सुना कि बिहार में फ्रीडम ऑफ प्रेस नहीं: काटजू

  • 24 फरवरी 2012
Image caption पटना विश्वविद्यालय के व्हीलर सीनेट हॉल का माहौल जस्टिस काटजू की खरी खरी टिप्पणियों से देर तक गर्माया रहा

भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने कहा है कि बिहार में सत्ता पक्ष द्वारा प्रेस की स्वतंत्रता के विरुद्ध रवैया अपनाने की शिकायतें मिल रही हैं.

पटना विश्वविद्यालय के एक समारोह में एक विशेष व्याख्यान में उन्होंने ये भी कहा कि ऐसी शिकायतों की जांच कराई जाएगी और मामला सही पाया गया तो संविधान के खिलाफ काम करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.

जस्टिस काटजू ने कहा, ''बिहार के बारे में कुछ कहना चाहूंगा. मैंने सुना है कि लालू राज की तुलना में इस सरकार ने कानून व्यवस्था को सुधारा है. पर दूसरी बात मैंने ये भी सुनी है कि लालू के राज में फ्रीडम ऑफ प्रेस होती थी, लेकिन अब यहां फ्रीडम ऑफ प्रेस नहीं है.

उन्होंने कहा, ''सुना है कि परोक्ष रूप में ये हो रहा है कि अगर किसी पत्रकार ने सरकार के मंत्री या अधिकारी के खिलाफ कुछ लिख-बोल दिया तो फिर आपकी नौकरी गई या अखबार मालिक आपका पटना से बाहर कहीं तबादला कर देगा.''

मच गया हंगामा

Image caption पटना कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर लालकेश्वर प्रसाद ने काटजू के बयान पर आपत्ति जताई

जस्टिस काटजू के इस बयान पर आपत्ति जाहिर करने के लिए पटना कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर लालकेश्वर प्रसाद ने जोर से चिल्लाकर कहा कि ये गलत है.

वे कुछ और भी बोलने लगे कि इतने में पूरे सभागार में हंगामा मच गया. सारे लोग लालकेश्वर प्रसाद पर ये कहते हुए टूट पड़े कि ये सरकार के दलाल हैं.

दरअसल प्रसाद की पत्नी ऊषा सिन्हा जनता दल यूनाईटेड की विधायक हैं. ये दोनों ही मुख्यमंत्री के गृह जिले नालंदा के रहने वाले हैं और उनके स्वजातीय भी हैं.

अपने भाषण के बीच में हुई इस रुकावट से बेहद नाराज जस्टिस काटजू ने कहना शुरु किया, ''ये क्या तरीका है, किसी को शोर मचाकर हड़काना. आप मुझे हड़का नहीं सकते हैं. गलत आदमी से आपने पंगा ले लिया है۔''

उन्होंने कहा, ''ये तो आप सिद्ध कर रहे हैं कि मैं जो कह रहा हूं, बिल्कुल सही है. कई तरीके हो सकते हैं दबाव के जैसे सरकारी विज्ञापन बंद कर दो और अखबार मालिक पर दबाव डालो कि सरकार के खिलाफ लिखने वाले पत्रकार को निकाल दिया जाए.''

'बिल्कुल सही कहा'

Image caption सभागार में मौजूद लोगों ने काटजू से अपना भाषण जारी रखने का अनुरोध किया

इसके बाद सभागार में मौजूद अधिकांश लोग काटजू के पास जाकर अनुरोध करने लगे कि आपने जो कहा है, बिल्कुल सही है, बिहार में प्रेस की आजादी खतरे में है, इसलिए आप अपना भाषण जारी रखें.

पटना विश्वविद्यालय के व्हीलर सीनेट हॉल का माहौल देर तक गर्माया रहा और जस्टिस काटजू ने और भी कई मसलों पर खरी-खरी टिप्पणियां की.

उन्होंने कहा कि भारत के नब्बे प्रतिशत लोग पिछड़ी मानसिकता के हैं क्योंकि जातिवाद और अंधविश्वास उनमें भरा हुआ है.

उन्होंने ये भी कहा कि टीवी चैनलों से लेकर सिनेमा तक सभी इसी प्रयास में लगे रहते हैं कि लोगों को अपनी मूल समस्या के बारे में सोचने और उस पर प्रतिक्रिया करने का अवसर ही न मिले.

उन्होंने कहा कि गरीब लोग अपने खिलाफ हो रहे आपराधिक अन्याय के खिलाफ बगावत न कर दें, इसका पूरा प्रयास होता रहता है.

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