पंजाब और उत्तराखंड में मतदान संपन्न

इमेज कॉपीरइट AFP

पंजाब में 117 विधानसभा सीटों और उत्तराखंड में 70 विधानसभा सीटों के लिए मतदान समाप्त हो गया है. छोटी-मोटी घटनाओं को छोड़कर पंजाब में मतदान आमतौर पर शांतिपूर्ण रहा.

उत्तराखंड में भी मतदान शांतिपूर्ण रहा. यहाँ मतदान की शुरुआत धीमी रही, लेकिन बाद में इसकी गति तेज़ हुई.

निवार्चन अधिकारियों के मुताबिक़ पंजाब में क़रीब 77 प्रतिशत मतदान हुआ है. उत्तराखंड में क़रीब 70 प्रतिशत मतदान हुआ है.

बीबीसी संवाददाता वंदना के मुताबिक़ अमृतसर और अबोहर जैसे इलाक़ों से कुछ छिटपुट घटनाओं की ख़बर है जहाँ लोग घायल भी हुए हैं. सुबह-सुबह वोटिंग की गति कुछ धीमी रही लेकिन जैसे-जैसे दिन बढ़ता गया मतदान की रफ़्तार भी तेज़ होती गई.

बुर्ज़ुगों, महिलाओं और युवाओं सभी ने बढ़ चढ़ कर अपने मताधिकार का प्रयोग किया. हालांकि कई जगह लोगों को मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा.

मोहाली में जहाँ एक बुज़ुर्ग के पहचान पत्र पर महिला की तस्वीर थी, तो लखनौर गाँव में कई गाँववालों ने बीबीसी को बताया कि उनके नाम वोटर लिस्ट में नहीं थे.

मतदान को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे. पंजाब पुलिस के अलावा अर्धसैनिक बल की 200 से ज़्यादा कंपनियाँ तैनात की गई थीं.

पंजाब में कुल 19841 मतदान केंद्र बनाए गए थे. सोमवार को पंजाब के सरकारी कार्यालयों में सार्वजनिक छुट्टी घोषित थी. यहाँ करीब एक करोड़ 76 लाख मतदाता हैं जिन्होंने 1078 उम्मीदवारों की किस्मत का फ़ैसला किया है.

मुख्य मुकाबला सत्ताधारी अकाली दल-भाजपा गठबंधन और विपक्षी पार्टी कांग्रेस के बीच है लेकिन मनप्रीत बादल की अगुआई में तीसरा मोर्चा भी इस बार चुनौती दे रहा है.

अगर मुख्य उम्मीदवारों की बात करें तो कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और उनके बेटे रनिंदर सिंह चुनावी मैदान में थे.

वहीं मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल मुख़्तसर ज़िले में लांबी से मैदान में थे. जबकि उनके बेटे सुखबीर बादल जलालाबाद से खड़े हुए. लांबी के बादल गाँव में बादल परिवार के कई सदस्यों ने वोट डाली हालांकि मतभेदों के कारण सभी सदस्य अलग अलग पार्टियों से लड़ रहे हैं.

पीपीपी के नेता मनप्रीत बादल ने गिद्दड़बाहा और मौड़ से किस्मत आज़माई है. भाजपा की ओर से नवजोत सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर भी चुनाव लड़ रही हैं.

पूर्व ओलंपिक खिलाड़ी परगट सिंह ने भी इस बार जालंधर से चुनाव लड़ा है.

पिछले विधानसभा चुनाव में 76 फ़ीसदी मतदान हुआ था. 30 जनवरी को पड़ी वोटों की गिनती छह मार्च को होगी. तब तक उम्मीदवारों को अपनी किस्मत के फ़ैसले का इंतज़ार करना पड़ेगा.

उत्तराखंड

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption पंजाब में मतदान के लिए लोगों में ख़ासा उत्साह देखा जा सकता था

देहरादून से शालिनी जोशी ने बीबीसी को बताया कि दोपहर में लोगों की क़तारे लंबी होती गईं. सुबह उत्तराखंड के मैदानी इलाक़ो जैसे, हलद्वानी और कालाढूंगी में मतदाताओं की क़तारें तो नज़र आ रही थीं , किन पहाड़ी क्षेत्र नैनीताल में इक्का-दुक्का लोग ही मदतान केंद्रों पर पहुंचे थे.

नैनीताल से बीबीसी संवाददाता इक़बाल अहमद ने बताया है कि उत्तराखंड में कुमाऊं क्षेत्र के छह ज़िलों में चुनाव ख़त्म हो गए हैं. किसी भी इलाक़े से किसी अप्रिय घटना की कोई ख़बर नहीं है. मौसम भी बहुत सहावना था इसलिए लोगों में भारी उत्साह था.

नैनीताल ज़िले में छह विधानसभा सीटें हैं. इन सभी सीटों पर शांतिपूर्वक मतदान हुए. भीमताल विधानसभा सीट के हरीशताल मतदान केंद्र पर लोगों ने सड़क नहीं बनने के विरोध में चुनाव का बहिष्कार किया.

वहां लगभग 250 मतदाता थे लेकिन आख़िरी जानकारी के अनुसार केवल चार या पांच लोग ही वोट डालने आए थे.

हल्द्वानी, कालाढ़ूंगी और रूद्रपुर जैसे मैदानी इलाक़ों में सुबह से ही लंबी लाइन देखने को मिल रही थी जिनमें महिलाएं भी बड़ी संख्या में अपने मतों का प्रयोग करने के लिए घर से बाहर निकलीं थीं.

नैनीताल और भीमताल जैसे पर्वतीय सीटों में सुबह में मतदान केंद्रों पर बहुत कम लोग दिख रहे थे और कई मतदान केंद्रों पर घूमने के बाद भी एक-दो मतदाता ही नज़र आ रहे थे.

लेकिन 10-11 बजे के बाद से मतदान में तेज़ी आई और फिर दो बजे तक लगभग 45 फ़िसदी मतदान होने की ख़बरें आने लगीं. नैनीताल के विभिन्न मतदान केंद्रों पर घूमते हुए कई ऐसे युवा मतदाता भी दिखे जो पहली बार वोट डालने आए थे और उनमें काफ़ी उत्साह दिख रहा था.

लेकिन कई मतदान केंद्रों पर लोगों को निराशा भी हाथ लगी क्योंकि मतदाता सूची में उनके नाम नहीं थे और वो चुनाव अधिकारी से कहा-सुनी भी करते हुए नज़र आए.

राज्य के कुल 9, 744 मतदान केंद्रों में से 1,794 को संवेदनशील और 1,252 को अति संवेदनशील क़रार दिया गया था. राज्य में मुख्य मुक़ाबला सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच है.

संबंधित समाचार