एयरइंडिया नहीं है किंगफिशर:अजित सिंह

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Image caption किंगफिशर पर लगभग सात हज़ार करोड़ का कर्ज़ है.

आर्थिक संकट से जूझ रही निजी एयरलाइन किंगफिशर के भविष्य के सवाल पर नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने एक बार फिर दोहराया कि संकटग्रस्त एयरलाइन को खुद ही रास्ते खोजने होंगे और सरकार उसकी मदद के लिए आगे नही आएगी.

इस बीच, मीडिया में इस तरह की खबरें हैं कि सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक किंगफिशर एयरलाइन को डेढ़ हज़ार करोड़ का कर्ज दे सकता है. पर इन खबरों की दोनों ही पक्षों की ओर से पु्ष्टि नही हुई है .

किंगफिशर को सरकारी मदद के सवाल पर उड्डयन मंत्री अजित सिंह का कहना था कि सरकार किंगफिशर को मदद दंने के लिए आगे नही आएगी. उन्होंने उम्मीद जताई कि एयरलाइन खुद अपने लिए संसाधन जुटाएगी और संकट से निकलेगी.

अजित सिंह का कहना है कि किंगफिशर को कर्ज देने का मामला कंपनी और बैंक के बीच का है.

किंगफिशर को मदद नही

एयर इंडिया और किंगफिशर की तुलना किए जाने पर अजित सिंह का कहना था कि सरकार बार बार स्पष्ट कर चुकी है और विजय माल्या भी अच्छी तरह जानते होंगें कि एयर इंडिया भारत सरकार का उपक्रम है, सरकार से उसे जो भी मदद मिलती है उसे किसी भी निजी एयरलाइन को नहीं दिया जा सकता.

लगातार रद्द होती उड़ानों और यात्रियों की परेशानियों के सवाल पर अजित सिंह ने कहा, “हम सब जानते हैं कि उन्हें उड़ाने रद्द करने की जानकारी यात्रियों और डीजीसीए को देनी चाहिए थी, पर उन्होंने ऐसा नही किया. हम उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि किंगफिशर को किस तरह जीवन दान मिल सकता है.”

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उन्होंने कहा,“मैं नही चाहता कि एयरलाइन बंद हो जाए, नियम के मुताबिक ऐसा किया भी जा सकता है, पर इस वक्त हमारी प्राथमिकता है कि किंगफिशर इस समय जिन उड़ानों को संचालित कर रहा है उनमें यात्रियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए.”

अजित सिंह ने इस मामले पर डीजीसीए के साथ बैठक की है और मामले पर नज़र बनाए हुए है.

किंगफिशर से जवाब

पिछले कई दिनों से किंगफिशर की कई उड़ानें लगातार रद्द हो रही हैं जिस वजह से यात्रियों को काफ़ी दिक्कत झेलनी पड़ रही है. कई लोगों ने शिकायत की थी कि उन्हें पहले से इस बारे में सूचित भी नहीं किया गया था.इन सब शिकायतों के बाद डीजीसीए ने किंगफिशर से जवाब माँगा था.

किंगफिशर एयरलाइंस की उड़ानें लगातार रद्द होने के मामले पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने कंपनी को निर्देश दिए हैं कि वो ये जानकारी उपलब्ध कराए कि वो आख़िरकर कितनी उड़ानें संचालित कर रहा है.

एयरक्राफ़्ट नियमों के तहत एयरलाइंस ऑपरेटरों को अपनी उड़ानों में रद्दोबदल करने से पहले डाइरेक्ट्रेट जनरल ऑफ़ सिविल एविएशन (डीजीसीए) की अनुमति लेनी पड़ती है.

किंगफिशर इस समय आर्थिक संकट से जूझ रहा है. तीसरी तीमाही में उसे करीब 444 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है और उस पर लगभग सात हज़ार करोड़ का कर्ज़ है.

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