'रहिमन जूता राखिए...'

Image caption अज़हर ने कहा कप्तान बार-बार बदला जाए तो स्पष्ट है चयन ग़लत है

शनिवार की शाम पांच बजे उत्तराखंड में चुनाव प्रचार ख़त्म हो गया. इस चुनाव में कांग्रेस और भाजपा दोनों राष्ट्रीय पार्टियों ने चुनाव प्रचार में ख़ूब सारे स्टार प्रचारकों का सहारा लिया..चाहे उनका संबंध खेल से हो या फिर फ़िल्मी दुनिया से.

इसी क्रम में कांग्रेस की तरफ़ से भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और मुरादाबाद से कांग्रेस के लोकसभा सांसद मोहम्मद अज़हरुद्दीन ने भी उत्तराखंड में लोगों से कांग्रेस के पक्ष में वोट डालने की अपील की.

अब अज़हरूद्दीन कितने अच्छे वक्ता हैं, ये किसी को बताने की ज़रूरत तो है नही.

जब वो कप्तान थे तो हर मैच के बाद क्या बोलते थे...या तो वो समझते थे या ख़ुदा समझता था.

शनिवार को नैनीताल में भी उन्होंने भाषण देना शुरू किया... दो-तीन मिनट तक तो विकास वग़ैरह की बातें होंने लगीं फिर खेल और ख़ासकर क्रिकेट की बातें होने लगी. भाजपा के बार-बार मुख्यमंत्री बदलने पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि जब बार-बार कप्तान बदला जा रहा है तो इसका मतलब साफ़ है कि चयन ही ग़लत हुआ था.

उसके बाद युवाओं को लुभाने के लिए उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस जीतती है तो नैनीताल में अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम बनेगा और उत्तराखंड क्रिकेट टीम का गठन किया जाएगा ताकि यहां के युवा भी राष्ट्रीय टीम से खेल सकें.

ज़ाहिर है सचिन, सहवाग और द्रविड़ के रहते हुए भी जब 4-0 से हारना है तो उत्तराखंड के खिलाड़ी भी इससे ज़्यादा बुरी तरह से तो नहीं ही हारेंगें.

रहिमन जूता राखिए

बात जब प्रचार की है तो ये भी ज़िक्र करता चलूं कि जब से इराक़ के मुंतसिर अल-ज़ैदी ने बुश पर जूता फेंका है उसके बाद से ना जाने कितने नेताओं को इसका सामना करना पड़ा है.

Image caption राजनीतिक नेताओं पर जूता फेंकने वालों पर भी दो पंक्तियाँ चुनाव प्रचार के दौरान ख़ासी चर्चा में हैं

केंद्रीय गृह मंत्री चिदंबरम और राहुल गांधी से लेकर टीम अन्ना को भी कहीं ना कहीं एक ज़ैदी का सामना करना पड़ा है. इस हालत को बयान करते हुए किसी ने रहीम के दोहे में संशोधन कर दिया है जो इन चुनावों के समय काफ़ी चर्चा में है:

'रहिमन जूता राखिए, काखन बग़ल दबाए

ना जाने किस मोड़ पे, भ्रष्ट नेता मिल जाए'

मैं सबसे ग़रीब

चुनावों के दौरान कितने प्रत्याशी करोड़पति हैं या फिर किसके पास सबसे ज़्यादा धन है, लोगों को इस बारे में जानने की बड़ी इच्छा रहती है.

जबसे एसोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक रिफ़ॉर्म्स नाम की संस्था प्रत्याशियों के शपथ पत्र को गंभीरता से अध्ययन कर हर चुनाव के समय रिपोर्ट जारी करने लगी है तबसे लोगों की रुचि और बढ़ गई है.

इसी क्रम में एडीआर ने उत्तराखंड के बारे में जो रिपोर्ट जारी की है उसके अनुसार यहां कुल 788 प्रत्याशियों में से 88 करोड़पति हैं. आप सोच रहें होंगे कि ये कौन सी बात है जो मैं आपको बता रहा हूं कि चुनाव में अमीरों की संख्या बढ़ने लगी है.

आपने बिल्कुल सही सोचा, दरअसल मैं भी ये नहीं बताना चाहता कि इस चुनाव में कितने करोड़पति उम्मीदवार है.

मेरी नज़र तो एक ख़ास चीज़ की तरफ़ गई. एडीआर की ही रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड विधान सभा के लिए चुनाव लड़ रहे सभी प्रत्याशियों में एक श्रीमान ऐसे भी हैं जिनके पास एक रुपया भी नहीं है.

पिथौरागढ़ ज़िले की गंगोलीहाट विधान सभा सीट से उत्तराखंड क्रांति दल के बैनर पर चुनाव लड़ रहे पीके दिनेश आर्य ने अपने शपथ पत्र में अपनी आमदनी शु्न्य दिखाई है.

बस आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि इस सूचि में उधमसिंहनगर की किच्छा सीट से 26 करोड़ 63 लाख रूपए की संपत्ति के मालिक भाजपा प्रत्याशी राजेश शुक्ला सबसे अमीर प्रत्याशी हैं.

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