कसाब ने फांसी के ख़िलाफ़ अपील दायर की

  • 31 जनवरी 2012
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Image caption कसाब मुंबई हमलो के एक मात्र जीवित अभियुक्त है.

मुंबई में 26 नवंबर के हमलों के दोषी करार दिए गए अजमल क़साब ने सुप्रीम कोर्ट में फांसी की सज़ा के ख़िलाफ़ अपील दायर की है.

24 वर्षीय अजमल आमिर कसाब ने कहा कि उनके मामले की ठीक से सुनवाई नहीं हुई है और अभियोजन पक्ष उनके ख़िलाफ़ लगे आरोपों को साबित करने में भी नाकाम रही है.

वर्ष 2008 में मुंबई में कई जगह हुए हमलों के बाद एकमात्र हमलावर के रुप में पकड़े गए अजमल आमिर क़साब को ‘बहुत से लोगों को मारने’ का दोषी क़रार दिया गया है.

इन हमलों में 165 लोग मारे गए थे जबकि 250 से अधिक घायल हुए थे.

सुनवाई ठीक नही

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त किए गए कसाब के वकील राजू रामचंद्रन ने कसाब की ओर से एक बयान पढ़ते हुए कहा, “मुझे दोषी क़रार दिया जाना ग़लत है. मुझे मेरी दलील पेश करने के लिए वकील नहीं दिया गया. अभियोजन पक्ष मेरे ख़िलाफ़ लगे आरोपों को साबित करने में नाकाम रहे हैं.”

अगर कसाब की इस अपील के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट अपना फ़ैसला सुनाती है, तो अजमल क़साब के पास राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से रहम की अपील करने का एक अवसर बचा रहेगा.

अभियोजन पक्ष के वकील उज्जवल निकम ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया कि कसाब फांसी की सज़ा सुनाई ही जानी चाहिए.

भारत में आमतौर पर कई फांसी के मामलों को आजीवन कारावास में बदल दिया गया है.

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