दो और राज्य एनसीटीसी के विरोध में

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Image caption एनसीटीसी के गठन के बाद केंद्रीय जाँच दल राज्यों की अनुमति के बिना भी कहीं भी जाकर जाँच कर सकेगा

त्रिपुरा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी नेशनल काउंटर टेररिज़्म सेंटर यानी एनसीटीसी के खिलाफ सामने आ गए हैं.

इसके साथ ही एनसीटीसी का विरोध करने वाले राज्यों की संख्या 12 हो गई है. इनमें केंद्र में सत्तारूढ़ यूपीए के मुख्य घटक दल तृणमूल कांग्रेस की नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शामिल हैं.

इन मुख्यमंत्रियों का आरोप है कि एनसीटीसी के गठन से भारत के संघीय ढाँचे पर विपरीत असर पड़ेगा और राज्यों के अधिकारों का गठन होगा.

उनका कहना है कि राज्यों को विश्वास में लिए बगैर केंद्र सरकार ने एकतरफा निर्णय ले लिया है.

हालांकि केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों का खंडन करते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा था कि केंद्र सरकार की मंशा राज्यों के अधिकारों का अतिक्रमण करने की नहीं है.

उन्होंने कहा है कि आतंक के ख़िलाफ़ लड़ाई सबको मिलकर लड़नी चाहिए और इसका राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए.

केंद्रीय गृहमंत्रालय ने हाल ही में एनसीटीसी के गठन की घोषणा की थी. पहली मार्च से इस केंद्र को काम करना शुरु करना है.

संख्या बढ़ी

त्रिपुरा में वाममोर्चा सरकार के मुख्यमंत्री मानिक सरकार ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में एनसीटीसी के गठन का विरोध करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार के इस 'एकतरफा' निर्णय से 'गलतफहमियाँ' पैदा होंगी.

मानिक सरकार ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि एनसीटीसी के गठन के निर्णय को वापस लेना चाहिए और व्यापक सलाह मशविरा शुरु करना चाहिए.

अपने पत्र में उन्होंने कहा है कि ये 'दुर्भाग्यपूर्ण और आश्चर्यजनक' है कि एनसीटी का संबंध सुरक्षा से है जो राज्यों का मसला है और इसके गठन का आदेश बिना किसी सलाह मशविरे के कर दिया गया.

दूसरी ओर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूरी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह संघीय ढाँचे के तहत राज्यों को दिए गए अधिकारों में दखलंदाजी कर रही है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में उन्होंने कहा, "चाहे वह एनसीटीसी का मामला हो या फिर और कोई मसला, ये अपने में दुखद है कि कई महत्वपूर्ण फैसले केंद्र एकतरफा ले लेता है."

एनसीटीसी के विरोध की शुरुआत उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने की थी. उन्होंने कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात की थी.

इसके बाद पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, बिहार, पंजाब, गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक ने भी इसका विरोध किया था.

एनसीटीसी का विरोध करने वाले राज्यों में से सिर्फ़ पश्चिम बंगाल में ही यूपीए में शामिल दलों का गठबंधन सत्ता में है. शेष राज्यों में विपक्षी दलों का शासन है.

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