'बाबरी मस्जिद विध्वंस केवल एक घटना थी'

Image caption सॉलिसिटर जनरल ने कार्रवाई की शुरुआत में कहा कि ‘मामला चर्चित बाबरी मस्जिद से जुड़ा है'

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बाबरी मस्जिद मामले में 20 लोगों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज किए जाने की एक याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद विध्वंस केवल एक घटना थी और उसे किसी चर्चित या बदनाम मामले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.

ये याचिका केंद्रीय जांच एजेंसी यानी सीबीआई की ओर से दाख़िल की गई थी.

सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणी तब आई जब अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कार्यवाही की शुरूआती बयान में कहा कि ये मामला "चर्चित" बाबरी मस्जिद विध्वंस से तालुक्क़ रखता है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ इसपर न्यायधीश एच एल दत्तू और सी के प्रसाद की खंडपीठ ने कहा, “बाबरी मस्जिद विध्वंस के बारे में ऐसा क्या चर्चित है? वो एक घटना थी जो हुई और उससे जुड़ी पार्टियां हमारे सामने हैं. उस घटना के बारे में कुछ भी बदनाम या विख्यात नहीं है.”

सीबीआई की याचिका भारतीय जनता पार्टी नेता लाल कृष्ण आडवाणी, शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे और 18 अन्य के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज किए जाने से संबंधित थी.

लेकिन इसके बाद अदालती कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पाई क्योंकि मुक़दमे से जुड़े कुछ पक्षों ने अपने जवाब कोर्ट में नहीं जमा किए थे. अदालत ने मामले की सुनवाई मार्च तक के लिए स्थगित कर दी है.

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल मार्च में बाबरी मस्जिद मामले में 21 लोगों को नोटिस जारी किए थे.

मामला

जिन लोगों को नोटिस जारी किए गए थे उनमें एल के आडवाणी, बाल ठाकरे के अलावा उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, बीजेपी नेता ऊमा भारती, मुरली मनोहर जोशी, साधवी रितंभरा और अन्य शामिल हैं. कोर्ट ने इन सभी से पूछा था कि उनके ख़िलाफ़ आपराधिक साज़िश रचने का मामला क्यों न दर्ज किया जाए. अदालत ने इन सबसे इसका जबाव दाख़िल करने को कहा था.

कोर्ट ने ये ऑर्डर सीबीआई की एक अपील के बाद जारी किया था, जिसमें एजेंसी ने इलाहबाद हाई कोर्ट के उस फ़ैसले को चुनौती दी थी जिसमें उसने निचली अदालत के फैसले को माना था जिसमें इन लोगों के ख़िलाफ़ मामला ख़त्म करने की बात कही थी.

हालांकि उच्च न्यायालय ने सीबीआई को आडवाणी और अन्य के ख़िलाफ़ इससे जुड़े दूसरे मामलों में रायबरेली की अदालत में मामला जारी रखने की इजाज़त दी थी.

हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सीबीआई ने अपनी याचिका में कहा था कि ऐसा लगता है कि निचली अदालत ने इस मामले में "कृत्रिम भेद पैदा कर सभी मुलज़िमों की कारगुज़ारियों को अलग-अलग सुनिश्चित करने की कोशिश की थी."

बाबरी मस्जिद विध्वंस से जुड़े दो मुख्य मामले हैं – एक मामला भाजपा नेता आडवाणी और अन्य के ख़िलाफ़ है जो दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के दौरान अयोध्या में राम कथा कुंज पर स्टेज पर मौजूद थे. जबकि दूसरा मामला उन लाखों ‘कारसेवकों’ के ख़िलाफ़ है जो उस वक्त बाबरी मस्जिद के आस-पास के इलाकों जमा थे.

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