गोधरा में उपवास के दौरान मोदी ने अपनी पीठ थपथपाई

  • 20 जनवरी 2012
नरेन्द्र मोदी इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption नरेन्द्र मोदी के सदभावना उपवास को एक राजनीतिक प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है.

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अपनी सरकार की पीठ थपथपाते हुए कहा है कि प्रदेश ने विकास का एक ऐसा मॉडल पेश किया है जो पूरे देश के लिए मिसाल बन गया है.

गोधरा शहर में अपने एक दिन के सदभावना उपवास के दौरान भाषण देते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा कि गुजरात के लोग अब सड़कों की नहीं बल्कि सरकार से पक्की सड़कों और 'डबल-लेन रोड' की मांग कर रहे हैं.

गुजरात में दशक भर पहले हुए भयंकर दंगे गोधरा से ही शुरू हुए थे जहां 27 फरवरी 2002 को अयोध्या से कार सेवकों को लेकर आ रही एक ट्रेन को जला दिया गया था. अनेक हिंदू कार सेवक इस घटना में मारे गए थे.

उसके बाद हुए भीषण मुस्लिम विरोधी दंगों की दसवीं बरसी के लगभग महीने भर पहले वहां किए गए नरेंद्र मोदी के सदभावना उपवास को एक अहम राजनीतिक प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है.

ज़िम्मेदार

कई लोग गुजरात के मुस्लिम-विरोधी दंगों के लिए सीधे-सीधे नरेंद्र मोदी को ज़िम्मेदार मानते हैं हालाँकि मोदी के पक्षधर इन आरोपों को ख़ारिज करते हैं और उनके ख़िलाफ़ न्यायालय में फ़िलहाल किसी मामले में वे दोषी नहीं पाए गए हैं.

शुक्रवार को घंटे भर के अपने हिंदी में दिए गए भाषण के दौरान नरेंद्र मोदी ने अपना ध्यान विकास पर ही केंद्रित किया और बार-बार गुजरात के विकास के मॉडल पर बोले.

हालांकि उन्होंने इन सबका श्रेय गुजरात की छह करोड़ जनता को दिया, गुजराती अस्मिता उनके भाषण पर हावी नहीं दिखी, जैसा कि उनके भाषणों में प्राय: होता है.

जानकारों का मानना है कि हिंदी में भाषण देना और गुजराती अस्मिता की जगह विकास के एक नए मॉडल की बात कर विवादों में घिरे रहे मुख्यमंत्री गुजारत से परे बड़ी राजनीतिक ज़मीन तलाशने की कोशिश कर रहे हैं.

उदाहरण

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जहां देश भर में कृषि में विकास की गति तीन प्रतिशत को पार नहीं कर पाई है प्रदेश में उसकी दर 11 फ़ीसद के आसपास थी.

उन्होंने तो यहां तक दावा किया कि गुजरात में काम करने को मज़दूर नहीं मिल रहे क्योंकि अधिकांश लोग आर्थिक तौर पर उस मुक़ाम से कहीं आगे चले गए हैं.

हालांकि गुजरात के कथित विकास के मॉडल को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं.

भारतीय योजना आयोग से जुड़े 'इंस्टीट्यूट ऑफ़ अप्लाइड मैनपावर रिसर्च' की हाल में जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां देश के मानव विकास सूचकांक में पिछले आठ सालों में 21 फ़ीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है वहीं औद्योगिक रूप से विकसित गुजरात में कुपोषण की दर भारत में सबसे ज़्यादा है.

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार