करनी पडी है.”

मायावती ने कहा कि इन सभी कारणों की वजह से इस विधान सभा आम चुनाव में ऐसे सभी विधायकों व मंत्रियों के टिकट काट दिए हैं.

शायद पांच साल में यह पहली बार है जब मायावती ने सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया है कि उनकी सरकार और पार्टी के लोगों ने सरकार के रहते हुए कितने ग़लत काम किए हैं जिससे वे जनता में अलोकप्रिय हो गए है.

इस नुक़सान की भरपाई के लिए ही अब मायावती बड़ी तादाद में नए चेहरे लेकर जनता के सामने जा रही हैं.

मायावती ने अपने समर्थकों से अपील की है कि वे दोबारा उन्हें बहुमत से सरकार में लाने के लिए पूरी मेहनत करें.

उनका कहना था, “यही सही मायने में पार्टी हित में उनका क़ीमती तोहफ़ा होगा.”

चुनाव आयोग पर हमला

चुनाव आयोग की सख़्ती के चलते इस मौक़े पर न तो सरकारी अधिकारी बुलाए गए थे और न ही बड़े पैमाने पर पार्टी कार्यकर्ता जो पहले मायावती के जन्मदिन पर कथित तौर पर चन्दा उगाही करके उन्हें करोड़ों रुपयों के उपहार देते थे.

मायावती, पार्टी के महासचिव सतीश मिश्र के साथ कार से आईं और वरिष्ठ मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी, स्वामी प्रसाद मौर्या एवं पार्टी के कर्मचारियों ने फूलों के गुलदस्ते देकर उनका स्वागत किया.

पिछले विधानसभा चुनाव में सामाजिक इंजीनियरिंग के सहारे सत्ता हासिल करने वाली मायावती इस बार भी उसको दोहराने की कोशिश कर रहीं हैं.

बीएसपी के उम्मीदवारों की सूची में इस बार 88 अनुसूचित जाति के, 85 मुसलमान, 74 ब्राह्मण, 33 राजपूत शामिल हैं.

लेकिन सबसे ज़्यादा टिकट मिला है पिछड़े वर्ग के लोगों को. इस बार पार्टी ने 113 ओबीसी उम्मीदवारों को टिकट दिया है.

हाल ही में चुनाव आयोग के ज़रिए सरकारी पार्कों एवं स्मारकों में सरकारी ख़र्चे पर लगे पत्थर की हाथियों और स्वयं मायावती की मूर्तियों को ढकने के चुनाव आयोग के निर्णय को मायावती ने जातिवादी, दलित विरोधी, अनुचित, एकतरफ़ा और केन्द्र की कांग्रेस सरकार के दबाव में लिया गया फ़ैसला बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इससे चुनाव में उन्हें बहुत लाभ होगा.

मायावती के सफ़ाई दी कि हाथी की जो मूर्तियां समार्कों और पार्कों में लगाई गई हैं वे भारतीय संस्कृति में स्वागत के प्रतीक हैं न कि बहुजन समाज का चुनाव निशान.

साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग से यह भी कहा कि वह चंडीगढ़ के सरकारी पार्क में लगा घूमता हुआ ऊँचा कांग्रेस का चुनाव निशान हाथ का पंजा और सरकारी ख़र्चे पर लगे लाखों हैंडपंप भी ढकवा दें जो लोक दल का चुनाव निशान है.

मायावती की यह प्रेस कांफ्रेंस माल आवेंयु में पार्टी दफ़्तर में आयोजित की गई थी, जो कई सरकारी बंगले तोड़कर सरकारी ख़र्चे पर करोड़ों रूपए से बनाया गया है. मुख्यमंत्री निवास की तरह इस बंगले में भी किसी को अंदर जाने की अनुमति नही है.

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