'आरामख़ोरी' करने वाले अधिकारी रहें सावधान !

नॉर्थ ब्लॉक
Image caption भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों के बाद लाए गए नए क़ानून को प्रशासनिक सुधार के लिए सरकार की पहल के रुप में देखी जा रही है

सिविल सेवा अधिकारियों के रवैये और काम काज में ढिलाई से अगर आप है परेशान तो फिर केन्द्र सरकार का नया फ़रमान आपके लिए राहत लाने वाला है.

केन्द्र ने नए नियम जारी करते हुए राज्य सरकारों को ये अधिकार दिया है कि काम नहीं करने वाले और दफ्तर में 15 साल पूरा कर चुके भारतीय सिविल सेवा अधिकारियों को सरकार ''जनहित'' में सेवानिवृत्त कर सकती है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार राज्य सरकारों से काफ़ी समय तक विचार विमर्श करने के बाद कार्मिक लोक शिकायत और ट्रेनिंग विभाग ने पिछले सप्ताह ये नियम जारी किए.

नए नियमों के मुताबिक़ सिविल सेवा में 15 साल पूरे करने के बाद अधिकारियों की समीक्षा की जाएगी. समीक्षा में इन अधिकारियों के कामकाज में कमी पाए जाने के बाद केन्द्र और राज्य सरकारें उन्हे जनहित में हटाए जाने पर फ़ैसला कर सकती है.

काम-काज की समीक्षा

अधिकारियों के 50 साल की आयु या 25 साल की सर्विस पूरी करने पर उनकी दोबारा समीक्षा की जा सकती है.

हालांकि नियमों के अनुसार सेवानिवृत्त होने के लिए कहे गए अधिकारियों को तीन महीने का नोटिस या सैलरी और भत्ता दिया जाना ज़रुरी है.

इसके लिए विभाग ने 31 जनवरी को एक अधिसूचना जारी कर क़ानून में बदलाव किए है.

इससे पहले के क़ानून के अनुसार केन्द्र सरकार के अधिकारियों को 30 साल की सेवा के बाद ही सेवानिवृत्ति दी जा सकती थी.

पीटीआई के हवाले से विभाग के एक अधिकारी ने कहा, ''नए नियम राज्य सरकारों और अन्य महत्वपूर्ण अंगों के साथ विचार विमर्श के बाद बनाए गए है. इससे सरकार को काम नहीं करने वाले सिविल सेवा अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाने में मदद मिलेगी.''

सिविल सेवा के अन्य अंगों के अलावा नए क़ानून भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस), भारतीय प्रशासनिक सेवा(आईएएस) और भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) पर भी लागू होंगे.

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