विपक्ष बोला, कार्रवाई हो ख़ुर्शीद पर

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Image caption मुख्य चुनाव आयुक्त ने राष्ट्रपति को शिकायत की थी कि चेतावनी के बावजूद ख़ुर्शीद अपने बयान पर कायम हैं

केंद्रीय क़ानून मंत्री सलमान ख़ुर्शीद प्रकरण पर विपक्ष ने तीखे तेवर अपनाते हुए ख़ुर्शीद के ख़िलाफ़ तुरंत कार्रवाई की माँग की है.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने तो कहा है कि इससे संवैधानिक संकट जैसी स्थिति पैदा हो गई है.

इससे पहले चुनाव आयोग ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए सलमान ख़ुर्शीद पर आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की अपील करते हुए तत्काल और निर्णायक कदम उठाने की मांग की थी.

और राष्ट्रपति ने इस मामले पर कदम उठाते हुए इस पत्र को प्रधानमंत्री के पास भेज दिया था.

रविशंकर प्रसाद का कहना है, ''केंद्र सरकार का एक वरिष्ठ मंत्री जो अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री भी है, क़ानून मंत्री भी है, क़ानून भी जानता है वो खुले आम चुनाव आयोग की धज्जियाँ उड़ाने पर अमादा है.''

उन्होंने कहा, ''एक वरिष्ठ मंत्री ने चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के अधिकारों को संकट में डालने का प्रयास किया है. इससे एक अभूतपूर्व संविधानिक संकट की स्थिति पैदा हो गई है.''

उन्होंने यह भी कहा, ''क्या माननीय प्रधानमंत्री कोई कार्रवाई करेंगे या फिर इस बार भी हर बार की तरह ख़ामोश ही रहेंगे? क्या सोनिया गाँधी कुछ कहेंगी या फिर हर बार की तरह इस बार भी चुप ही रहेंगी? नहीं तो सब यही ससझेंगे कि वो सभी सलमान ख़ुर्शीद के बयान से सहमत हैं. सवाल चुनावों का नहीं है सवाल चुनाव आयोग की विश्वसनीयता का है जिसका एक विशेष दर्जा है.''

पाबंदी की मांग

जनता दल (यू) के प्रमुख शरद यादव ने मांग की है कि प्रधानमंत्री को उन्हें उत्तर प्रदेश में प्रतिबंधित कर देना चाहिए. उन्होंने कहा, ''ख़ुर्शीद ने जो कहा है वो राजनीतिक मकसद से कहा है. वह नौ फीसदी आरक्षण की बात कर रहे हैं. इसमें केवल लोक सभा ही कुछ कर सकती है.''

उन्होंने आगे कहा, '' वैसे तो उन्हें बर्ख़ास्त करना चाहिए लेकिन कम से कम इतना तो कर सकते हैं.''

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ख़ुर्शीद का बचाव

उधर मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने ख़ुर्शीद का समर्थन किया है. उन्होंने कहा, यह कोई उल्लंघन नहीं है लेकिन उन्हें यह कहने के लिए कहा गया है. जो उन्होंने कहा है वो हमारे चुनाव घोषणा पत्र का हिस्सा है और अगर उन्होंने कोई बात घोषणा पत्र से कही है तो चुनावों में वायदे करना हर राजनीतिक पार्टी का अधिकार है.''

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'निरर्थक कार्रवाई'

उधर बीजेपी के नेता और वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी का मानना है कि यह एक बेकार कार्रवाई है क्योंकि राष्ट्रपति के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है.

टीवी चैनल 'सीएनएन आईबीएन' से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, ''चुनाव आयोग के पास अधिकार हैं जिनका वो निडर होकर इस्तेमाल कर सकता है लेकिन वह भी मंत्री के ख़िलाफ़ कुछ नहीं करना चाहते. उन्होंने राष्ट्रपति को अपील की है जो एक बहुत ही निरर्थक कार्रवाई है.''

महत्वपूर्ण है कि मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई क़ुरैशी ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में शिकायत की थी कि चेतावनी के बावजूद ख़ुर्शीद पिछड़े मुसलमानों के आरक्षण से सम्बंधित अपने बयान पर कायम हैं.

एक चुनावी सभा के दौरान सलमान ख़ुर्शीद ने यह कह दिया था कि चुनाव आयोग चाहे उन पर पाबंदी लगाए या फिर उन्हें फांसी दे दे, लेकिन वह पिछड़े मुसलमानों को उनका हक़ दिलाकर रहेंगे.

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