सरकार ने भी झाड़ा पल्ला किंगफिशर से

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Image caption किंगफिशर को तीसरी तीमाही में करीब 444 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है.

नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने कहा है कि किंगफिशर के साथ-साथ किसी भी निजी एयरलाइन को सरकार मदद नहीं दे सकती.

अजित सिंह के मुताबिक़ डीजीसीए मामले पर नज़र बनाए हुए है और यात्रियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए.

इस बीच किंगफिशर एयरलाइंस की ओर से उड़ानें रद्द करने का सिलसिला तीसरे दिन सोमवार को भी जारी है.

समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक़ किंगफिशर इस समय अपने 64 हवाई जहाज़ों में से सिर्फ 16 का इस्तमाल कर रही है.

सुबह से दिल्ली, चंडीगढ़ जैसे शहरों से कई उड़ानें रद्द कर दी गई हैं तो कई उड़ानों में देरी हो रही है. इस वजह से यात्रियों को काफ़ी परेशानी हो रही है .

यात्रियों की सुरक्षा अहम

नागरिक उड्डयन मंत्री ने इस बात पर जोर दिया है कि यात्रियों कि सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता.

अजित सिंह ने कहा, "हमें देखना यही है कि किंगफिशर जवाब क्या देती है. उन्होंने अपने कर्मचारियों को तनख्वाह नहीं दी है और इसी वजह से कोलकाता में कर्मचारी हड़ताल पर चले गए. ज़ाहिर है इससे उड़ानें बाधित हुई हैं."

इससे पहले शनिवार को किंगफ़िशर एयरलाइंस ने एक बयान जारी किया था कि अपरिहार्य कारणों से उसकी सारी उड़ानें सुचारु रुप से नहीं चल पाएँगी. इसमें एक कारण विमनों से पक्षियों का टकराना बताया जा रहा था.

एयरक्राफ़्ट नियमों के तहत अगर एयरलाइंस ऑपरेटरों को अपनी उड़ानों में रद्दोबदल करना है तो उसे पहले डाइरेक्ट्रेट जनरल ऑफ़ सिविल एविएशन (डीजीसीए) की अनुमति लेनी पड़ती है.

पीटीआई के मुताबिक रविवार को डीजीसीए के महानिदेशक इके भारत भूषण ने कहा था कि उड़ानों में किसी प्रकार के बदलाव होने की स्थिति में विमानन कंपनी का डीजीसीए को जानकारी देना जरूरी है और अगर उड़ाने रद्द होने की या देर से चलने की खबरों में सत्यता पाई गई तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा.

डीजीसीए के महानिदेशक इके भारत भूषण से जब बीबीसी ने बात की तो उन्होंने कोई टिपण्णी करने से इंकार किया लेकिन उच्च अधिकारियों के मुताबिक जो हो रहा है वो डीजीसीए के लिए स्वीकार्य नहीं है और किंगफिशर को काफी बातें समझानी पड़ेगी.

किंगफिशर इस समय आर्थिक संकट से जूझ रहा है. तीसरी तीमाही में उसे करीब 444 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है और उस पर लगभग सात हज़ार करोड़ का कर्ज़ है.

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