जन्मतिथि का विवाद सेना की वजह से: एंटनी

  • 31 जनवरी 2012
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Image caption रक्षा मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वह 10 मई, 1950 को ही जनरल सिंह की जन्मतिथि मानता है

सेना प्रमुख वीके सिंह की जन्मतिथि के विवाद के लिए रक्षा मंत्री एके एंटनी ने सेना को दोषी ठहराया है.

उनका कहना है कि मंगलवार को कहा कि ये विवाद पैदा ही इसलिए हुआ क्योंकि सेना पिछले 36 वर्षों से उनकी जन्मतिथि के दो रिकॉर्ड रखे रही.

उन्होंने कहा कि ये सेना और सरकार के बीच का विवाद नहीं है.

जनरल वीके सिंह इस विवाद पर सुप्रीम कोर्ट पहुँच गए हैं.

आधिकारिक रिकार्ड के अनुसार वीके सिंह की जन्म तिथि 10 मई 1950 है जबकि सिंह का कहना है कि दसवीं के सर्टिफिकेट के अनुसार उनकी जन्म तिथि 10 मई 1951 है.

एके एंटनी ने कहा, "पिछले 36 वर्षों से सेना के दो विभिन्न शाखाओं ने जनरल सिंह की जन्मतिथि के अलग-अलग रिकॉर्ड रखे इसकी वजह से ही ये विवाद हुआ."

उन्होंने इसे सेना और सरकार के बीच का विवाद मानने से इनकार किया और कहा कि इसमें सरकार का कोई दोष नहीं है क्योंकि ये ग़लती पहली बार वर्ष 2006 में सेना मुख्यालय की ही नज़र में आई थी.

मामला

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Image caption वीके सिंह कह रहे हैं कि वे अपने सम्मान के लिए अदालत गए हैं

लंबे समय से चल रहे विवाद के बाद जनरल वीके सिंह ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करके सेना के रिकॉर्ड में अपनी जन्मतिथि में सुधार करने की अपील की है.

दस्तावेज़ों के अनुसार जनरल वीके सिंह के मेट्रिक के प्रमाण पत्र में उनकी जन्म तिथि 10 मई, 1951 है लेकिन यूपीएससी के फ़ॉर्म में जिसके ज़रिए वे सेना में भर्ती हुए उनकी जन्मतिथि 10 मई, 1950 है.

रक्षा मंत्रालय ने अपनी एक रिपोर्ट में साफ़ कर दिया है कि वह जनरल सिंह की जन्मतिथि 10 मई, 1950 को ही प्रामाणिक मानता है.

मंत्रालय का कहना है कि इसी जन्मतिथि के आधार पर उन्हें पिछली पदोन्नतियाँ दी गई हैं.

इस लिहाज़ से सेनाध्यक्ष को मई, 2012 में सेवानिवृत्त होना पड़ेगा लेकिन यदि उनकी जन्मतिथि 10 मई, 1951 मान ली जाती है तो उनकी सेवानिवृत्ति वर्ष 2013 में होगी.

जनरल सिंह ने अदालत में 20 दस्तावेज़ पेश किए हैं जिसमें से 19 में उनकी जन्मतिथि 10 मई, 1951 दर्ज है.

जनरल सिंह का कहना है कि सवाल उनकी सेवानिवृत्ति का नहीं, उनकी 'विश्वनीयता और प्रतिष्ठा' है.

विपक्षी दलों ने भी इस बात को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया है कि सेना के सर्वोच्च पद पर आसीन एक अधिकारी को लेकर उसने विवाद को अदालत तक पहुँचने की नौबत ला दी है.

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