2जी के सभी लाइसेंस सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किए

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Image caption मामले के मुख्य अभियुक्त ए राजा कहते हैं कि जो कुछ भी उन्होंने किया वह प्रधानमंत्री की जानकारी में था

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के मामले में अहम फ़ैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 11 कंपनियों के सभी 122 लाइसेंसों को अवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया है.

स्पेक्ट्रम आवंटन में तत्कालीन वित्तमंत्री की भूमिका के सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत यह फ़ैसला करने में सक्षम है कि उनकी भूमिका की जाँच होनी चाहिए या नहीं.

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के मामले की सीबीआई जाँच पर निगरानी के लिए विशेष जाँच दल बनाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इसके लिए विशेष जाँच दल की ज़रुरत नहीं है लेकिन केंद्रीय सतर्कता आयोग इसकी निगरानी करेगी.

लाइसेंस आवंटन रद्द किए जाने से प्रभावित कंपनियां हैं - यूनीनॉर ( यूनिटेक औऱ नॉर्वे की यूनीनॉर की सांझा कंपनी), लूप टेलीकॉम, सिस्टेमा श्याम ( श्याम और रुस की सिस्टेमा की सांझा कंपनी), एतिसलात डीबी ( स्वान और यूएई की एतिसलात की सांझा कंपनी), एस-टेल, वीडियोकॉन, टाटा और आईडिया.

जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी, सुपरिचित वकील प्रशांत भूषण की अलग-अलग याचिकाओं और एक स्वयंसेवी संगठन की याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ये फ़ैसला सुनाया है.

'दोबारा आवंटन के लिए ट्राई देगा सुझाव'

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने तीन टेलीकॉम कंपनियों पर पांच-पांच करोड़ रूपए का जुर्माना लगाया है.

कोर्ट ने टेलीकॉम नियामक प्राधिकरण (ट्राई) को 2जी लाइसेंसों के दोबारा जारी किए जाने के तरीक़ों पर सुझाव देने को कहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को कहा है कि एक महीने के भीतर ट्राई के सुझावों पर काम करे. साथ ही कोर्ट का आदेश है कि चार महीनों के भीतर निलामी के जरिए स्पेक्ट्रम आवंटित किए जाए.

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए याचिकाओं में आरोप लगाए गए थे कि 2जी स्पेक्ट्रम के आवंटन में व्यापक पैमाने पर घोटाला हुआ था क्योंकि बाज़ार दर पर नीलामी की जगह 'पहले आओ पहले पाओ' के आधार पर स्पेक्ट्रम आवंटन किया गया.

अंकेक्षक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि स्पेक्ट्रम की नीलामी न करने से सरकार को 1.76 लाख करोड़ के राजस्व का नुक़सान हुआ.

सरकार इसे घोटाला मानने से इनकार करती रही है और कहती है कि जो कुछ भी हुआ वह नीति और नियमानुसार हुआ है.

हालांकि इस मामले की जाँच कर रहे केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने आरंभिक साक्ष्यों के आधार पर आवंटन के समय संचार मंत्री रहे ए राजा को मुख्य अभियुक्त बनाया है.

इस मामले में डीएमके की सांसद कनिमोड़ी और कई कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों को अभियुक्त बनाया गया है.

ए राजा इस मामले में अभी भी तिहाड़ जेल में हैं.

फ़ैसले से खुशी: स्वामी

गुरुवार के फ़ैसले पर खुशी जताते हुए याचिकाकर्ता सुब्रह्मणयन स्वामी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट पर देश की जनता को गर्व होना चाहिए.

Image caption सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि अब वे ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले का इंतज़ार करेंगे

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पी चिदंबरम की भूमिका की जाँच के आदेश नहीं दिए हैं लेकिन इसे विशेष अदालत पर छोड़ने के फ़ैसले पर भी सुब्रमण्यम स्वामी ने संतोष जताया है.

उन्होंने कहा, ''सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला दिया है कि पी चिदंबरम को 2जी मामले में अभियुक्त बनाया जाए या नहीं इस पर फ़ैसला ट्रायल कोर्ट को करना है. सीबीआई चिदंबरम के खिलाफ़ जांच करने के लिए स्वतंत्र है.''

स्वामी ने पत्रकारों को संबंधित करते हुए कहा, ''सुप्रीम कोर्ट का ये फ़ैसला सबसे सही है. ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से लाइसेंस बांटे गए, ये सरकार की सामूहिक असफलता है. शेयर बाज़ार में टेलीकॉम कंपनियों के स्टॉकों में गिरावट आ सकती है लेकिन इस बात से किसी को चिंता नहीं करनी चाहिए क्योंकि ये कंपनिया पहले ही काफ़ी लाभ कमा चुकी है.''

प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को एक ऐतिहासिक फ़ैसला बताया है.

प्रशांत भूषण ने कहा, ''ये एक ऐतिहासिक फ़ैसला है और इससे भ्रष्ट सरकारी तंत्र और कॉर्पोरेट्स को कड़ा संदेश जाएगा.''

सरकार का तर्क

केंद्र सरकार का तर्क है कि स्पेक्ट्रम की क़ीमतें तय करने या लाइसेंस के आवंटन में सरकार की कोई भूमिका नहीं थी.

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Image caption ए राजा के बाद कपिल सिब्बल संचार मंत्री बने तो उन्होंने कहा था कि सरकार को कोई राजस्व घाटा नहीं हुआ

उसने वही किया जो नीति और नियमों के अनुरुप था. इसके लिए सरकार 1994 की संचार नीति का हवाला देती है और कहती है कि उस नीति में नीलामी का प्रावधान ही नहीं था.

केंद्र सरकार ने पी चिदंबरम का बचाव करते हुए अदालत में कहा है कि तत्कालीन संचार मंत्री एक राजा ने टेलीकॉम कमीशन की उस अहम बैठक को नौ जनवरी, 2008 से 15 जनवरी, 2008 तक टाला था जिसमें नीलामी को लेकर अहम फ़ैसला होना था.

केंद्र का कहना है कि लेकिन इस बीच कंपनियों को आवंटन के पत्र 10 जनवरी, 2008 को ए राजा ने जारी कर दिए तो चिदंबरम को दोषी कैसे ठहराया जा सकता है.

सरकार का ये भी तर्क रहा है कि हालांकि वित्त मंत्रालय चाहता तो आवंटन को रद्द कर सकता था लेकिन ये एक बड़ा नीतिगत मसला था और इसमें क़ानूनी अड़चनों का अंबार आ जाता इसलिए ऐसा नहीं किया गया.

केंद्र सरकार कहती रही है कि इसलिए सिर्फ़ नीलामी न होने को आधार बनाकर लाइसेंस और आवंटन रद्द नहीं किए जा सकते.

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