सेना प्रमुख ने अर्ज़ी वापस ली, अदालत में मामला ख़त्म

  • 10 फरवरी 2012
जनरल वीके सिंह इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption जनरल सिंह ने कहा कि वे अपने आत्मसम्मान के लिए अदालत जा रहे हैं

सुप्रीम कोर्ट में भारतीय सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह की उम्र का मामला ख़त्म हो गया है.

अपनी जन्म तिथि से जुड़े विवाद में सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने अपनी अर्ज़ी वापस ले ली है. ऐसा उन्होंने उस समय किया जब सुप्रीम कोर्ट नें मामले में हस्तक्षेप करने के इनकार कर दिया. अदालत ने उन्हें अपनी अर्ज़ी वापस लेने का मौका दिया था.

इससे पहले केंद्र सरकार ने भी क़दम पीछे खींचते हुए अपने 30 दिसंबर के उस आदेश को वापस लिया था जिसके तहत वीके सिंह की उस अपील को रद्द किया गया था जिसमें उन्होंने अपनी जन्म तिथि को 10 मई 1950 की बजाए 10 मई, 1951 मानने के लिए कहा था.

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील केटीएस तुलसी ने कहा, ''नौकरी के इतने सालों के बाद आने वाले उम्र के अधिकतर विवादों में सुप्रीम कोर्ट या कोई अदालत ज़्यादा महत्व नहीं देती. इस मामले में भी ऐसा ही हुआ. हालांकि अटॉर्नी जनरल ने यह अवश्य कहा कि सरकार को सेना प्रमुख पर पूरा भरोसा है लेकिन यह तो सरकार पहले ही कह रही थी.''

'निष्ठा और ईमानदारी'

अपनी याचिका में जनरल वीके सिंह का कहना था कि उनकी जन्म की तारीख़ 10 मई 1950 की बजाए 10 मई,1951 मानी जाए. उन्होंने इसके पक्ष में कई दस्तावेज़ भी पेश किए थे.

लेकिन सरकार के दस्तावेज़ों में उनकी जन्म की तारीख़ 10 मई 1950 दर्ज थी, जिसके आधार पर इस साल मई में उन्हें सेवानिवृत करने की तैयारी चल रही थी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करने को तैयार नहीं है हालांकि उनकी निष्ठा और ईमानदारी पर कोई संदेह नहीं है.

अदालत ने कहा कि अगर वह चाहें तो अपनी याचिका वापिस ले सकते हैं तो वीके सिंह के वकील ने ऐसा ही किया.

सरकार ने एक क़दम वापस खींचा

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में बहस शुरु होने के कुछ ही देर बाद सरकारी पक्ष ने जानकारी दी कि 30 दिसंबर को जनरल सिंह की उम्र को लेकर सरकार ने जो आदेश जारी किया था, उसे वापिस ले लिया गया है.

इससे पहले की सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार के तरीक़े और निर्णय प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े किए थे.

अदालत का कहना था कि इस आदेश को रद्द किया जा सकता है अगर सरकार इसे वापिस नहीं लेगी.

इसके बाद सरकार की ओर से जवाब पेश करने के लिए अटॉर्नी जनरल जीई वाहनवती ने शुक्रवार तक का समय लिया था. उन्होंने कहा कि सरकार अपने 21 और 22 जुलाई के आदेशों पर क़ायम है जिसमें जनरल सिंह की अपील को ख़ारिज किया गया था.

ग़ौरतलब है कि उम्र विवाद से नाराज़ सेना प्रमुख ने सरकार के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

यह पहला मौक़ा था जब देश के किसी सेनाध्यक्ष ने सरकार के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.

संबंधित समाचार