इसरो: एंट्रिक्स-देवास क़रार में पाई गईं कई खामियां

 रविवार, 5 फ़रवरी, 2012 को 09:09 IST तक के समाचार

जिस समय देवास और एंट्रिक्स के बीच ये समझौता हुआ था, तब माधवन नायर इसरो के अध्यक्ष थे.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने एंट्रिक्स और देवास के बीच साल 2005 में हुए क़रार से संबंधित जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक की है. रिपोर्ट के मुताबिक इस क़रार के लिए अपनाई गई ‘प्रक्रिया में कई खामियां’ पाई गईं हैं.

समाचार एजडेंसी पीटीआई के मुताबिक इस रिपोर्ट में कहा गया है कि एंट्रिक्स और देवास के बीच हुए क़रार में पारदर्शिता नहीं रखी गई और इसरो के पूर्व प्रमुख जी माधवन नायर सहित तीन अन्य वैज्ञानिकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जानी चाहिए.

एंट्रिक्स इसरो की व्यावसायिक इकाई है और देवास एक निजी कंपनी.

पिछले साल 31 मई को प्रधानमंत्री ने पूर्व केंद्रिय सतर्कता कमिश्नर प्रत्युश सिन्हा की अगुवाई में एक पांच-सदस्सीय टीम का गठन किया था जिसने एंट्रिक्स और देवास के बीच हुए समझौते की बारीकियों की पड़ताल की थी.

इस क़रार से जुड़े विवाद में कड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने पूर्व इसरो अध्यक्ष जी माधवन नायर और तीन अन्य जाने-माने वैज्ञानिकों पर भविष्य में किसी भी प्रकार का सरकारी पद संभालने पर रोक लगा दी है.

‘कपटपूर्ण कार्रवाई की'

नायर पर आरोप है कि उन्होंने देवास नाम की एक निजी कंपनी को बिना प्रक्रिया पूरा किए ठेका दे दिया. नायर के अलावा, इसरो के पूर्व वैज्ञानिक सचिव के. भास्करनारायण, एंटरिक्स के पूर्व प्रबंध निदेशक केआर श्री धर्ममूर्ति और इसरो अंतरिक्ष केंद्र के पूर्व निदेशक केएन शंकर को अंतरिक्ष विभाग को इस मामले में दंडित किया है.

रिपोर्ट में नामजद सभी वैज्ञानिक सेवानिवृत्त हो चुके हैं.

इसरो की ओर से इस जांच रिपोर्ट के कुछ अंश जारी किए गए हैं जिनके मुताबिक इस क़रार में न सिर्फ़ प्रशासनिक खा़मियां रही हैं बल्कि इससे जुड़े कुछ लोगों ने ‘कपटपूर्ण कार्रवाई’ भी की.

रिपोर्ट के मुताबिक यह क़रार कई मायनों में संगठन के हितों के विपरीत था लेकिन इसके बावजूद इसे स्वीकृति दी गई.

जिस समय देवास और एंट्रिक्स के बीच ये समझौता हुआ था, तब माधवन नायर इसरो के अध्यक्ष थे.

चाँद पर भारत के पहला मानवरहित अभियान, चंद्रयान-1 की सफलता के पीछे माधवन नायर का योगदान काफ़ी चर्चा में रहा था.

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