'उत्तर प्रदेश में मतदाता क्रान्ति आ गई है'

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Image caption उत्तर प्रदेश के प्रमुख चुनाव आयुक्त ने मतदाताओं से बढ़-चढ़कर मतदान देने की अपील की है

उत्तर प्रदेश में पत्रकार अब मतदान के दिन पुलिस मुख्यालय ये पता करने नहीं जाते कि कितने मतदान केंद्र लूटे गए, कितने लोग चुनावी हिंसा में मारे गए और कितने घायल हुए.

क्या क्या बदल गया है उत्तर प्रदेश में और कैसे?

उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी उमेश सिन्हा के मुताबिक राज्य में 'मतदान क्रांति' है.

ग़ौरतलब है कि चुनाव के पिछले चार चरणों में राज्य में ज़बरदस्त मतदान हुआ है.

शांतिपूर्ण हालात में पिछली बार के मुकाबले 33 फीसदी अधिक मतदान होने उमेश सिन्हा खासे उत्साहित हैं.

बीबीसी से एक खास बातचीत में उमेश सिन्हा मुस्कराते हुए कहते हैं, “नए तरीके से कहूँ तो मैं इसे मतदाता क्रान्ति कहना चाहूँगा. उद्योग क्रांति, सूचना क्रान्ति का नाम तो हमने सुना है, लेकिन यह परिवर्तन मतदाता क्रान्ति है.”

उत्तर प्रदेश का चुनाव कराना ही अपने आप में बहुत बड़ा काम है.

मुख्य चुनाव अधिकारी से बातचीत सुनने के लिए क्लिक करें

बड़ी वोटर संख्या

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Image caption उत्तर प्रदेश में मतदाताओं को जागरुक बनाने के लिए कई अभियान चलाए गए हैं

ललितपुर से सहारनपुर और बलिया से नोएडा तक फैले इस विशाल प्रदेश में 12 करोड 58 लाख वोटर हैं जो दुनिया के कई देशों की कुल आबादी से भी अधिक हैं.

मात्र इसी साल डेढ़ करोड नये वोटर जुड़े हैं.

इन सबके लिए चुनाव कर्मचारी, सुरक्षा बल, पोलिंग बूथ और वोटिंग मशीनों का इंतजाम ही अपने आप में एक बड़ा काम है जिसका अध्ययन करने के लिए दुनिया के कई देशों के विशेषज्ञ यहाँ आते हैं.

उमेश सिन्ह बताते हैं, “पिछले दो वर्षों से एक कोशिश रही है कि मतदाताओं की जागरूकता बढे, उन्हें अपने वोट के मूल्य का एहसास हो.”

पहले के चुनावों में मुख्य चुनाव अधिकारी मतदान की शाम इस तरह निश्चिन्त होकर बात नही कर सकते थे, क्योंकि सैकड़ों जगह से हिंसा, मारपीट, मतदान केन्द्रों पर कब्जे और अनुचित साधनों के इस्तेमाल की शिकायतें आ चुकी होती थीं.

चुनाव अधिकारियों को सभी जगहों से रिपोर्ट मंगाकर पुनर्मतदान की व्यवस्था करनी होती थी.

सिन्हा कहते हैं, “शांतिपूर्ण मतदान का युग चार, पाँच वर्ष पहले ही शुरू हो गया था, लेकिन अब शांतिपूर्ण माहौल के साथ जो नयी चीज जुडी है वह है मतदाता जागरूकता की, चुनावी खर्चों पर रोक की, गाँव में मतदाताओं को स्वतंत्र माहौल मुहैया करवाने की."

मुख्य चुनाव आयुक्त के अनुसार चुनाव आयोग की कोशिश रहती है कि शराब, उपहारों और धन बाँटने की शिकायतों से निपटा जाए और चुनावी खर्चों के नियंत्रण की पहल का अच्छा असर रहा है.

सिन्हा के मुताबिक चुनाव आयोग के कड़े कदमों की वजह से सकारात्मक मतदान हुए. इनमें उड़न दस्ते की मदद लेना जैसे कदम शामिल हैं.

मतदाताओं को जागरूक और प्रोत्साहित करने के अभियानों में राष्ट्रीय सेवा योजना के छात्रों ने भी बढ़-चढकर हिस्सा लिया.

पहली बार वोटर बने युवाओं से उमेश सिन्हा की विशेष अपील है: “आपका वोट बहुमूल्य है. अपना समय गँवाए बिना वोट जरूर डालें. पास-पड़ोस में भी लोगों को प्रेरित करें कि वो वोट जरुर डालें."

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