'कट्टरपंथी व नेता एक ही थैली के चट्टे बट्टे'

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Image caption वीडियो संबोधन के रद्द होने के तुरंत बाद रुश्दी ने ट्विट किया, ‘भद्दा

जयपुर साहित्य सम्मेलन में वीडियो कांफ्रेंसिंग रोके जाने से आहत लेखक सलमान रुश्दी ने इसके लिए कट्टरपंथियों और नेताओं को ज़िम्मेदार ठहराया है.

वीडियो संबोधन के रद्द होने के तुरंत बाद रुश्दी ने ट्विट किया- ‘भद्दा'. उन्होंने पूरे घटनाक्रम को ‘काला नाटक’ बताया.

एक निजी टीवी चैनल एनडीटीवी को दिए गए विशेष साक्षात्कार में सलमान रुश्दी ने कहा है कि साहित्य सम्मलेन को संबोधित न कर पाने का उन्हें मलाल है लेकिन जिस भारत से जीवन भर उन्होंने प्यार किया, जो धर्मनिरपेक्षता और स्वतंत्रता के प्रति लंबे अर्से से प्रतिबद्ध रहा, लेकिन अब उन्हें लगता है कि भारत में भी धार्मिक कट्टरता बढ़ती जा रही है और राजनेता भी संकीर्ण स्वार्थ के लिए उनका समर्थन कर रहे है. कहना चाहिए कि दोनो एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं.

वो भारत नही आ पाए इसके लिए दुखी है, लेकिन उससे भी ज़्यादा दुखी उस देश के लिए हैं जहाँ ये सब हुआ.

मुस्लिम वोटों की राजनीति

एक सवाल के जवाब में सलमान रुश्दी ने कहा कि वो ये समझ नही पा रहे कि ऐसा इस वक्त क्यों हुआ, लेकिन जैसा कि सब लोग कह रहे हैं कि ये सब कहीं न कहीं उत्तर प्रदेश के चुनाव से जुड़ा है. विरोध करने वालों की चाहत चुनावों में मुस्लिम वोटों को हासिल करने की है.

सलमान ने कहा कि इससे पहले भी वो आठ नौ सालों के दौरान पाँच या छह बार भारत आ चुके हैं.दिल्ली में पिछले साल इंडिया टुडे सम्मेलन में बोल चुके हैं. परिवार के साथ भारत में छुट्टियां बिता चुके हैं. ये उनके लिए बेहद चौंकाने वाली बात है कि न सिर्फ़ उनकी मौजूदगी बल्कि वीडियो पर उनका दिखना भी लोगों को नागवारा लगा.

सलमान रुश्दी ने कहा कि मुस्लिम समूहों द्वारा हिंसा की धमकी से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंट दिया दिया.

आम मुसलमान पर फ़र्क नही

उन्होंने ये भी कहा कि ज़्यादातर भारतीय मुसलमान इस बात की परवाह नही करते कि वो आएं ये न आए. उनके पास और भी बहुत से काम और प्राथमिकताएं हैं. वो अपनी निजी ज़िंदगी की दुश्वारियों से जूझ रहे हैं, और हो सकता है कि कुछ ऐसे भी हों जो उन्हें सुनने के लिए आना चाहते हों.

सलमान रुश्दी ने अपने न आने के लिए केंद्र और राजस्थान सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि ‘भद्दी’ स्थिति के लिए वे ही ज़िम्मेदार हैं. उन्होंने मुद्दे पर कांग्रेस की प्रतिबद्धता पर भी सवाल खड़े किए.

इससे पहले, मुस्लिम संगठनों के प्रदर्शन को देखते हुए और हिंसा की आशंका के चलते आयोजकों ने रुश्दी के वीडियो संबोधन को रद्द कर दिया था.

हिंसा की आशंका

जयपुर में सम्मलेन स्थल 'दिग्गी पैलेस' के मालिक राम प्रताप सिंह ने कहा कि पुलिस की सलाह पर उन्होंने रुश्दी की वीडियो वार्ता के आयोजन को रद्द करने का फ़ैसला किया है.

सिंह का यह भी कहना था "कई रूश्दी विरोधी लोग इस आयोजन स्थल के भीतर भी आ गए हैं और बहुत सारे लोग आस पास एकत्र हो रहे हैं. इन लोगों ने हिंसा की धमकी भी दी है. इसलिए इस होटल की मेरे बच्चों की और यहाँ मौजूद सभी लोगों की सुरक्षा के लिए यह आयोजन रद्द करना ज़रूरी है."

मंगलवार को सुबह रुश्दी के वीडिओ लिंक के ज़रिये सम्मेलन को संबोधित करने की योजना का विरोध कर रहे कई मुस्लिम संगठनों के कार्यकर्ताओं ने जयपुर के दिग्गी पैलेस में जबरन घुसने की कोशिश की थी.

विवाद की जड़

दरअसल सारा विवाद जनवरी की नौ जनवरी को शुरू हुआ था जब भारत के सबसे प्रसिद्ध मदरसों में से एक दारुल उलूम देवबंद के कुलपति मौलाना अब्दुल कासिम नौमानी ने सलमान रुश्दी के भारत आने पर कड़ी आपत्ति जताई थी.

रुश्दी की 1988 में एक किताब आई थी 'सैटेनिक वर्सेज़' यानी 'शैतान की आयतें'. यह किताब खासी विवादित साबित हुई.

इसी किताब की वजह से रुश्दी के ख़िलाफ़ फ़तवा जारी हुआ और भारत सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया.

अब लेखकों का एक वर्ग इस प्रतिबंध को चुनौती देने की बात कर रहा है.

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