उत्तर प्रदेश चुनाव:सीपीएम का सिपाही अकेले लड़ रहा है जंग

  • 19 फरवरी 2012

रात करीब आठ बजे का समय है. मुकुट सिंह यादव क्षेत्र में जन संपर्क करके लौट आए हैं. उनकी प्रचार टीम के बाकी साथी नीचे के कमरे में ज़मीन पर गद्दे लगाकर लेट गए हैं , इसलिए अब वह मुझसे ऊपर ड्राइंग रूम में आराम से बैठकर चाय पर बात कर सकते हैं.

सामान्य बोलचाल की भाषा में इटावा के सिविल लाइन्स इलाके का यह घर आलीशान कहा जाएगा.

मार्क्सवादी पार्टी का पूर्णकालिक कार्यकर्ता होने के नाते पार्टी से कुछ मानदेय मिलता है , मगर उससे महीने भर की चाय का भी खर्च नहीं चल सकता.

गलतफ़हमी न हो इसलिए कॉमरेड मुकुट यादव मुझे जल्दी ही यह बता देते हैं कि यह उनकी संपत्ति नहीं है. यह मकान उनकी पत्नी ने कर्ज़ लेकर बनवाया है.

उनके पास कोई अचल संपत्ति भी नहीं है, क्योंकि ज़मीन अभी पिताजी के नाम है. मध्यमवर्गीय किसान पिता इटावा से करीब पचीस किलोमीटर दूर अपने गाँव नगला बरी में रहते हैं.

पत्नी सरकारी इंटर कॉलेज में प्रवक्ता हैं. उनको अच्छी सैलरी मिलती है.इसीलिए कॉमरेड मुकुट निश्चिन्त होकर राजनीति कर सकते हैं.

वह बड़े गर्व से कहते हैं कि नामांकन पत्र में मेरी कुल संपत्ति एक लाख से भी कम है. मुकुट यादव ने मिडिल तक की पढ़ाई गाँव में की . आगरा विश्वविद्यालय से बीकॉम किया और 1976 में कानपुर से एलएलबी.

कोई प्रचार करने नहीं आया

पढ़ाई के दौरान ही कम्युनिस्ट साहित्य पढ़ने का चस्का लगा. स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ़ इंडिया से जुड़ गए. फिर उत्तर प्रदेश नौजवान सभा के मेम्बर बने.

रिक्शा चालकों और हाथ ठेला चालकों आदि असंगठित मज़दूरों का संगठन किया. इमरजेंसी के खिलाफ वकीलों को संगठित करने के कारण पुलिस उनके पीछे पड़ी मगर जेल जाने से बच गए.

देर से बयालीस साल की उम्र में शादी की , वह भी एक बाल विधवा से.

1967 में सीपीआई के विभाजन के बाद इटावा में सीपीएम की शाखा नहीं बनी.

1977 में मुकुट सिंह ने ही इटावा में सीपीएम की बुनियाद डाली. किसानों को संगठित किया . वह जि़ला सचिव हुए. अब वह पार्टी के राज्य सचिवालय के सदस्य हैं.

वकील होने के नाते किसानों की ज़मीन अधिग्रहण के खिलाफ़ करीब साथ मुक़दमे किए हैं.

उत्साह में कमी नहीं..

मुकुट यादव की उम्र 58 साल है और वो पहली बार विधान सभा का चुनाव लड़ रहें हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो सीपीएम ने पैंतालीस साल बाद इटावा विधान सभा चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारा है.

वह मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सोलह उम्मीदवारों में से एक हैं जो इस बार विधान सभा में खाता खोलने की कोशिश कर रहें हैं.

कुछ महीने पहले जनरल सेक्रेटरी प्रकाश करात पार्टी की एक बैठक में इटावा आए थे और यहीं घोषणा कर गए थे कि मुकुट यादव इटावा से विधान सभा चुनाव लड़ेंगे.

यादव को अखबारों से शिकायत है कि वे उनके प्रचार की ख़बरें नहीं छापते , लेकिन उन्हें पार्टी लीडरशिप से इस बात की कोई शिकायत नहीं है कि कोई भी बड़ा नेता उनके चुनाव प्रचार में मदद के लिए नहीं आया.

वे कहते हैं कि सब नेता बंगाल और केरल में पार्टी कांग्रेस की मीटिंग में व्यस्त है. वह उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव से ज्यादा ज़रूरी है.

मुझे समझ आ गया कि पिछले विधान सभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में सीपीएम का खाता क्यों नही खुला था.

जनता भी समझती है कि कौन पार्टी चुनाव में गंभीर है और नहीं.

बहरहाल मुकुट यादव सुबह सात बजे ही प्रचार और जन संपर्क के लिए निकल जाते हैं और रात देर से लौटते हैं.

वह कहते हैं," जैसे- जैसे चुनाव करीब आ रहे हैं मतदाताओं का सपा – बसपा में तेज़ी से ध्रुवीकरण हो रहा है. जो लोग पहले गर्म जोशी से स्वागत करते थे अब मतदान की तारीख करीब आने से उनके चेहरे के भाव बदलने लगे हैं."

मगर कॉमरेड मुकुट यादव के उत्साह में कमी नहीं है.

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