पंजाब की एक तस्वीर ये भी..

  • 3 फरवरी 2012

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<span >लोगों में इनदिनों हर ओर फ़िल्म अग्निपथ का चर्चा है जो ब्लॉकबस्टर साबित हो रही है..चुनावों का सामना कर रहे भारत के कई राजनेताओं के लिए इनदिनों डगर किसी अग्निपथ से कम नहीं है. चुनावी रिपोर्टिंग के दौरान इसी डगर पर नेताओं के साथ चलने का मौका पिछले दिनों मिला.

<span >पाँच साल में एक बार होने वाले इन चुनावों की रिपोर्टिंग का अनुभव पत्रकारों के लिए भी अलग ही होता है. इस बार पंजाब में आकर चुनावी रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला.और इसका आगाज़ भी काफ़ी अनूठे अंदाज़ में हुआ.

<span >पहले भी एक चुनावी डायरी में मैने ज़िक्र किया था कैसे पंजाब पहुँचकर पहला दिन खेत-खलिहानों में बिताने के बाद रात को रहने के लिए होटल नहीं मिला था....और शादी के लिए बुक एक रिज़ॉर्ट में रहना पड़ा. शादी के पंडाल से करैक्टर ढीला और चिकनी चमेली जैसे गीत बज रहे थे और मैं कुर्सी मेज़ पर बैठकर सियासी रिपोर्टें लिख रही थी. मैरिज पैलेस में समझो बिन बुलाए बाराती की तरह थी मैं.

<span >ख़ैर पंजाब में चुनावी पत्रकारिता करने के साथ-साथ ये मेरे लिए मौका था पाज आबों वाली धरती पंजाब को फिर से करीब से देखने-समझने का....मैं देखना चाहती थी कि कैसा है आज का पंजाब. दरअसल पंजाब को लेकर आमतौर पर लोगों के मन में एक बंधी-बंधाई छवि रहती है...

<span >कड़वा सच

<span >लोग पंजाब की वही छवि देखते हैं जो टीवी पर ख़ासतौर पर बॉलीवुड में दिखाई जाती है....साग और मक्के दी रोटी, रंगीला, ख़ुशहाल और मस्तमौला पंजाब, लोगों में प्यार मोहब्बत ऐसी की पूछिए मत....सरसों के खेत में खड़े होकर लगता है कि मानो यश चोपड़ा के किसी फ़िल्मी सेट से कोई शाहरुख़ खान लहराता हुए आएगा और दुल्हनिया ले जाएगा.....

<span >पर क्या केवल यही पंजाब की सच है...शहरों और बड़े किसानों के यहाँ जाओ तो इस तस्वीर में कुछ भी ग़लत नहीं लगता. लेकिन मीडिया और फ़िल्मों में दिखाया जाने वाला ये पंजाब एक सुंदर सपना है जो गाँवों-कस्बों में जाकर दुस्वप्न में बदल जाता है. जहाँ कर्ज़े में डूबा किसान है जो पूरे देश के लिए अन्न उगाता है पर अपना पेट नहीं भर पा रहा है. जहाँ का युवा नशाखोरी में अपनी जवानी लुटा रहा है..मज़दूर मजबूर है...

<span >पर पंजाब का ये सच कोई नहीं दिखाता. दिखाएगा भी कौन....पार्टियों के.नेताजी अगर ये तस्वीर दिखाएँगे तो शायद उनकी ही किरकिरी होगी..

<span >और फ़िल्मों में तो अकसर सपने बेचे जाते हैं और ये तस्वीर तो किसी बुरे सपने की तरह है.

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