खुर्शीद के खेद जताने से मामला हुआ ख़त्म

  • 15 फरवरी 2012
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Image caption सलमान खुर्शीद ने पत्र लिखकर मामले पर खेद जताया था

केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और चुनाव आयोग के बीच चल रही तकरार अब समाप्त हो गई है. पिछले दिनों सलमान खुर्शीद ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर अपने बयान पर खेद जताया था.

बुधवार को आयोग ने इस पत्र के बाद ये फ़ैसला किया है कि अब इस मामले पर आगे कोई कार्रवाई नहीं होगी. साथ ही चुनाव से जुड़े और सरकारी पदों पर बैठे सभी लोगों को सलाह दी है कि वे सतर्क रहें ताकि ऐसी स्थिति फिर न आए.

चुनाव आयोग के निदेशक यशवीर सिंह की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि अब कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने पत्र में चुनाव आयोग के आदेश के प्रति सम्मान जताया है.

इस पत्र में सलमान खुर्शीद ने ये भी वादा किया है कि ऐसी स्थिति दोबारा नहीं आएगी. चुनाव आयोग का कहना है कि सलमान खुर्शीद के पत्र से उनके रुख में सकारात्मक बदलाव दिखा है और उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की चुनाव आयोग की कोशिशों के लिए भी अपनी प्रतिबद्धता जताई है.

मामला

कुछ दिनों पहले अल्ससंख्यकों को आरक्षण पर सलमान खुर्शीद ने एक चुनावी सभा के दौरान बयान दिया था.

उनके इस बयान पर विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी और इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बताया था.

विपक्ष की शिकायत पर चुनाव आयोग ने इस मामले पर सुनवाई की और सलमान खुर्शीद को आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी पाया.

लेकिन बात उस समय बिगड़ गई, जब चुनाव आयोग का फ़ैसला आने के बाद सलमान खुर्शीद ने ये बयान दे दिया कि आयोग चाहे तो उन्हें फाँसी पर चढ़ा दे, लेकिन वे हक़ की बात करना जारी रखेंगे.

सलमान खुर्शीद के इस बयान को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल को पत्र लिखा और हस्तक्षेप की मांग की. चुनाव आयोग ने पत्र में कानून मंत्री के आचरण पर आपत्ति जताई और कहा कि ये अभूतपूर्व स्थिति है.

चुनाव आयोग के पत्र के बाद राष्ट्रपति ने इसे प्रधानमंत्री के पास भेजा. सलमान खुर्शीद की प्रधानमंत्री से मुलाकात भी हुई और कांग्रेस पार्टी ने भी ये बयान दिया कि संवैधानिक संस्था का सम्मान किया जाना चाहिए.

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