चुनाव में उतरा ब्रिटेन से आया वकील

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मीलिए पंजाब के अमृतसर से चुनाव लड़ रहे अमनप्रीत सिंह छीना से जो ऑक्सफोर्ड से पढ़ कर आए हैं और ब्रिटेन में वकील थे.

पंजाब के लोग विदेश जाने की चाह के लिए जाने जाते हैं. बहुत सारे लोग तो ग़ैर-कानूनी रास्ता अपना कर भी विदेश जाने के लिए तैयार रहते हैं.

लेकिन पूर्व में ब्रिटेन में स्थाई रुप से रहने का अधिकार पाने वाले (परमानेंट रेसीडेंसी) मनप्रीत सिंह छीना की सोच कुछ अलग है. ब्रिटेन में वकालत करने वाले और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से एमएससी करने वाले 34-वर्षीय छीना पंजाब में चुनावी लड़ाई लड़ रहे हैं. उन्होंने 2010 में ब्रिटेन की परमानेंट रेसीडेंसी का अधिकार छोड़ दिया और पंजाब रह कर लोगों की ‘सेवा करना’ चाहते हैं.

पीपल्स पार्टी ऑफ़ पंजाब पार्टी के अमृतसर के राजा सांसी से इस उम्मीदवार ने बीबीसी से कहा, ''यह सच है कि विदेश में रह कर मैं आराम की ज़िंदगी जी सकता हूँ. लेकिन अपने लोगों की हालत सुधारने का जज़्बा मुझे यहाँ खींच लाया है. मैंने मनप्रीत बादल से अपनी योजना के बारे में बात की और उन्होंने मुझे टिकट दे दिया.’'

चूंकि वह ब्रिटेन में रह चुके हैं और वहाँ पढ़ाई की हैं इसलिए पंजाब के लोगों में छीना के प्रति उत्सुक्ता ज़्यादा है.

उनकी शैक्षिक योग्यता की भी काफी चर्चा है क्योंकि पंजाब में एक तिहाई से अधिक विधायक स्कूल या कॉलेज 'ड्राप-आउट' हैं यानि उन्होंने अपनी पढ़ाई स्कूल या कॉलेज में बीच में ही छोड़ दी थी.

अपने आसपास बदलाव करने का सपना देखने वाले छीना का प्रचार करने का तरीका भी निराला है. वह अपने क्षेत्र में प्रचार करने से पहले इसकी घोषणा नहीं करते.

उनका कहना है, ''हमारे पार्टी के प्रचार में आने से लोगों को रोका जाता है. लेकिन जब मैं अचानक ही पहुँचता हूँ तो लोग मुझे सुनते हैं और क्योंकि उन्हें पहले पता नहीं होता कि बोलने वाला किस पार्टी से है तो दूसरी पार्टियों के समर्थक भी वहाँ पहुँच जाते हैं. इससे मुझे अपनी बात अलग सोच वाले लोगों तक पहुँचाने का मौका मिलता है.’’

बाकी नेताओं की तरह छीना क्षेत्र के लोगों को ज़्यादा सबज़बाग नहीं दिखाते.

उन्होंने कहा, “मैं शिक्षा में सुधार करना चाहता हूँ और चाहता हूँ कि यहाँ खेती से जुड़े उद्योग लगें. इस पूरे इलाके में कोई ऐसा उद्योग नहीं है जहाँ 70-80 से अधिक लोग काम करते हों. आज़ादी के 64 साल बाद ऐसा होना बहुत ही शर्म की बात है. जबकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट यहाँ से केवल 10 किलोमीटर पर है और अटारी का ड्राई पोर्ट 20 किलोमीटर के भीतर.”

भले ही छीना को राजनीति का कोई लंबा चौड़ा अनुभव नहीं है लेकिन उनका कहना है कि उनके दादा और परदादा दोनों आज़ादी की लड़ाई में शामिल थे.

चुनाव में उनका साथ देने के लिए संयुक्त राष्ट्र में कार्यरत उनकी पत्नी भी यहाँ आ चुकी हैं. वे ब्रिटेन की परमानेंट रेसीडेंट हैं. आसपास के काफ़ी लोग खास तौर पर युवा उनके यहाँ आने से काफ़ी प्रभावित हैं.

अमृतसर के कॉलेज में पढ़ रहे पुनीत सिंह ने कहा, ''राजनीति में ऐसे लोगों को आने से मुझ जैसे युवाओं की भी चुनाव में दिलचस्पी बढ़ी है.’’

लेकिन अकाली दल और कांग्रेस के सामने क्या छीना वोट भी बटोर पाएंगे? उनका कहना है कि इन दोनों पार्टियों को पिछले दशकों में लोग बहुत देख और झेल चुके हैं और अब बदलाव लाना चाहते हैं.

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