बनारस के कर्मकांडी बाबाओं की दिलचस्प मांग

बनारस के पंडित

दूसरे काम-धंधे वालों की तरह काशी के कर्मकांडी पंडों की मांग है कि उत्तर प्रदेश की अगली सरकार बाक़ी सेवाओं और सामग्रियों की तरह उनकी सेवाओं के भी नून्यतम दाम तय करे.

काशी में पूजा-पाठ कर्मकांड कराने वाले रत्नाकर पांडेय का कहना है, "पूजा-पाठ के दाम तय होने चाहिए. लोग 10 लाख की शादी करते हैं लेकिन मंडप में बैठ कर कहते हैं कि पंडित जी 11 रुपए 21 रुपए का पुराना रिवाज़ है. अरे पहले के 11 रुपए आज के 200 रुपयों के बराबर होते थे."

उनकी ही तरह एक दूसरे आचार्य ने बीबीसी बात करते हुए पांडेय की बात का समर्थन किया.

उन्होंने कहा, "ब्राह्मण पूजा-पाठ करते वक़्त कुछ खा-पी नहीं सकते. केवल फलाहार करते हैं लेकिन केले और सेब के भाव बढ़ गए हैं. उस पर से घर गृहस्थी के ख़र्च तो हैं ही."

एक अन्य पंडित रघुवंश कुमार द्विवेदी ने कहा, "लोग कहता सुन कर 21 रुपयों की दक्षिणा देते हैं. अभिषेक के बाद 100 रुपए देते हैं. नियम बने कि कम से कम 101 कथा सुनाने के मिले और अभिषेक के 251."

एक अन्य युवा पंडित सर्वेश मिश्र का कहना है कि खेतिहर मज़दूरों के लिए नयूनतम मज़दूरी तय है लेकिन ब्राह्मण के लिए नहीं. एक मज़दूर और कुली की ही तरह वे भी मेहनत करते हैं, तो उनके श्रम का कोई सही मूल्य क्यों नहीं तय होता. दिहाड़ी मान कर ही कर दें.

अन्य मांगें

एक दूसरे पंडित प्रभाकर शास्त्री ने कहा कि सरकार को किसी तरह से पंडितों की सेवाओं के मानकीकरण के लिए भी काम करना चाहिए.

शास्त्री बोले, "आज कल कोई भी आदमी बोर्ड लगा कर बैठा जाता है कि वो महान प्रकांड पंडित है, ज्योतिषी है. नई सरकार को चाहिए कि वो प्रमाणपत्र दे कि कौन पंडित किस काबिल है ताकि आदमी सर्टिफिकेट देख पूजा करे, सेवाएं ले."

इसी तरह एक दूसरे आचार्य दिवाकर पांडेय राज्य की बहुजन सामाज पार्टी से नाराज़ दिखे कहा. पांडेय बनारस की संस्कृत पाठशालाओं की बदहाली से नाराज़ हैं और वो मानते हैं कि इसकी वजह से नए अच्छे पंडित नहीं आ रहे हैं. वो मानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी शायद इस दिशा में ध्यान दे.

यूँ तो पंडित जवाहर लाल नेहरु से लेकर अटल बिहारी वाजपयी तक और पंडित गोविंद वल्लभ पंत से लेकर मुरली मनोहर जोशी तक लगभग हर पार्टी में उत्तर प्रदेश के ब्राह्मण नेताओं की तूती बोलती रही है.

मायावती एक अपवाद थीं लेकिन उनके के दौर में भी उनके कई ब्राह्मण मंत्री, विधायक, सांसद उनकी पार्टी में थे.

यह महज़ इत्तेफाक नहीं था कि मुरली मनोहर जोशी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता उत्तर प्रदेश से लड़े. कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी भी ब्राह्मण हैं.

उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनावों में कानपुर से लेकर गोरखपुर तक ऐसी 80-90 सीटें हैं, जहाँ ब्राह्मण मतदाता निर्णय को प्रभावित करने की क्षमता रखता है.

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