'सायरन बजा, कांपी दिल्ली'

दिल्ली में कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर से सटे मोहन सिंह प्लेस पर जब मै पहुंचा तो घड़ी की सुइयाँ साढ़े ग्यारह बजा रहीं थी और सायरन की आवाज़ गूंज रही थी.

अचानक भगदड़ मची और लोग धड़धड़ा कर बिल्डिंग से बाहर भागने लगे. बिल्डिंग के भीतर से बचाओ-बचाओ की आवाज़ें आ रहीं थी. लेकिन यहाँ मौजूद राहत दल सतर्क और मुस्तैद था.

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कुछ लोग बाहर से अंदर की ओर भागे और अगले चंद मिनटों में राहतकर्मी बिल्डिंग के भीतर मौ़जूद घायलों को कंधे पर लाद कर बाहर लाने लगे.

बिल्डिंग के बाहर आग लगी थी. कुछ ही पल गुज़रे थे कि सायरन बजाती अग्नि शमन दल की गाड़ी यहाँ पहुंच गई. अग्निशमन दल ने तेज़ी दिखाई और झट से इसे बुझा दिया.

पुलिस ने घेरा बना लिया था और बिल्डिंग को सील कर दिया.

'बचाओ- बचाओ'

पुलिस अधिकारी कंट्रोल रूम को इस बात की सूचना दे रहे है कि मौक़ा- ए- वारदात पर उनका दल पहुँच गया है और स्थिति पर काबू करने का प्रयास किया जा रहा है.

भारी तादाद में लोग इस मॉक ड्रिल को देख रहे थे.

चिकित्सा दल भी मौके पर दवाइयों और प्रारंभिक चिकित्सा इंतजामों के साथ मौके पर पहुँच गए.

इस बीच, भीड़ को चीरती अस्पताल की एम्बुलेंस भी यहाँ पहुंच गई और कराह रहे लोगों को अस्पताल ले गई.

सड़क से गुज़रने वाले या मंदिर जाने वाले लोग बड़ी उत्सुकता से ये सब कुछ देख रहे थे

दरअसल ये सारा दृश्य किसी दुर्घटना का नही, बल्कि एक मॉक ड्रिल का था, जो दिल्ली के सिर्फ़ मोहन सिंह प्लेस पर ही नही बल्कि पूरी दिल्ली के तमाम इलाक़ों में हो रही थी.

भूकंप की स्थितियां

ये वो मॉक ड्रिल था जिसमें हर जगह भूकंप जैसी स्थितियां पैदा की गईं थी और इससे निपटने के तरीकों का अभ्यास किया गया था.

इसका आयोजन राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और दिल्ली आपदा प्रबंधन ने किया था. इस ड्रिल का मकसद था कि अगर दिल्ली में 7.9 तीव्रता का भूकंप आ जाए तो स्थितियों से कैसे निपटा जाए.

पिछले कई दिनों से मोबाइल पर लगातार एसएमएस आ रहे थे कि 15 फरवरी को ज़रा दिल्ली की सड़कों और मेट्रो स्टेशन पर संभल कर निकलिएगा, क्योंकि पूरी दिल्ली के तमाम इलाको में भूकंप जैसी स्थितियाँ पैदा की जाएंगी.

अख़बार लोगों को बार -बार बता रहे थे कि किन रास्तों से बच कर निकलें.

मॉक ड्रिल के इस अभ्यास में पूरी दिल्ली के नौ ज़िले प्रभावित हुए. सरकारी स्कूल, निजी स्कूल, अस्पताल, कुछ सिनेमा हॉल, रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन, सरकारी इमारत, मार्केट एसोसिएशन, पेट्रोल पंप, मॉल, मेट्रो स्टेशन, सीएनजी स्टेशन, होटल और जेजे कॉलोनी को भी इस अभ्यास में शामिल किया था.

इस मॉक ड्रिल को देश रहे एक व्यक्ति विकास से मैंने पूछा कि इस ड्रिल से क्या आपने सीखा तो उसका जवाब था कि ये तो नकली है, जब असलियत में ऐसा भूकंप आएगा तो कोई नज़र नही आएगा और सारी तैयारी धरी की धरी रह जाएगी.

अब इस व्यापक अभ्यास के बाद इसकी समीक्षा की जाएगी और इसका मकसद ये भी पता लगाना है कि सरकारी तंत्र के प्रशिक्षण में कहाँ-कहाँ कमियाँ हैं और उसे कहाँ सुधारा जा सकता है ताकि आपदा की स्थिति का सामना बेहतरी के साथ किया जा सके.

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