वे अपने मत को दान करना नहीं चाहते....

  • 19 फरवरी 2012
Image caption बीएस जौहरी, मतदाता

लखनऊ का अलीगंज इलाक़ा. मतदाता केंद्रों पर लोगों से मिलने-जुलने के लिए जब मैं राज्य लोक सेवा आयोग परिसर में बने मतदान केंद्र पर पहुँचा, तो मेरी मुलाक़ात एक सज्जन से हो गई.

मैं अन्य लोगों से बात कर रहा था और वे चुपचाप अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे. हाथ में किताब लिए जब उनकी बारी आई, तो बड़ी ही दृढ़ता के साथ उन्होंने कहा, "मैं यहाँ मतदान करने नहीं आया, बल्कि विरोध दर्ज करने आया हूँ कि मुझे किसी उम्मीदवार को वोट नहीं करना है."

नाम भवानी शंकर जौहरी. पहले वन अधिकारी थे और अब रिटायर हो चुके हैं.

उम्मीदवारों से इतने निराश हैं कि वोट नहीं विरोध दर्ज कराने आए थे. लेकिन पीठासीन अधिकारी ने उन्हें मना कर दिया और कहा कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं हैं.

लेकिन भवानी शंकर जौहरी हार कहाँ मानने वाले थे. क़ानून की पढ़ाई कर चुके जौहरी घर वापस लौटे और क़ानून की किताब लेकर लौटे.

उन्होंने मुझे भी उस किताब के उस हिस्से को दिखाया और बताया कि सेक्शन 49(ए) के तहत उन्हें अपना विरोध दर्ज करने का पूरा अधिकार है.

जौहरी ने बताया, "मुझे कोई भी उम्मीदवार योग्य नहीं लगता. मैं किसी भी उम्मीदवार को अपना वोट नहीं देना चाहता."

और तो और बीएस जौहरी के परिवार का कोई सदस्य मतदान करने नहीं आया था, लेकिन विरोध दर्ज कराने के नाम पर परिवार के लोगों ने उनका साथ नहीं दिया और घर बैठना उचित समझा.

उन्होंने मुझे बताया कि वे अपने परिजनों पर दबाव नहीं डालना चाहते, क्योंकि लोकतंत्र है और सबको अपनी मर्ज़ी करने का अधिकार है.

बातचीत के क्रम में ही मजिस्ट्रेट की गाड़ी वहाँ पहुँची, तो बीएस जौहरी उनकी ओर बढ़े और अपना पक्ष उनके सामने दृढ़ता के साथ रखा.

लगा उनकी बात मजिस्ट्रेट साहब तक ठीक से पहुँची और वे दोबारा अपना विरोध दर्ज करने पीठासीन अधिकारी के पास गए.

मैं मतदान केंद्र के बाहर उनका इंतज़ार करता रहा कि आख़िरकार उनका हुआ क्या. क़रीब 10 मिनट बाद बीएस जौहरी जीत की मुद्रा में बाहर निकले.

हालाँकि पीठासीन अधिकार ने उनका विरोध लिखने से मना कर दिया, लेकिन मजिस्ट्रेट की पहल से बीएस जौहरी ने अपना विरोध ख़ुद रजिस्टर में दर्ज कराया, जो चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में जाएगा. बीएस जौहरी को संतोष है कि उन्होंने जो चाहा वो हो गया.

लोकतंत्र में मतदान का अधिकार सबसे अहम माना जाता है, लेकिन निराशा में कोई अपने क़ानूनी अधिकार का पालन करना चाहे, तो कोई उसे कैसे रोक सकता है.

संबंधित समाचार