स्वास्थ्य घोटाले के अभियुक्त ने आत्महत्या की

  • 23 जनवरी 2012
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उत्तर प्रदेश में बहुचर्चित राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन घोटाले के एक अभियुक्त सुनील कुमार वर्मा ने सोमवार सुबह अपने घर पर लाइसेंसी रिवाल्वर से गोली मारकर आत्महत्या कर ली.

सीबीआई ने एक प्रेस विज्ञप्ति में इस बात की पुष्टि की है कि सुनील वर्मा नामजद अभियुक्त थे और इस महीने की चार तारीख़ को इनके घर छापा मारकर तलाशी ली गई थी.

इस घोटाले से जुड़ी ये चौथी मौत है. इससे पहले दो सीएमओ का क़त्ल हुआ और तीसरा उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी की संदिग्ध परिस्थिति में जेल में मौत हो गई थी.

सुनील कुमार वर्मा उन 36 अभियुक्तों में से थे, जिनके ख़िलाफ़ सीबीआई नामजद मुक़दमा करके पूछ्ताछ कर रही है. इनमें से आठ अभियुक्त गिरफ़्तार हो चुके हैं.

सीबीआई ने पिछली चार जनवरी को उनके आवास पर छापा मारकर तलाशी ली थी .

तनाव

परिवार के लोगों अनुसार वे उसके बाद से तनाव में थे. सुनील कुमार जल निगम की डिज़ाइन और निर्माण शाखा में प्रोजेक्ट मैनेजर थे, जो ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम के तहत प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण करा रही थी.

पुलिस के अनुसार सुनील कुमार वर्मा के बेटे ने यह जानकारी दी थी कि उन्होंने सुबह क़रीब आठ बजे विकास नगर में अपने घर पर ही गोली मारकर आत्महत्या कर ली.

उन्हें पास के अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

पुलिस का कहना है कि सीबीआई उनसे पूछताछ कर रही थी और वे तनाव में थे. यह आत्महत्या की वजह हो सकती है.

लखनऊ हाईकोर्ट ने कई हज़ार रुपयों के इस घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपी है. सीएजी ने भी इस मामले में विशेष ऑडिट करके धन की बर्बादी, भ्रष्टाचार और गबन का पर्दाफ़ाश किया है.

अब तक जिन लोगों के नाम इस मामले में सामने आए हैं, उनमे पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा और पूर्व प्रमुख सचिव स्वास्थ्य सचिव प्रदीप शुक्ला शामिल हैं.

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