उत्तर प्रदेश चुनाव 2012:'बहिन जी से आशियाने की आस है...'

ध्रुव कटारिया
Image caption ध्रुव उन हजारों लोगों में से एक है, जिन्हें उत्तर प्रदेश में कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना में मकान मिला.

ध्रुव कठेरिया की उम्र महज़ दो साल थी जब उनके पिता गुज़र गए.

माँ हेमवती पर दुःख का पहाड़ टूट पड़ा. लेकिन अब बीस साल बाद माँ बेटे दोनों प्रसन्न हैं.

इटावा शहर में स्थित वाम अड्डा के पास ध्रुव का पुश्तैनी कच्चा घर था जिसे ताऊ ने बेच दिया. इसलिए ध्रुव की माँ हेमवती अपने तीन बच्चों को लेकर बारह साल तक किराये के घर में रहती थी.

ध्रुव धानुक बिरादरी से है. उसकी माँ हेमवती घरों में झाड़ू पोंछा करके परिवार का पेट पालती है, इसलिए वह अपना मकान बनाने का सपना भी नही देख सकती थी.

करीब तीन साल पहले ध्रुव के परिवार की लाटरी खुली, उसे माया सरकार की कांशी राम शहरी गरीब आवास योजना में तीसरी मजिल पर एक फ्लैट मिल गया.

इस फ्लैट में एक बेड रूम है. एक ड्राइंग रूम जिसमे एक किनारे में छोटा सा किचन है. छोटी सी बालकनी और लैट्रिन – बाथरूम.

शहर के सिविल लाइन्स इलाके के इटावा-आगरा रोड पर यह कालोनी दो साल पहले बनी. पानी है, सीवर और पक्की सड़कें भी हैं.

बिजली की बेहतरीन सुविधा है.

मनोकामनी सक्सेना की तरह ध्रुव की माँ को इस फ्लैट के लिए रिश्वत नही देनी पडी थी.

अब इस मकान में ध्रुव, उसकी माँ, बहन, पत्नी, भाभी और बड़े भाई और उनका बच्चा यानि सात लोग रहते हैं.

ध्रुव के बड़े भाई राजू ने दसवीं तक पढ़ाई की मगर उसका कहना है कि पिता की मौत के चलते वह खुद पढ़ाई नही कर पाया.

इसलिए ध्रुव बिल्डिंग बनाने में शटरिंग का काम करता है जिससे महीने में चार पांच हजार रूपये की कमाई हो जाती है.

ध्रुव ने बड़े उत्साह से मुझे अपना घर दिखाया और माँ तथा परिवार के लोगों से परिचय कराया. उस समय उसकी भाभी भोजन कर रही थी और उसकी माँ बिजली के हीटर के सामने बैठकर आग ताप रही थी.

हेमवती ने बड़ी मासूमियत से बताया अभी बिजली का कनेक्शन नही लिया, कारण ध्रुव ने बताया, ''क्योंकि कनेक्शन लेने के लिए पैसे नही हैं.''

मदद योजना

माँ को चार सौ रूपये महीना महामाया गरीब आर्थिक मदद योजना से पेंशन मिलती है. यह योजना भी मुख्यमंत्री मायावती ने शुरू की है.

ध्रुव के लिए यह फ़्लैट बहुत भाग्यशाली है, यहीं उसकी शादी हुई. पत्नी नगीना पड़ोस के मैनपुरी जिले की है और आठवीं पास है. खुशी की एक और बात है, इसी घर में वह चाचा बना. पोती को गोद में उठाकर हेमवती कहती है, बीस साल बाद घर में बच्चा हुआ.

ध्रुव उन हजारों लोगों में से एक है, जिन्हें उत्तर प्रदेश में कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना में मकान मिला.

ध्रुव और उसकी कालोनी के सारे लोग जुलुस बनाकर बुधवार को नुमाइश मैदान में मायावती का भाषण सुनने गए थे.

हेमवती का कहना है कि इतनी भीड़ उन्होंने पहले कभी नही देखी थी.

ध्रुव का कहना है कि वो वोट देने जरुर जाएगा और मायावती के कहे अनुसार, ''हाथी पर ही मोहर लगाकर अपना वोट देगा, चाहे हारे चाहे जीते.''

Image caption ध्रुव की माँ हेमवती अपने तीन बच्चों को लेकर बारह साल तक किराये के घर में रहती थी

अगल - बगल खड़े दूसरे लोग ध्रुव की हाँ में हाँ मिलाते हुए कहते हैं कि वे सब इस कालोनी के लिए मायावती के एहसानमंद हैं.

इन लोगों को मायावती का यह नारा भी याद हो गया है, ''खुला हाथी लाख का, बंद हाथी सवा लाख का.''

इस बीच ध्रुव कुछ सोचकर कहता है, ''आखिर कालोनी के दो सौ चौबीस में कितने वोट कटेंगे, बहुत कटेंगे पचास – सौ. तब भी एक सौ बीस वोट मिलेंगे और बहुमत होगा.''

चार मंजिला कांशी राम कालोनी इटावा-आगरा रोड पर नुमाइश मैदान के पीछे ही बनी है. इस कालोनी में कुल दो सौ चौबीस फ़्लैट हैं. इनमे से सत्तर-अस्सी खाली हैं क्योंकि जिन लोगों को ये मकान मिले उनके अपने मकान हैं और वे रहने नही आये. अब ठेकेदार ने इनमे से कई का ताला तोड़कर यहाँ अपने मजदूरों को टिका दिया है.

"सर्वजन हिताय"

इस कालोनी में केवल विकलांगों और विधवाओं को फ़्लैट मिले हैं, जबकि बगल की दूसरी कालोनी में सामान्य लोगों को. दूसरी बात यह कि हिंदू-मुसलमान दोनों और सभी जातियों को फ्लैट फ़्लैट मिले हैं.

मेरे पास कलम, कैमरा और नोट बुक देखकर कई लोग आ गए इनमे महिलाओं की तादाद ज्यादा थी.

यशोदा, मीना, मोहम्मद इलियास, और नाजरीन को तकलीफ है कि अभी तक उनको कालोनी में फ्लैट नही मिला , जबकि कंप्यूटर में नाम दर्ज है. ये लोग इसी कालोनी में अपने रिश्तेदारों के साथ अथवा बंद मकान का ताला तोड़कर रहते हैं.

ये सब मेहनत मजदूरी करके पेट पालते हैं और इतना पैसा नही कि अपना मकान बना सकें. ये लोग कचेहरी में दफ्तरों के कई चक्कर लगा चुके हैं , जहां बाबू और उनके दलाल लोग रिश्वत मांगते हैं.

मनोकामनी सक्सेना खुले आम कहती हैं कि उन्होंने एक दलाल को पन्द्रह सौ रूपये रिश्वत देकर फ़्लैट लिया. नाजरीन ने इसे जायज ठहराया, ''जब कोई भाग दौड कर मेहनत करेगा तो पैसा लेगा ही.''

कांशी राम कालोनी के लिए कंप्यूटर में नाम दर्ज कराकर लाइन में खड़े लोग उम्मीद लगाए हैं कि बहिन जी की सरकार फिर आयेगी तो शायद उनकी भी लाटरी खुल जाए.

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