ममता सहित आठ मुख्यमंत्री एनसीटीसी के ख़िलाफ़

  • 17 फरवरी 2012
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Image caption कई चरमपंथी घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने एनसीटीसी के गठन का प्रस्ताव रखा था

आतंकवाद से निपटने में आतंकवाद रोधी सभी उपायों के नियंत्रण एवं समन्वय के लिए हाल ही में गठित नेशनल काउंटर टेरेरिज्म सेंटर (एनसीटीसी) या राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी केन्द्र का विरोध करने वालों में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित कुल आठ मुख्यमंत्री शामिल हो गए हैं.

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसका विरोध कर चुके हैं.

उसके बाद भाजपा के शासन वाले हिमाचल प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने भी इसका विरोध किया है.

उनके अलावा भाजपा के नेतृत्त्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के अहम सदस्य पंजाब में शिरोमणि अकाली दल के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल भी विरोधी खेमे में खड़े हैं.

आंध्र प्रदेश में विपक्ष के नेता और तेलुगूदेसम पार्टी प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू ने भी एनसीटीसी का विरोध किया है.

एनसीटीसी का विरोध कर रहे इन नेताओं का कहना है कि इस एजेंसी को जो अधिकार दिए गए हैं उससे भारत के संघीय ढाँचे में राज्य के अधिकारों का हनन होगा.

'गठन देशहित में'

लेकिन गृहमंत्रालय ने एनसीटीसी के गठन के आदेश को वापस लेने की संभावना से इनकार किया है.

केंद्रीय गृहसचिव आरके सिंह ने कहा है कि एनसीटीसी को लेकर कोई विवाद नहीं होना चाहिए क्योंकि इसका गठन देशहित में किया गया है.

उन्होंने कहा है, "केंद्र सरकार ने किसी कानून को अनदेखा नहीं किया है और राज्यों से इस मामले में सलाह मशविरे की ज़रुरत नहीं है क्योंकि एनसीटीसी का गठन मौजूदा कानूनों के तहत ही किया गया है."

गृह मंत्रालय के एक और अधिकारी के अनुसार आंतरिक सुरक्षा पर हुए सम्मेलन में मुख्यमंत्रियों से इस संबंध में राय ले ली गई थी.

सरकार ने हाल ही में इसके गठन का आदेश जारी किया था और इस केंद्र को पहली मार्च से काम करना शुरु करना है.

'वापस लें'

ममता बनर्जी सहित आठ मुख्यमंत्रियों के साथ आने से यह मामला गंभीर हो गया है क्योंकि ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन यूपीए का हिस्सा है जबकि बाक़ी दल विपक्षी एनडीए के या उसके साझीदार रह चुके हैं.

उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर इसका विरोध किया है.

अपने पत्र में उन्होंने लिखा है कि सरकार को अपने आदेश की समीक्षा करनी चाहिए और इसे वापस लेना चाहिए.

उन्होंने अपने पत्र में लिखा है, "एनसीटीसी को असिमित अधिकार दिए जाने से राज्यों के उन अधिकारों का हनन होगा, जो संविधान के तहत राज्यों को दिए गए हैं."

उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखा है कि राज्यों के अधिकारों और शक्तियों पर इस तरह से अतिक्रमण करने वाली एजेंसी के गठन से पहले केंद्रीय गृहमंत्रालय को राज्य सरकारों को भरोसे में लेना था.

गठनबंधन में शामिल होने के बावजूद एनसीटीसी का विरोध करने के बारे में उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार का हिस्सा होने का अर्थ ये नहीं है कि हम राज्य में अपने हितों को भूल जाएँगे."

इससे पहले ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया था कि वे एनसीटीसी पर जारी आदेश को वापस लें.

समाचार एजेंसियों के अनुसार उन्होंने कहा है कि इस संबंध में उन्होंने नीतीश कुमार, जयललिता और ममता बनर्जी से बात की है.

केंद्र में प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी एनसीटीसी के गठन के केंद्र सरकार के निर्णय का विरोध किया है.

एक टीवी चैनल से बातचीत में भाजपा नेता बलबीर पुंज ने कहा, "यदि सरकार सचमुच आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई को लेकर गंभीर थी तो एनसीटीसी के गठन के पहले उसे सभी दलों से बात करनी थी और सभी को विश्वास में लेना था."

उन्होंने भी कहा कि एनसीटीसी राज्यों के अधिकारों का हनन है.

क्या है एनसीटीसी?

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Image caption माना जाता है कि एनसीटीसी का गठन केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम के सुझाव पर किया गया है

नेशनल काउंटर टेरेरिज्म सेंटर (एनसीटीसी) या राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी केन्द्र एक ताक़तवर एजेंसी है जिसका गठन आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई के लिए गैरकानूनी गतिविधि (निरोधक) कानून के तहत किया गया है.

केंद्र सरकार ने जो आदेश जारी किया है उसके अनुसार केंद्र सरकार की एजेंसियाँ आतंकवाद से जुड़े किसी भी मसले में देश भर में कहीं भी जाकर तलाशी ले सकती हैं और गिरफ़्तारियाँ कर सकती हैं.

आदेश के अनुसार केंद्रीय एजेंसियाँ राज्य की पुलिस को भरोसे में लेगी लेकिन अपनी किसी कार्रवाई के लिए उसे राज्य की सरकार और राज्य पुलिस से किसी तरह की अनुमति की जरुरत नहीं होगी.

संविधान के अनुसार कानून व्यवस्था राज्य सरकार का अधिकार है और केंद्र की एजेंसियाँ राज्य की अनुमति के बिना राज्यों में कोई कार्रवाई नहीं कर सकतीं.

एनसीटीसी ख़ुफ़िया एजेंसी गृहमंत्रालय के ज़रिए आईबी के तहत आएगी.

आईबी के अतिरिक्त निदेशक के रैंक का एक अधिकारी इस एजेंसी का प्रमुख होगा.

कई और एजेंसियों को इसके तहत लाने का भी प्रस्ताव है.

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