प्रताड़ना के आरोपी अधिकारी को पुलिस पदक पर विवाद

Image caption सोनी सोढ़ी को छत्तीसगढ़ राज्य की जेल से हटाए जाने के लिए राजधानी में कई विरोध प्रदर्शन हुए हैं.

दंतेवाड़ा के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अंकित गर्ग को वीरता के लिए दिए गए पुलिस पदक से विवाद छिड़ गया है.

सामाजिक संगठन गर्ग को इस तरह का पदक दिए जाने का विरोध कर रहे है क्योंकि उनके खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में एक आदिवासी महिला शिक्षक सोनी सोढ़ी को हिरासत में प्रताड़ित करने का मामला चल रहा है.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सोनी सोढ़ी का मेडिकल परीक्षण कोलकाता के नीलरतन सरकारी मेडिकल कालेज एंड हॉस्पिटल में किया गया जहां पाया गया कि 'उनके गुप्तांगों में गोलियां और पत्थर' डाले गए.

सोढ़ी की तरफ से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि सिर्फ़ इतना ही नहीं, उन्हें हिरासत में बिजली के झटके भी दिए गए. इस मामले में सोढ़ी नें अंकित गर्ग को नामज़द अभियुक्त बनाया है.

सामाजिक संगठनों का कहना है कि अंकित गर्ग पर ऐसे गंभीर आरोप लगने की सूरत में उन्हें बहादुरी के लिए राष्ट्रपति का पदक देना ग़लत है.

महिला संगठनों ने की आलोचना

इस मामले में पुलिस के अधिकारी और राज्य सरकार कुछ भी कहने से कतरा रही है, अलबत्ता उनका कहना है कि गर्ग को दिए गए पुलिस पदक से सोनी सोढ़ी मामले का कोई लेना देना नहीं है.

लेकिन सामजिक संगठन पुलिस अधिकारियों की इस दलील को ख़ारिज करते हुए कहते हैं कि सिर्फ सोनी सोढ़ी का मामला ही नहीं अंकित गर्ग पर हिरासत में यातनाएं देने के और भी आरोप हैं.

मुंबई स्थित महिलाओं की राष्ट्रीय संस्था वूमेन अगेंस्ट सेक्सुअल वायलेंस एंड स्टेट रिप्रेशन यानी डब्लूएसएस ने एक बयान जारी कर कहा है, "क्या हिरासत में यातनाएं देना कोई बहादुरी का काम है जिसे सरकार प्रोत्साहित कर रही है?".

वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गर्ग को ये पदक, राजनांदगांव के पुलिस अधीक्षक के तौर पर एक नक्सली हमले का बहादुरी के साथ सामना करने के लिए दिया गया है.

उनका कहना है कि अक्तूबर 2010 में राजनांदगांव में माओवादी छापामारों और पुलिस बल में मुठभेड़ हुई जिसमें सुरक्षा बलों नें 6 नक्सलियों को मार गिराया था.

अंकित गर्ग पुलिस दल का नेतृत्व कर रहे थे. मगर इसी मुठभेड़ में दो आम नागरिकों की भी गोली लगने से मौत हुई थी. इनमे से एक मज़दूर था जबकि एक गूंगा और बहरा था.

पुलिस नें दलील दी थी कि यह दोनों लोग माओवादियों और पुलिस की गोलीबारी के बीच फंस गए थे. लेकिन ये दावा विवादित रहा है.

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