रुसी पनडुब्बी‘नेरपा’भारतीय नौ सेना में शामिल

  • 24 जनवरी 2012
Image caption रूस ने अपनी परमाणु पनडुब्बी ‘नेरपा’ को दस साल के पट्टे पर भारतीय नौ सेना को सौंप दिया है

रूस ने अपनी परमाणु पनडुब्बी ‘नेरपा’ को दस साल के पट्टे पर भारतीय नौ सेना को सौंप दिया है.

ये वही पनडुब्बी है जिसमें 2008 में, अग्नि शमन प्रणाली से अचानक हुए विषैली गैसों का रिसाव से 20 लोगों की मौत हो गई थी. रुस ने भारत को ‘नेरपा’ सौंपने से पहले इसकी प्रणाली को फिर से ठीक किया है.

यूनाइटेड शिपबिल्डिंग कॉरपोरेशन के मुताबिक ये अनुबंध 90 करोड़ डॉलर से ज़्यादा का है.

रूस ने प्रिमोर्ये के पूर्वी बंदरगाह पर सोमवार को हुए समारोह में औपचारिक रुप से भारतीय नौसेना को नेरपा परमाणु पनडुब्बी सौंप दिया.

नेरपा को सौपे जाने से पहले दोनों देशों ने महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर किए और इसके बाद नेरपा पर भारतीय नौ सेना का ध्वज फहरा दिया गया.

कार्यक्रम में रूस में भारत के राजदूत अजय मल्होत्रा और यूनाइटेड शिपबिल्डिंग कॉरपोरेशन के प्रमुख समेत दूसरे अधिकारी भी मौजूद थे.

इससे पहले, भारत से आए प्रतिनिधियों ने इस पनडुब्बी के निर्माण कार्य पर संतोष जताया था और कहा था कि पनडुब्बी के हस्तांतरण संबंधी सारे मुद्दों को सुलझा लिया गया है.

आईएनएस चक्र

भारत ने इस पनडुब्बी का नाम आईएनएस चक्र रखा है.

इसी के साथ भारतीय नौसेना ने विश्व में अमेरिका,रूस,चीन ब्रिटेन और फ्रांस के बाद पानी के भीतर परमाणु चलित पनडुब्बी क्षमता वाले देशों में छठा स्थान हासिल कर लिया है.

रुस भारत का प्रमुख हथियार निर्यातक

सेंटर फॉर एनालिसिस ऑफ वर्ल्ड आर्मस ट्रेड यानि विश्व हथियार व्यापार विश्लेषण केंद्र का कहना है कि नेरपा और एडमिरल गोर्शकोव को मिलाकर देखा जाए तो रुस के 2012 में किए गए हथियारों के निर्यात में भारत की भागीदारी 60 फ़ीसदी हो जाएगी.

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Image caption ये वही पनडुब्बी है जिसमें 2008 में, अग्नि शमन प्रणाली से अचानक हुए विषैली गैसों का रिसाव से 20 लोगों की की मौत हो गई थी

एडमिरल गोर्शकोव को अब 'विक्रमादित्य' के नाम से जाना जाता है.

सेंटर फॉर एनालिसिस का ये भी कहना है कि इस साल रुस भारत को 77 लाख डॉलर की कीमत के हथियार और सैन्य उपकरण मुहैया कराएगा.

इसके साथ ही रुस के 2012 के कुल निर्यात में भारत की भागीदारी 60 फ़ीसदी को पार कर जाएगी और भारत के आयात का ये 80 फ़ीसदी होगा.

भारत मास्को से 40 हेलीकॉप्टर और 42 लड़ाकू जहाज़ भी खरीदेगा.

सेंटर से सर्वे के मुताबिक निर्यात का काफ़ी हिस्सा निर्धारित योजना के बाद मुहैया कराए जाने की वजह से ही 2012 के ये आंकड़े काफ़ी बड़े हैं.

जापान के समुद्र में दुर्घटना

आठ नवंबर 2008 को नेरपा जापान के समुद्र में सामान्य दिनों की तरह गश्त पर थी. अचानक नेरपा के अग्निशमन उपकरणों ने बिना किसी पूर्व चेतावनी के क्लोरो फ्लोरो कार्बन और टेट्रा क्लोरो थाइमीन जैसी विषैली गैसों का रिसाव करना शुरु कर दिया.

विषैली गैसों के संपर्क में आने की वजह से 20 लोगों की मौत हो गई और 20 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया.

अक्टूबर 2011 में ज्यूरी अदालत ने पनडुब्बी दुर्घटना मामले में अभियुक्त कैप्टन दमित्री लावरेंतयेव और इंजीनियर दमित्री को बरी कर दिया.

इन दोनो पर अकारण अग्नि सुरक्षा प्रणाली को चालू करने का अभियोग था.उन पर पेशे में लापरवाही बरतने का आरोप था जिससे लोग हताहत हुए थे.

नेरपा का निर्माण

परमाणु पनडुब्बी के-152 नेरपा का निर्माण 1991 के अंत में शुरु हुआ था लेकिन इसका काम निर्धारित कार्यक्रम से काफी पीछे था. इसे पाँच साल के भीतर पूरा किया जाना था.

2004 तक इस परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. इसके बाद भारत ने इसका अधूरा काम पूरा कराने के लिए धन देने पर सहमति जताई.

शुरुवात में नेरपा को 2007 में भारतीय नौ सेना को बेचा जाना था लेकिन ये तारीख़ बार-बार बढ़ती रही. इसके बाद 2008 की दुर्घटना भी हो गई.

ये पनडुब्बी समुद्र के भीतर 600 मीटर तक रह सकती है और इसे तीन महीने में एक बार ही एक समुद्र तल पर आने की ज़रुरत पडे़गी.

नेरपा पनडुब्बी की अधिकतम गति 30 समुद्री मील है और ये आठ टॉरपीडो से भी लैस है.

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