मायावती कॉलोनी में पानी के लिए त्राहिमाम

  • 21 फरवरी 2012
अंबेडकर ग्राम में हैंडपंप
Image caption मायावती के नाम पर बनी इस कॉलोनी में कुछ काम नहीं हुआ है और पानी की बहुत समस्या है

विपक्षी पार्टियाँ मायावती सरकार पर कई तरह के आरोप लगा रही हैं, लेकिन मायावती समर्थक मुख्यमंत्रियों की उपलब्धियाँ गिना रहे हैं. उनमे से एक है दलित समुदाय के लिए किए गए कई कार्य.

अंबेडकर ग्राम के निर्माण को मायावती की बड़ी उपलब्धि माना जाता है. लखनऊ से सटे बख़्शी का तालाब इलाक़े के एक मायावती कॉलोनी में जब हम पहुँचे तो लोगों की शिकायतों का पिटारा खुल गया. समस्याओं की झड़ी लग गई.

ऐसा नहीं है कि मुख्यमंत्री मायावती के नाम पर बनी इस कॉलोनी में कुछ काम नहीं हुआ है, लेकिन वर्षों से रह रहे लोग कई बातों को लेकर निराश हैं, परेशान हैं और नाराज़ भी.

दरअसल इस कॉलोनी में पीने के पानी की गंभीर समस्या है. जिनके पास कुछ पैसा है, उन्होंने तो वैकल्पिक व्यवस्था कर रखी है, लेकिन जो लोग कॉलोनी के हैंडपम्प पर आश्रित हैं, उनके लिए पानी की समस्या काफ़ी गंभीर है.

सवाल पूछते ही करीब 11 साल से इस कॉलोनी में रह रही शैल देवी का ग़ुस्सा फूट पड़ता है. कहती हैं, "सड़क तो भला-बुरा बन ही गया है, बिजली की समस्या है, सीवर भी नहीं है. लेकिन अहम समस्या है पीने के पानी की. दो साल से नल ख़राब है."

मिलन सोनी को तो कई बार पीने के पानी के लिए दूसरों पर आश्रित रहना पड़ता है.

अभी महिलाओं का ग़ुस्सा ठंडा भी नहीं हुआ था कि एक युवक मेरे पास आया और हाथ पकड़कर उस हैंड पम्प के पास ले गया. उनका नाम था वीरेंद्र वाल्मिकी.

वीरेंद्र ने हैंड पम्प को हिलाकर दिखाया और ग़ुस्से से कहा कि ये ज्यादातर समय ख़राब रहता है. वीरेंद्र कहते हैं, "इस पम्प में पानी नहीं आता है. कई बार तो आधे घंटे चलाने के बाद इसमें पानी आता है. पूरे मोहल्ले में इसके चलते लड़ाई होती रहती है."

वहाँ और भी लोग इकट्ठा हो गए और कहने लगे कि वो जब पार्षद से शिकायत करते हैं तो उसे कुछ समय के लिए ठीक करवा दिया जाता है लेकिन ये स्थायी समाधान नहीं है और लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं.

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