पंजाब चुनाव में बगावत बड़ा मुद्दा

Image caption अमरिंदर सिंह की अपने पार्टी के बाग़ियों के लिए किए गए 'क़त्ल-ए-आम' शब्द का उपयोग करने को विपक्ष एक बड़ा मुद्दा बना रहा है.

पंजाब की राजनीति में बगावत एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है. ऐसा भी यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस की जीत और हार में उनकी पार्टी के बाग़ी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. हालांकि बग़ावत केवल कांग्रेस में ही नहीं है बल्कि अकाली दल में भी है.

ऐसे में उस वक्त कोई हैरत नहीं हुई जब शनिवार शाम प्रदेश कांग्रेस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए उन 12 लोगों को पार्टी से निष्काषित कर दिया जो पार्टी टिकट न मिलने पर भी चुनाव लड़ रहे हैं. इन सभी ने पार्टी के आदेशों के बावजूद अपने नाम वापस लेने से इंकार कर दिया था.

'क़त्ल-ए-आम'

उधर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह की अपने पार्टी के बाग़ियों के लिए किए गए 'क़त्ल-ए-आम' शब्द का उपयोग करने को विपक्ष एक बड़ा मुद्दा बना रहा है. हालांकि अमरिंदर इसे एक भूल का नाम दे रहे हैं.

कांग्रेस द्वारा निष्काषित किए गए 12 लोगों में तीन पूर्व विधायक भी शामिल हैं जिनके नाम हैं रविंदर बब्बल, उपेंद्र शर्मा और गुरबीर सिंह संधू.

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह ने उन सभी को भी चेतावनी दी है जो विभिन्न क्षेत्रों में पार्टी के उम्मीदवारों के खिलाफ़ काम कर रहे हैं.

क्या बाग़ियों से पार्टी को काफी ख़तरा है. यह पूछे जाने पर अमरिंदर सिंह ने कहा कि बग़ावत तो अकाली दल समेत बाकी पार्टियों में भी है.

खन्ना में एक रैली के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा था कि शनिवार से बाग़ियों पर 'कत्ल-ए-आम’ किया जाएगा. अमरिंदर ने बाद में एक बयान जारी कर इस के लिए माफी भी मांगी थी.

पार्टी का कहना था कि वो केवल यह कहना चाहते थे कि बाग़ियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. लेकिन चुनाव से कुछ ही दिन पहले विपक्ष इस मौके को बेकार नहीं जाने देना चाहता.

अमृतसर में भारतीय जनता पार्टी के नेता अरुण जेटली ने तो इसे 1984 में हुए 'कत्ल-ए-आम’ से जोड़ डाला.

उन्होंने कहा कि यह गलती ऐसे ही नहीं हुई. एक समारोह में उन्होंने कहा कि अमरिंदर के ज़हन में यह बात थी जिसकी वजह से उनके मुँह से यह बात निकली.

पार्टी इस मामले को चुनाव आयोग तक भी ले जा रही है.

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