उड़ीसा की बोंडा जनजाति

अंडमान और निकोबार की जरावा जनजाति के बाद अब उड़ीसा की बोंडा जनजाति को टूर ऑपरेटरों के गलत ढंग से पेश किये जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है.

टूर ऑपरेटरों पर आरोप है कि वे सैलानियों को आकर्षित करने के लिए इस प्राचीन जनजाति कि रहन सहन और ख़ास कर उनके अधनंगेपन का जमकर प्रचार और प्रसार करते हैं.

बोंडा उड़ीसा की सबसे आदिम जनजातियों में से एक हैं, जो दक्षिणी उड़ीसा के मलकानगिरी जिले में पाए जाते हैं.

उनका रहन सहन दूसरे जनजातियों से अलग है और वो अपने गाँव छोड़ कर कम ही बाहर निकलते हैं.

जरावा जनजाति कि तरह उनकी संख्या भी लगातार कम होती जा रही है.

घटती संख्या को रोकने के लिए सरकार ने बोंड़ा विकास प्राधिकरण का गठन किया है. लेकिन इसके बावजूद अब केवल 6000 बोंड़ा ही रह गए हैं.

इस आरोप के बाद राज्य सरकार हरकत में आई और पर्यटन बिभाग से इस बारे में रिपोर्ट तलब की.

राज्य के मुख्य सचिव विजय कुमार पटनायक ने बुधवार को पत्रकारों को बताया कि मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के आदेशानुसार शीघ्र ही पर्यटन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी को सच्चाई परखने के लिए मलकानगिरी भेजा जायेगा, जहाँ बोंड़ा जनजाति के लोग पाए जाते हैं.अगर कोई दोषी पाया गया, तो उसके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई होगी.

टूर ऑपरेटरों को नोटिस

मुख्यमंत्री के इस आदेश के बाद पर्यटन विभाग ने टूर ऑपरेटरों को एक नोटिस जारी किया है. इस आदेश में कहा गया है कि अगर उनकी वेबसाइट पर बोंड़ा या किसी अन्य जनजाति के बारे में अगर कोई आपत्तिजनक लेख है, तो उसे तत्काल निकाल दें.

हालाँकि टूर ऑपरेटरों का कहना है कि वो सरकार के सभी नियमों का पालन करते हैं.

डॉव टूर्स के मालिक गगन सारंगी ने बीबीसी से कहा; "बोंडा जनजाति के गाँव में जाने पर सरकार ने वैसे भी पावंदी लगा रखी है. इसलिए पर्यटकों के वहां जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता. हम पर्यटकों को उनके साप्ताहिक बाज़ार तक ही ले जाते हैं. ये कहना गलत है कि बोंड़ा नंगे होते हैं."

सारंगी ने कहा राज्य सरकार खुद आदिवासी इलाकों में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बढ़ चढ़कर प्रचार करती है. सरकार को पहले इस बारे में एक स्पष्ट नीति तैयार करनी चाहिए.

पर्यटकों का आकर्षण

उनका समर्थन करते हुए एस टूर्स के मालिक सनातन साहू कहते हैं कि बोंड़ा लोग अब पहले जैसे नहीं रहे. पर्यटक उनका नंगा बदन देखने नहीं, वल्कि उनके रंगीन पहनावे और गहनों से आकर्षित हो कर जाते हैं.

उन्होंने कहा कि बोंड़ा इलाके में जाने वाले लगभग सभी पर्यटक विदेशी होते हैं,

स्वस्ती टूर्स के मालिक और पूर्वी भारत टूर ओपेरटर संघ के प्रमुख जे.के. मोहन्ती इस बात से सहमत नहीं हैं कि पर्यटकों को बोंड़ा लोगों के बारे में गलत सूचना दी जाती है. वो कहते हैं,"अपने तीस साल के तजुर्बे के आधार पर मैं यह दावे के साथ कह सकता हूँ कि जरावा जनजाति के जिस विडियो को लेकर इतना हंगामा हो रहा है, वैसा कुछ भी यहाँ नहीं होता."

भारतीय टूर ऑपरेटर संघ के कार्यकारी निदेशक गौर कांजीलाल ने बीबीसी से कहा; "कई इलाकों में जाना प्रतिबंधित होता है और हमारे सदस्य इसका पालन करते हैं." हालाँकि उन्होंने माना कि कुछ असंगठित टूर ऑपरेटरों भी ऐसे इलाकों में पर्यटकों को ले जाते हैं.

उन्होंने दावा किया कि स्थानीय अधिकारियों की जानकारी के बिना ऐसा नहीं हो सकता. "सरकार चाहे तो इसे रोक सकती है,