पद्मनाभास्वामी मंदिर खजाने की वीडियोग्राफी शुरू

  • 20 फरवरी 2012
इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption पद्मनाभास्वामी मंदिर के खजाने की गिनती का काम शुरू कर हो गया है

केरल के प्रसिद्घ श्री पद्मनाभास्वामी मंदिर के खजाने की गिनती का काम शुरू हो गया है.

यह गिनती सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित कमेटी की देखरेख में हो रही है. सोने-चांदी के जेवरात, बर्तन और चाँदी और स्वर्ण मूर्तियों की वीडियोग्राफी की जा रही है.

यह पूरी प्रक्रिया बेहद गोपनीय है और मीडिया को भी इसे कवर करने की अनुमति नहीं है. इस सारी प्रक्रिया का वीडियो तैयार किया जा रहा है जिसे प्रमाणिक दस्तावेज़ के रुप में कम्‍प्‍यूटर में सहेज कर रखा जाएगा.

श्री पद्मनाभास्वामी मंदिर के पाँच खजानों से मिले सामान को सूची बद्घ करने के काम को विशेषज्ञ अंजाम दे रहे हैं.

खजाने मिलने के बाद से ही मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.

मंदिर के खजाने में क्‍या-क्‍या है इसकी जानकारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मिल सकेगी.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बीते साल जून-जुलाई में मंदिर के पाँच खजाने खोले गए थे, पर छठे तहखाने को खोलने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी.

डिजिटल वीडियोग्राफी

देश में भगवान विष्‍णु के मशहूर मंदिरों में शुमार इस मंदिर में नौ सौ अरब रुपए की कीमत का खजाना होने की बात कही जा रही है.

रिपोर्टों के मुताबिक मंदिर के खजाने को सूचीबद्घ करने के लिए विशेष रुप से विकसित किए गए डिवाइस का इस्तेमाल किया जा रहा है.

रत्नों ,मुद्राओं और प्राचीन कलाकृतियों के विशेषज्ञ इस खजाने का आंकलन करगें.

इतिहासकारों का कहना है कि खजाने की कीमत का सही अंदाज़ा लगाना बेहद मुश्किल काम है.

इमेज कॉपीरइट Ashraf Padanna
Image caption खजाने की सूची बनाने के काम में महीनों लग सकते हैं

खजाने की सूची बनाने के काम में महीनों लग सकते हैं और अधिकारियों का कहना है कि इस दौरान मंदिर में पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान पहले की तरह ही चलते रहेंगे.

जो समिति इस काम को अंजाम दे रही है उसके प्रमुख एम वी नायर हैं.

समिति के सदस्य इस बात का पूरा ख्याल रख रहे हैं कि उनके किसी भी काम से मंदिर की परंपरा को ज़रा सी भी ठेस न पहुंचे.

इस दौरान समिति के सदस्यों को कोई भी आभूषण पहनने के अनुमति नही है.

मंदिर का इतिहास

इस मंदिर को सोलहवीं शताब्दी में त्रावणकोर के राजाओं ने बनवाया था. ऐसा माना जाता है कि त्रावणकोर के राजाओं ने तहख़ानों के अलावा इस मंदिर की मोटी दीवारों में भी भारी मात्रा में ख़ज़ाना छिपा कर रख दिया था.

आज़ादी के बाद से इस मंदिर की देखरेख एक ट्रस्ट करता है जिसका संचालन त्रावणकोर का राजपरिवार करता है.

आज़ादी के बाद त्रावणकोर राज्य का कोचीन में विलय हो गया था, जो बाद में केरल बना.

इससे पहले एक स्थानीय वकील सुंदर राजन ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी कि सरकार मंदिर पर नियंत्रण कायम करे क्योंकि जिन लोगों का मंदिर पर नियंत्रण है वे मंदिर की संपत्ति की सुरक्षा नहीं कर सकते क्योंकि मंदिर के पास कोई सुरक्षा बल नहीं है.

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से मंदिर को अपने नियंत्रण में लेने को कहा था.

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रस्ट को मंदिर की सुरक्षा पुलिस के हवाले करते हुए ख़ज़ाने की जाँच के लिए एक सात सदस्यीय पैनल का भी गठन कर दिया था.

बीच में एक विशेष क़ानून का हवाला देते हुए राजपरिवार ने इस मंदिर को अपने कब्ज़े में लेने की बात कही थी जिस पर लोगों ने नाराज़गी जताई और कहा कि वहाँ जो कुछ है वह अब जनता की संपत्ति है.

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार