पूर्व इसरो प्रमुख ने आईआईटी का पद छोड़ा

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Image caption जी माधवन नायर पर ग़लत तरीक़े से एक निजी कंपनी को ठेका देने का आरोप है

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो के पूर्व प्रमुख जी माधवन नायर ने पटना आईआईटी के संचालक मंडल के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

जी माधवन नायर पर एंट्रिक्स-देवास घोटाले को लेकर आरोप लगे हैं जिसके बाद केंद्र सरकार ने उनके किसी सरकारी पद या किसी भी सरकारी समिति या सरकार से जुड़े किसी भी कामकाज में उनके शामिल होने पर रोक लगा दी है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार नायर शुक्रवार को पटना पहुंचे थे जहां उन्होंने इस्तीफ़ा देने के बाद लोगों को विदा कहा.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने उनके हवाले से कहा है, "मैं लोगों को विदा कहने गया था. हालांकि मुझे अभी सरकारी आदेश नहीं प्राप्त हुआ है, लेकिन जो भी अभी तक सामने आया है उसके बाद मैं पद पर नहीं बने रहना चाहता था."

नायर के अलावा सरकार ने दो और वैज्ञानिकों पर वर्तमान या भविष्य में सरकार से किसी भी तरह के जुड़ाव पर रोक लगा दी है.

इन पर आरोप है कि इन्होंने देवास नाम की एक निजी कंपनी को बिना प्रक्रिया पूरा किए ठेका दे दिया.

आईआईटी पटना उन आठ संस्थानों में से एक है जिसे केंद्र ने वर्ष 2008 और 2009 के दौरान स्थापित किया था.

'सफ़ाई का मौक़ा नहीं मिला'

आईआईटी का परिसर पटना शहर से 25 किलोमीटर दूर स्थित बिहटा में तैयार हो रहा है.

सरकार के फ़ैसले के विरूद्ध क़ानूनी कार्रवाई करने के सवाल पर नायर ने कहा कि उन्होंने सूचना के अधिकार क़ानून के तहत एंट्रिक्स-देवास सौदे पर बीके चतुर्वेदी समिति की रिपोर्ट की कॉपी मांगी है.

नायर ने कहा कि उन्होंने समिति की रिपोर्ट के बाद दी गई उस सिफ़ारिश की भी प्रति मांगी है जिसमें उनके ख़िलाफ़ कारवाई की बात कही गई थी.

उन्होंने कहा कि हालांकि चतुर्वेदी समिति ने उन्हें अपना पक्ष रखने की इजाज़त दी थी लेकिन बाद में तैयार दल ने उन्हें सिर्फ़ लिखित सवाल भेजकर उनसे इसका जवाब मांगा था.

उन्होंने कहा कि उन्हें अपना पक्ष पूरी तरह से रखने का मौक़ा नहीं दिया गया.

देवास मल्टीमिडिया इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय के समक्ष ले गया है.

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