'एक ही ज़िंदगी में मर्द भी औरत भी'

  • 10 फरवरी 2012

निक्की चावला को अगर आप देखेंगे तो आपको लगेगा कि ये एक आम महिला है, जो सुंदर है और आत्मविश्वास से भरी हुई है.

लेकिन दिलचस्प बात ये है कि वो पैदायशी तौर पर एक महिला नहीं रही हैं बल्कि उन्हें इसके लिए परिवार और समाज से लड़ना पड़ा और सर्जरी का सहारा भी लेना पड़ा.

निक्की जल्द ही एक तेलुगू फ़िल्म में महिला डॉन का किरदार निभाती हुई दिखाई देगीं. वो एक मॉडल भी हैं.

पुरूष से महिला बनने का सफ़र निक्की के लिए इतना आसान नहीं रहा. ढेर सारी परेशानियों के बावजूद भी निक्की मानती हैं कि वो ख़ुशनसीब हैं कि उन्हें एक ही ज़िंदगी में मर्द और औरत दोनों का जीवन जीने का मौका मिला.

बीबीसी से ख़ास बात करते हुए निक्की चावला ने कहा, "अगर मैं अपनी ज़िंदगी को देखूं तो कह सकती हूं कि मुझ पर भगवान की ख़ास कृपा रही है उन्होंने मुझे ऐसा पैदा किया है. मुझे कोई शिकायत नहीं है. मैं आम पुरुष या महिला से अपने आप को दस गुना बेहतर समझती हूं क्योंकि ख़ुदा ने मुझे वो चांस दिया कि एक जन्म में दो दो ज़िंदगी जी सकूं."

निक्की कहती हैं, "मैं शुक्रगुज़ार हूं कि भगवान ने मुझे ये मौका बक़्शा लेकिन मैं ये नहीं कहूंगी कि अगले जन्म में भी भगवान मुझे ऐसा ही बनाए. असल में मैं नहीं चाहती कि मुझे कोई दूसरा जन्म मिले क्योंकि मैं अपनी ज़िंदगी से बहुत खुश हूं."

निक्की अपने बचपन के बारे में बताते हुए कहती हैं, "जब मैं पैदा हुई तो मेरी माँ चाहती थी कि उन्हें एक लड़की पैदा हो, तो मेरी माँ मुझे लड़की के कपड़े पहनाती थी, मेकअप करती थी और डांस मुकाबलों में भेजती थी. लोग मुझे शहर की माधुरी बुलाने लगे थे और इस तरह मुझ पर लड़की का रंग सा चढ़ता चला गया."

स्कूल में भी निक्की को तानों का सामना करना पड़ता. निक्की कहती हैं कि 12 साल की उम्र से 16 साल की उम्र तक का समय उनके लिए सबसे बुरा रहा क्योंकि उन्हें हर समय डरकर जीना पड़ता था.

जब पहली बार उन्होंने अपने परिवार को अपनी सोच के बारे में बताया तो परिवार समझने के लिए राज़ी ही नहीं हुआ और उनकी पिटाई भी हुई.

लेकिन बारहवीं के बाद निक्की ने अपना घर छोड़ दिया और दिल्ली आ गईं. इसके बाद उनका मर्द से औरत बनने का संघर्ष शुरु हुआ.

दिल्ली में निक्की एक गे पार्टी में गईं जहाँ उन्होंने पाया कि वो एक गे नहीं बल्कि एक महिला बनना चाहती है. निक्की कहती हैं, "उस पार्टी में मैंने पाया कि मुझे आर या पार की ज़िंदगी चाहिए. मैं बीच में लटककर नहीं रह सकती."

इसके बाद निक्की ने डॉक्टरों से मिलकर ये फ़ैसला किया कि उन्हें ‘सेक्स रिअसाइन मेंट सर्जरी’ यानी लिंग परिवर्तन कराना है.

इसके लिए निक्की को ज़रूरत थी पैसों की और पैसों के लिए निक्की ने किन्नरों के एक समूह में शामिल हो गईं. वो कहती हैं, "मैंने एक महीने लगातार किन्नरों के साथ शादियों में बधाई मांगी.वो लोग तालियां बजाकर बधाई मांगते और मैं डीजे पर नाचती थी. इस एक महीने में मैंने ढ़ाई लाख रूपये कमाए."

इतना पैसा मिलने के बाद निक्की ने पैसे जोड़ना शुरू किया और अपने इलाज़ को आगे बढ़ाया.

लेकिन जहां निक्की का दिल्ली में ये संघर्ष चल रहा था वहीं पंजाब में उनके लिए लड़कियों के रिश्ते आ रहे थे.

निक्की चावला कहती हैं," लड़के के रूप में मेरा फोटो देखकर मेरे लिए रिश्ता आया था. लेकिन मैंने अपनी माँ को बोल दिया था कि मैं आपके दबाव में शादी कर भी लूं बच्चे हो भी जाएं लेकिन मैं किसी लड़की की ज़िंदगी ख़राब नहीं कर सकती. मैने अपनी माँ को कहा कि औरत सिर्फ सेक्स नहीं चाहती. भावनात्मक लगाव भी चाहती है. मैं वो उसे कहां से दूंगी."

संघर्ष के दौरान निक्की ने एक हेयर सैलॉन में काम किया. और बाद में एयर होस्टेस ट्रेनिंग सेंटर में पर्सनेलिटी डेवलपर के तौर काम किया.

सर्जरी करवाने के लिए निक्की तैयार थीं लेकिन वो चाहती थीं कि ये सब मां-बाप की सहमति मिलने के बाद हो और आख़िरकार उन्हें अपने परिवार से इसकी मंज़ूरी मिल भी गई.

सर्जरी के बाद पहली बार अपने आप को शीशे में देख निक्की को कैसा लगा. उन्होंने कहा, "जब मैंने पहली बार अपने आप को देखा तो लगा कि मैं जो चाहती थी मैंने हासिल कर लिया. जिस चीज़ के लिए मैंने संघर्ष किया था वो मैंने हासिल कर ली." इसके बाद निक्की को एक पार्टी में रैंप पर चलने का मौका भी मिला.

निक्की रैंप पर चली तो ग्लैमर दुनिया में आने की चाहत भी ज़ोर पकड़ने लगी. निक्की टीवी के कुछ कार्यक्रमों में दिखाई दीं और जल्द ही वो एक तेलुगू फ़िल्म में एक महिला डॉन का किरदार निभाती दिखाई देंगी.

निक्की कहती हैं कि फ़िलहाल वो किसी रिश्ते में नहीं हैं. उनके मुताबिक़, “भारतीय समाज ट्रांस गर्ल्स के प्रति उदार नहीं है. तो कोई फ़ायदा नहीं है अपना दिल दुखाने का. अच्छा तो ये है कि अपनी ज़िंदगी जारी रखो. अगर भगवान ने मेरी किस्मत में मेरे लिए कुछ लिखा होगा तो मिल जाएगा."

ऐसा नहीं है कि लड़के निक्की की ओर आकर्षित नहीं होते. निक्की कहती हैं, "बहुत से लड़के मुझसे मिलते हैं, जिनको मेरे बीते समय के बारे में नहीं पता है. उन्हें लगता है कि निक्की बहुत सुंदर है, अच्छी लड़की है, स्वभाव बहुत अच्छा है, वो मेरे प्यार में पड़ जाते हैं. लेकिन जब मुझे लगता है कि वो असल में मुझसे प्यार करने लगे हैं तो मैं उन्हें अपने बीते समय के बारे में बता देती हूं ताकि वो बाद में ये ना सोचे कि निक्की ने मेरे साथ धोखा किया है. जब मैं उनको अपने बारे में बताती हूं तो उनका नज़रिया ही बदल जाता है." निक्की भविष्य में महिलाओं के अधिकारों के लिए एक एनजीओ खोलना चाहती हैं और वो अपनी एक किताब लिखना चाहती हैं जिसमें अपने संघर्ष की कहानी का ब्यौरा देना चाहती हैं.

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