अदालत के फ़ैसले के मुख्य बिंदु

गुरूवार को सुप्रीम कोर्ट ने 2जी स्पैक्ट्रम के लिए जारी किए गए 122 लाइसेंस रद्द कर दिए. इस ऐतिहासिक अदालती फ़ैसले के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी और तल्ख़ हो गई है.

विपक्ष के तेवर तीख़े हो गए हैं तो उधर सरकार की ओर से कपिल सिब्बल ने कहा है कि ये फ़ैसला सरकार के ख़िलाफ़ नहीं है. नज़र डालते हैं सुप्रीम कोर्ट फ़ैसले के मुख्य बिंदुओं पर -

****लाइसेंस का आवंटन एकपक्षीय, स्वेच्छाचारी, अवैध, असंवैधानिक और जनहित के विपरीत, समानता के सिद्धांत का उल्लंघन है.

****ट्राई ( टेलिकॉम क्षेत्र का विनियामक संस्था) ने 2जी स्पैक्ट्रम के दामों पर सुझाव देने के लिए एकतरफ़ा रवैया अपनाया

****सरकार के इस तर्क को ख़ारिज किया कि नीतिगत मामलों की न्यायिक समीक्षा नहीं हो सकती

****ए राजा ने क़ानून मंत्री और प्रधानमंत्री की सलाह को नहीं माना

****एतिसलात डीबी टेलिकॉम प्राइवेट लिमिटेड (स्वान टेलीकॉम लिमिटेड ), यूनिटेक वायरलेस ग्रुप और टाटा टेलिसर्विज़ लिमिटेड पर पांच-पांच करोड़ का जुर्माना

****लूप टेलिकॉम, एस-टेल, एलांयज़ इन्फ़्राटेक और सिस्टेमा श्याम टेली सर्विसेज़ लिमिटेड पर पचास-पचास लाख का जुर्माना

****इस धन का आधा हिस्सा सुप्रीम कोर्ट लीग सर्विसज़ कमेटी को और आधा प्रधानमंत्री राहत कोष को जाएगा.

****2जी स्पैक्ट्रम की नीलामी से देश को लाभ हो सकता था

****लेटर ऑफ़ इंटेंट जारी करने की प्रक्रिया को स्टेज मैनेज किया गया, क्योंकि शुरूआत में अप्लाई करने वालों को प्राथमिकता सूची में नीचे धकेल दिया गया.

****लाइसेंस चार महीने बाद निरस्त हो जाएंगे

****ट्राई 2जी स्पैक्ट्रम के आवंटन के लिए एक नए सिरे से सिफ़ारिश करेगा

****सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसियां और सीबीआई की विशेष अदालत के फ़ैसले से प्रभावित ना हों.

****अदालत ने साल 2008 में ए राजा के अलावा जारी किए गए लाइसेंसों को रद्द करने से इंकार किया

****अदालत ने सुझाव दिया कि अवैधता से बचने के लिए सरकार राष्ट्रीय संसाधनों की नीलामी का रास्ता अपनाए.