भाजपा और सीपीआई को वोट दें: रामदेव

योगगुरू बाबा रामदेव ने उत्तराखंड की जनता से अपील की है कि वो कांग्रेस को वोट न दें. रामदेव ने विभिन्न राजनैतिक घटनाक्रमों और अपने ऊपर लगे आरोपों का हवाला देकर कांग्रेस पर तीखे शब्दबाण चलाए.

इन विधानसभा चुनावों में ये पहली बार है जब रामदेव खुलकर कांग्रेस के ख़िलाफ़ मैदान में उतर आए हैं.

पूरी रणनीति से कांग्रेस का नाम लिए बग़ैर उन्होंने सवाल उठाया कि एक ही पार्टी क्यों संतों से डरी हुई है. एक ही पार्टी क्यों बौखला रही है और एक ही पार्टी को क्यों कालाधन वापस लाने के मुद्दे पर कुछ भी स्पष्ट न करने से परहेज है.

रामदेव ने राजधानी देहरादून में कहा कि अगर वोट देना ही है, तो भाजपा और सीपीआई को दें, जो कम से कम काले धन के ख़िलाफ़ प्रतिबद्ध तो हैं.

उनका कहना था कि ये समय उस पार्टी के साथ हिसाब बराबर करने का है, उसे सबक सिखाने का है, जो भ्रष्टाचार को शरण दे रही है.

कांग्रेस की ओर संकेत करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक पार्टियां काले धन को छुपाने और बचाने में लगी हैं और जो भ्रष्टाचार का विरोध कर रहे हैं, उनको दबाने और दफ़नाने में लगी हैं.

उनका कहना था कि थप्पड़ या जूते की मार नहीं, लोगों को वोट की मार करनी चाहिए. रामदेव ने कहा कि जिन्होंने पूरे हिंदुस्तान को लूट लिया, वो उत्तराखंड को क्या बचाएंगे.

गौरतलब है कि रामदेव ने उत्तराखंड के सभी ज़िलों में जनसभा करने की अनुमति मांगी थी लेकिन उन्हें इसके लिए अनुमति नहीं दी गई. इसलिए देहरादून में एक संवाददाता सम्मेलन में मीडिया के ज़रिए उन्होंने अपनी बात कही.

उन्होंने भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी का एक पत्र भी दिखाया और कथित रूप से उनका साथ देने के लिए नितिन गडकरी की प्रशंसा की.

कांग्रेस के ख़िलाफ़ अपनी इस लड़ाई को मतदाता जागरण अभियान का नाम दे रहे रामदेव ने कहा कि उत्तराखंड में उन्हें जनसभाएं नहीं करने दिया गया.

लेकिन वे पंजाब और उत्तरप्रदेश जाकर बड़े पैमाने पर जनसभाओं का आयोजन करेंगे और मतदाताओं से अपील करेंगे कि वो भ्रष्टाचार को बढावा देने, काला धन को छिपाने और संतों का अपमान करने वाली पार्टी को वोट न देकर हिसाब किताब बराबर करें.

संकेतों में उनका कहना था कि चुनाव आयोग दबाव में काम कर रहा है. दरअसल उत्तराखंड के दौरे पर आई टीम अन्ना रामदेव के साथ संयुक्त रूप से सभाएं करना चाहती थी लेकिन अपनी व्यस्तता की बात कहकर रामदेव ने उनके साथ प्रचार नहीं किया और अपना अलग अभियान शुरू किया.

लेकिन उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर वो और टीम अन्ना साथ-साथ है. रामदेव काफ़ी आवेश में नज़र आ रहे थे और अपनी रौ में बहुत कुछ कह गए.

एक तरह से अपनी तुलना राम और कृष्ण से करते हुए उन्होंने कहा कि जब वो राजनैतिक हस्तक्षेप कर सकते हैं, युद्ध करा सकते हैं तो वे योग ही सिखाकर व्यवस्था को बदलने की कोशिश कर रहे हैं.

रामदेव ये कहने से भी नहीं चूके कि सचिन तेंदुलकर महान खिलाड़ी जरूर हैं, लेकिन उनसे पहले भारत रत्न ध्यानचंद को दिया जाना चाहिए.

संबंधित समाचार