मुंबई धमाकों की गुत्थी सुलझाने का दावा

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Image caption पिछले साल जुलाई में हुए धमाकों में 27 लोग मारे गए थे

मुंबई पुलिस ने दावा किया है कि उसने 13 जुलाई 2011 को मुंबई में हुए तीन धमाकों के मामले की गुत्थी सुलझा ली है.

मुंबई में एक संवाददाता सम्मेलन में महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधक दस्ते यानी एटीएस के प्रमुख राकेश मारिया ने बताया कि इस मामले में दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया है, जबकि इस केस में शामिल एक महत्पूर्ण व्यक्ति फ़रार है.

सोमवार को अभियुक्त नकी अहमद वसी अहमद शेख़ और नदीम अख़्तर की गिरफ्तारी के ऐलान से पहले पुलिस सूत्रों ने बताया था कि उन्हें धोखेबाज़ी के अलग मामलों में 12 जनवरी को गिरफ़्तार किया गया था.

लेकिन उनसे पूछताछ के दौरान यह बात सामने आई कि वे पिछले साल जुलाई बम धमाके में भी शामिल हैं.

एटीएस प्रमुख राकेश मारिया ने मुंबई में एक प्रेस वार्ता में बताया कि नकी अहमद और नदीम अख़्तर बिहार के दरभंगा ज़िला के रहने वाले हैं.

पूछताछ

मारिया के अनुसार उन्होंने स्कूटर चोरी करके उनमें बम रखने का काम किया था. उन्होंने बताया कि बम रखे इन स्कूटरों को मुंबई के ज़वेरी बाज़ार, ओपेरा हाउस और दादर कबूतरखाना में ले जाकर रखा गया था.

इन धमाकों में 27 लोगों की मौत हो गई थी. एटीएस प्रमुख ने कहा कि छानबीन का काम बहुत कठिन था जिसके दौरान पुलिस ने कई राज्यों का दौरा किया और हज़ारों लोगों से पूछताछ की.

उन्होंने बताया, "बम धमाके की छानबीन के दौरान एटीएस की टीम ने 18 राज्यों का दौरा किया, कुछ राज्यों का एक बार से ज़्यादा. अब तक हमने 12373 गवाहों से पूछताछ की है."

उनके अनुसार इन बम धमाकों में शामिल सबसे अहम व्यक्ति यासीन भटकल फ़रार है. भटकल का संबंध इंडियन मुजाहिदीन से बताया जाता है.

उन्होंने बताया कि भटकल के अलावा दो और व्यक्तियों की उन्हें तलाश है. इन व्यक्तियों के नाम उन्होंने नहीं बताए. राकेश मारिया ने यह नहीं बताया की बम धमाकों के अभियुक्त किस संगठन के लिए काम कर रहे थे या फिर उनका मक़सद क्या था.

कुछ दिनों से मुंबई में यह अटकलें चल रही थीं की भटकल के फ़रार होने के कारण मुंबई और दिल्ली पुलिस के बीच मतभेद था.

दिल्ली पुलिस ने मुंबई पुलिस को भटकल के बारे में काफ़ी जानकारी दी थी, लेकिन मुंबई पुलिस भटकल को गिरफ़्तार करने में नाकाम रही. लेकिन एटीएस प्रमुख ने मतभेद की ख़बर को ग़लत बताया और कहा कि प्रेस वार्ता बुलाने का मकसद यह भी था कि मतभेद की इस ख़बर का खंडन किया जाए.

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